30 साल BJP सांसद, आदिवासी मुद्दे अधूरे? मनसुख वसावा पर उठे सवाल, विपक्ष का तीखा वार

बीजेपी सांसद मनसुख वसावा को लेकर सियासत तेज हो गई है... विपक्ष का आरोप है कि तीन दशकों तक सांसद रहने के बावजूद आदिवासी... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के भरूच लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद मनसुख वसावा पर हाल ही में आम आदमी पार्टी की ओर से तीखा हमला बोला गया है.. AAP का आरोप है कि मनसुख वसावा पिछले 30 साल से सांसद हैं.. लेकिन उन्होंने अपने क्षेत्र के आदिवासियों के लंबित मुद्दों.. और अधिकारों के लिए कभी आवाज नहीं उठाई.. पार्टी का कहना है कि ऐसे असफल सांसदों की वजह से आगामी तालुका.. और जिला पंचायत चुनावों में भाजपा की जमानत जब्त हो सकती है.. जिससे भाजपा में बेचैनी बढ़ गई है.. AAP ने यह भी कहा कि मनसुख वसावा पार्टी में कुछ खास सक्रिय नहीं हैं.. और वे अपने जिले का अध्यक्ष भी नहीं बन सकते.. वहीं यह हमला गुजरात की राजनीति में AAP की बढ़ती सक्रियता का हिस्सा माना जा रहा है.. जहां पार्टी आदिवासी बहुल इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है..

आपको बता दें कि मनसुखभाई धनजीभाई वसावा गुजरात के भरूच लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के वरिष्ठ सांसद हैं.. वे आदिवासी समुदाय से आते हैं.. और गुजरात की आदिवासी राजनीति का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं.. उनका राजनीतिक करियर 1990 के दशक से शुरू हुआ.. वे पहली बार 1998 में भरूच से सांसद चुने गए.. उसके बाद 1999, 2004, 2009, 2014, 2019 और 2024 में भी जीत हासिल की.. कुल मिलाकर वे 7 बार सांसद रह चुके हैं.. जो लगभग 26 साल का समय है.. हालांकि AAP का दावा 30 साल का है..

जानकारी के अनुसार मनसुख वसावा ने भाजपा में कई महत्वपूर्ण पद संभाले हैं.. वे पूर्व केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं.. 2014 से 2016 तक वे आदिवासी मामलों के राज्य मंत्री थे.. गुजरात भाजपा में वे आदिवासी विंग के प्रमुख रह चुके हैं.. भरूच क्षेत्र आदिवासी बहुल है.. जहां भिल, वसावा और गमित जैसे समुदाय रहते हैं.. वसावा का आधार इन्हीं समुदायों में मजबूत है.. लेकिन AAP का आरोप है कि इतने लंबे करियर में उन्होंने आदिवासियों के मुद्दों पर कुछ नहीं किया..

लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि मनसुख वसावा ने कई बार आदिवासी मुद्दों पर आवाज उठाई है.. संसद में वे आदिवासी विकास, वन अधिकार और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाते रहे हैं.. संसद के रिकॉर्ड के अनुसार.. उन्होंने 2024-25 सत्र में आदिवासी विकास कार्यक्रमों, आदिवासी क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं.. और आदिवासी इलाकों में शिक्षकों की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे.. वे भरूच के आदिवासी क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाओं की मांग भी उठा चुके हैं..

जनवरी 2026 में संकलन समिति की बैठक में मनसुख वसावा ने वन विभाग पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया.. और उन्होंने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के आसपास विकास के लिए वन नियमों में छूट दी जाती है.. लेकिन आदिवासी इलाकों में सड़क और पुल जैसे प्रोजेक्ट्स को रोका जाता है.. और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखने की बात कही.. आपको बता दें कि यह घटना द इंडियन एक्सप्रेस में रिपोर्ट हुई.. जो दिखाती है कि वे आदिवासी विकास के लिए सक्रिय हैं..

2020 में मनसुख वसावा ने पर्यावरण मंत्रालय की एक अधिसूचना पर विरोध जताया.. जिसमें नर्मदा जिले के 121 गांवों को इको-सेंसिटिव जोन घोषित किया गया था.. उनका कहना था कि इससे किसानों और आदिवासियों को नुकसान होगा.. वहीं इस मुद्दे पर उन्होंने भाजपा से इस्तीफा तक दे दिया था.. लेकिन बाद में वापस ले लिया.. और उन्होंने कहा था कि वे पार्टी छोड़कर भी अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे.. 2016 में उन्होंने आदिवासी विकास मंत्री जुअल ओरम पर आदिवासी मुद्दों पर ध्यान न देने का आरोप लगाया था..

बता दें कि इन तथ्यों से साफ है कि मनसुख वसावा ने आदिवासी मुद्दों पर कई बार आवाज उठाई है.. लेकिन आलोचक कहते हैं कि उनके प्रयासों से जमीनी स्तर पर बदलाव कम आया है.. भरूच और नर्मदा जिलों में वन अधिकार अधिनियम के तहत दावों का निपटारा धीमा है.. भूमि अधिग्रहण के मामले लंबित हैं.. और सरदार सरोवर बांध से प्रभावित आदिवासियों का पुनर्वास पूरा नहीं हुआ.. AAP इन्हीं मुद्दों पर हमला कर रही है..

आम आदमी पार्टी गुजरात में आदिवासी इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए भाजपा पर हमले तेज कर रही है.. AAP के डेडियापाड़ा विधायक चैतर वसावा.. जो मनसुख वसावा के ही क्षेत्र से हैं.. उन्होंने हाल ही में आरोप लगाया कि मनसुख जैसे सांसद 30 साल से कुछ नहीं कर रहे.. चैतर वसावा ने कहा कि ऐसे असफल सांसदों की वजह से तालुका.. और जिला पंचायत चुनावों में भाजपा की जमानत जब्त हो सकती है.. AAP का दावा है कि गुजरात में भाजपा के 30 साल के शासन में आदिवासियों का शोषण हुआ है..

आपको बता दें कि चैतर वसावा AAP के प्रमुख आदिवासी चेहरे हैं.. वे नर्मदा और भरूच जिलों में सक्रिय हैं.. 2022 में वे विधायक बने और आदिवासी अधिकारों पर लगातार बोलते हैं.. AAP की रणनीति है कि कांग्रेस की कमजोरी का फायदा उठाकर आदिवासी वोट बैंक को अपने पक्ष में करना है.. हाल के सर्वे में AAP का वोट शेयर आदिवासी बेल्ट में बढ़ा है.. और आम आदमी पार्टी परिवर्तन सभा जैसे कार्यक्रमों से लोगों को जोड़ रही है..

 

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