NCP के दोनों गुटों के विलय की चर्चा तेज, महाराष्ट्र में सियासी पारा हाई

अजित पवार की मौत के बाद भले ही उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली हो लेकिन इस बात की चर्चा आज भी महायुति की टेंशन बढ़ा रही है कि दोनों NCP एक हो सकती हैं यानी शरद पवार और अजित पवार की NCP एक साथ आएंगी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: महाराष्ट्र का सियासी पारा इन दिनों हाई चल रहा है, अजित पवार की मौत के बाद से एक खबर सियासी गलियारों में सुर्ख़ियों में बनी हुई है।

अजित पवार की मौत के बाद भले ही उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली हो लेकिन इस बात की चर्चा आज भी महायुति की टेंशन बढ़ा रही है कि दोनों NCP एक हो सकती हैं यानी शरद पवार और अजित पवार की NCP एक साथ आएंगी। हालांकि इसे लेकर नेताओं की लगातार प्रतिक्रिया भी सामने आ रही है। इन्ही अटकलों के बीच एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार ने भी इस पर ऐसा बयान दे दिया है जिससे हलचल तेज है. उन्होंने मीडिया से कहा कि इस मुद्दे पर अंतिम और आधिकारिक बयान खुद उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार स्वयं देंगी.

उन्होंने कहा कि शोक की निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद ही इस संवेदनशील विषय पर कोई सार्वजनिक चर्चा की जाएगी. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “13 दिन का शोक बीतने दीजिए, सुनेत्रा काकी स्वयं इस मामले पर बोलेंगी.” इस दौरान उन्होंने राजनीतिक जल्दबाजी से बचने की जरूरत पर भी जोर दिया. रोहित पवार ने कहा कि 28 जनवरी को अजित पवार के निधन के बाद परिवार और पार्टी के लिए यह समय भावनात्मक रूप से बेहद कठिन है. उन्होंने स्पष्ट किया कि 13 दिन की शोक अवधि पूरी होने के बाद, यानी नौ फरवरी के बाद ही NCP और NCP (SP) के संभावित विलय जैसे मुद्दों पर खुलकर बात की जा सकेगी. उन्होंने कहा कि राजनीतिक बयानबाजी में निकाले गए निष्कर्ष न केवल असंवेदनशील है, बल्कि परिवार की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाते हैं.

रोहित पवार ने यह भी बताया कि पार्टी के सभी विधायक, कार्यकर्ता, पदाधिकारी और पवार परिवार के सदस्य चाहते हैं कि सुनेत्रा पवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाए. उन्होंने संकेत दिया कि सुनेत्रा पवार न केवल संगठनात्मक रूप से स्वीकार्य चेहरा हैं, बल्कि पार्टी को एकजुट रखने की क्षमता भी रखती हैं. हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस संबंध में अंतिम निर्णय उचित समय आने पर ही सार्वजनिक किया जाएगा. उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि बहुत कम लोग इस पर चर्चा कर रहे हैं कि अजित पवार वास्तव में क्या चाहते थे. इसके बजाय बहस को जानबूझकर राजनीतिक रंग दिया जा रहा है और कुछ वरिष्ठ नेता इसे अपने हित में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. रोहित पवार ने साफ कहा कि उनका कद इतना बड़ा नहीं है कि वे विलय जैसे बड़े मुद्दे पर फैसला सुनाएं, लेकिन जनता तक अजित पवार की इच्छाओं को पहुंचाना उनकी प्राथमिकता जरूर है.

इस बीच शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने इस पर एक बार फिर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि एनसीपी के विलय का मामला उन्हीं पर छोड़ देना चाहिए. संजय राउत ने मुंबई में मीडिया से बात करते हुए एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की अटकलों पर कहा, ”अगर यह उनकी समस्या है, तो उन्हें इसका समाधान निकालना चाहिए, लेकिन एनसीपी के प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे शरद पवार को सलाह दे रहे हैं, यह बहुत दिलचस्प है.” शिवसेना (यूबीटी) के मुखपत्र ‘सामना’ के मुताबिक संजय राउत ने आगे कहा, ”जिन लोगों को शरद पवार राजनीति में लाए, जिन्हें पद, प्रतिष्ठा और ताकत दी, वही अब शरद पवार को सलाह दे रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए, लेकिन यह पूरी तरह से उनका आंतरिक मामला है. शरद पवार और अजित पवार गुट के नेताओं के बीच चल रही चर्चाओं से हमारा कोई लेना-देना नहीं है. हमारा ध्यान ‘इंडिया’ अलायंस और महाविकास अघाड़ी पर फोकस है.”

महाराष्ट्र की राजनीति में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दो गुटों का साथ आना एक बड़ा बदलाव ला सकता है। एनसीपी की स्थापना 1999 में शरद पवार ने की थी, लेकिन 2023 में अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार से अलग होकर पार्टी को दो हिस्सों में बांट दिया। अजित पवार का गुट महायुति गठबंधन में शामिल हो गया, जिसमें बीजेपी और शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) हैं, जबकि शरद पवार का गुट विपक्ष में रहा। अब, 2026 में अजित पवार की अचानक मौत के बाद दोनों गुटों के एक होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। शरद पवार ने खुद कहा है कि अजित पवार जिंदा रहते हुए दोनों गुटों को मिलाने के लिए उत्सुक थे और फरवरी 12 को इसकी घोषणा होने वाली थी। लेकिन अजित की मौत ने सब कुछ अनिश्चित कर दिया है। अगर दोनों गुट वाकई साथ आते हैं, तो महाराष्ट्र की सियासत में कई बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जैसे गठबंधनों का नया रूप, चुनावी रणनीतियां और नेतृत्व की लड़ाई।

