BJP को हराने की बड़ी चाल! उद्धव-शिंदे सेना साथ आई, NCP भी एकजुट

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा सियासी मोड़ देखने को मिल रहा है... भाजपा के खिलाफ उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः राजनीति में कब क्या हो जाए कुछ भी कहा नहीं जा सकता है.. कब किस करवट ऊंट बैठ जाए इसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता है.. इसी कड़ी में महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा.. और चौंकाने वाला उलटफेर देखने को मिल रहा है.. जहां सोलापुर जिले के बारशी तालुका में आगामी जिला परिषद.. और पंचायत समिति चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए धुर विरोधी राजनीतिक गुटों ने हाथ मिला लिया है.. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना.. और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दोनों गुटों शरद पवार गुट.. और अजित पवार गुट के साथ गठबंधन किया है.. वहीं यह गठबंधन ‘महा-मोर्चा’ या ‘महा अघाड़ी’ के नाम से जाना जा रहा है.. और यह सिर्फ स्थानीय स्तर पर सीमित है.. उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने खुद इस गठबंधन का प्रचार किया.. और उद्धव गुट के साथ मंच साझा किया.. जो राजनीतिक पंडितों को हैरान कर रहा है.. जानकारी के अनुसार चुनाव 7 फरवरी 2026 को होने वाले हैं.. और इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य भाजपा के बढ़ते प्रभाव को रोकना है..

आपको बता दें कि यह गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया अध्याय खोल सकता है.. जहां राज्य स्तर पर ये गुट एक-दूसरे के खिलाफ तीखी बयानबाजी करते हैं.. शिंदे गुट और अजित पवार गुट भाजपा के साथ महायुति गठबंधन में हैं.. और राज्य सरकार चला रहे हैं.. जबकि उद्धव गुट और शरद पवार गुट विपक्षी महा विकास अघाड़ी में हैं.. लेकिन बारशी जैसे स्थानीय स्तर पर भाजपा को रोकने के लिए ये सभी एक हो गए हैं.. बारशी तालुका में 238 गांव हैं.. और यहां ZP की 6 सीटें और पंचायत समिति की 12 सीटें हैं.. गठबंधन का फोकस इन सीटों पर भाजपा को हराना है.. जहां भाजपा का प्रभाव हाल के वर्षों में बढ़ा है.. जानकारी के मुताबिक दो महीने पहले कृषि उपज बाजार समिति चुनावों में भाजपा ने 18-0 से जीत हासिल की थी..

वहीं इस गठबंधन की सबसे बड़ी तस्वीर वैराग गांव में हुई एक चुनावी रैली में दिखी.. जहां 5 फरवरी 2026 को वैराग में आयोजित.. इस रैली में एकनाथ शिंदे ने उद्धव गुट के विधायक दिलीप सोपाल के साथ मंच साझा किया.. शिंदे ने मजाक में कहा कि सोपाल ने गलत बस पकड़ ली.. वरना