ऐसे में अब बात करें सबसे पहले, अगर एनसीपी के दोनों गुट मिल जाते हैं, तो महायुति गठबंधन मजबूत हो सकता है। अजित पवार का गुट पहले से ही सरकार में है, और शरद पवार का गुट अगर इसमें शामिल होता है, तो बीजेपी को और ज्यादा समर्थन मिलेगा। शरद पवार की राजनीतिक समझ और अनुभव से गठबंधन को फायदा होगा, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहां एनसीपी का आधार मजबूत है। हाल की रिपोर्ट्स बताती हैं कि मर्जर की बातें काफी आगे बढ़ चुकी थीं, और इसमें कैबिनेट में बदलाव की भी योजना थी। लेकिन सवाल यह है कि शरद पवार बीजेपी के साथ हाथ मिलाएंगे या नहीं। अजित पवार गुट के नेता पूछ रहे हैं कि अगर मर्जर होता है, तो शरद पवार एनडीए को समर्थन देंगे या विरोध में रहेंगे। अगर वे समर्थन देते हैं, तो देवेंद्र फडणवीस की सरकार और स्थिर हो जाएगी, और विपक्ष कमजोर पड़ सकता है। वहीं, अगर शरद पवार विरोध में रहते हैं, तो एनसीपी का एकीकरण टूट सकता है या नई टूट-फूट हो सकती है।

वहीं दूसरी तरफ, विपक्ष के लिए यह एक झटका होगा। महाविकास अघाड़ी (एमवीए) में कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार गुट) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना शामिल हैं। अगर शरद पवार का गुट महायुति में चला जाता है, तो एमवीए टूट सकता है। शरद पवार को महाराष्ट्र की राजनीति का ‘चाणक्य’ कहा जाता है, और उनका जाना विपक्ष की रणनीति को कमजोर कर देगा। हाल के लोकल चुनावों में दोनों एनसीपी गुटों ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, जैसे पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में, जो एकीकरण की ओर इशारा करता है। इससे वोटों का बंटवारा रुक सकता है, और एकीकृत एनसीपी ज्यादा सीटें जीत सकती है। लेकिन अजित पवार की मौत के बाद सुनेत्रा पवार को विधायी दल का नेता बनाया गया है, जो परिवार में नई नेतृत्व की लड़ाई शुरू कर सकती है। शरद पवार ने सुनेत्रा की डिप्टी सीएम बनने पर कहा कि उनसे सलाह नहीं ली गई, जो असहमति दिखाता है।

वहीं चुनावी नजरिये से देखें तो, एकीकृत एनसीपी महाराष्ट्र में तीसरी सबसे बड़ी ताकत बन सकती है। 2024 के विधानसभा चुनावों में दोनों गुटों ने अलग-अलग लड़कर वोट खोए थे, लेकिन साथ आने से वे बीजेपी और कांग्रेस दोनों को चुनौती दे सकते हैं। ग्रामीण महाराष्ट्र, जहां किसान और सहकारी संस्थाएं एनसीपी का आधार हैं, वहां पार्टी मजबूत हो जाएगी। लेकिन चुनौतियां भी हैं। अजित पवार गुट के नेताओं का कहना है कि मर्जर के लिए शरद पवार को बीजेपी के साथ आना होगा, वरना बात नहीं बनेगी। वहीं, शरद पवार के करीबी जयंत पाटिल ने कहा कि अजित पवार खुद मर्जर चाहते थे और फरवरी 12 को घोषणा होने वाली थी। अगर मर्जर होता है, तो परिवार के अंदर सुलझाव आ सकता है, लेकिन राजनीतिक रूप से बीजेपी को फायदा होगा क्योंकि एनसीपी का विरोधी गुट कमजोर पड़ जाएगा।

कुल मिलाकर, दोनों एनसीपी गुटों का साथ आना महाराष्ट्र की सियासत को नया मोड़ दे सकता है। यह गठबंधनों को मजबूत कर सकता है, लेकिन परिवार और पार्टी में नई कलह भी पैदा कर सकता है। अजित पवार की मौत ने सब कुछ रोक दिया है, लेकिन चर्चाएं जारी हैं। शरद पवार की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए, सुनेत्रा पवार या अन्य नेता नई भूमिका निभा सकते हैं। अगर मर्जर होता है, तो महायुति सरकार और मजबूत होगी, और 2029 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को फायदा मिलेगा। लेकिन अगर नहीं होता, तो एनसीपी कमजोर रहेगी और विपक्ष फायदा उठा सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति हमेशा अनिश्चित रही है, और यह घटना इसे और रोचक बना देगी। हाल की रिपोर्ट्स से लगता है कि मर्जर की संभावना अभी भी बनी हुई है, लेकिन अंतिम फैसला परिवार और नेताओं पर निर्भर करेगा। गौरतलब है कि यह मामला अभी महाराष्ट्र की सियासत में चर्चा का अहम विषय बना हुआ है। ऐसे में देखना ये होगा कि आखिर कब तक यह साफ हो पाएगा कि दोनों NCP एक होंगी या फिर महाराष्ट्र की सियासत में कोई नया गुल ही खिलेगा, खैर अब ये तो आने वाले समय में ही तय हो पाएगा।

Related Articles

Back to top button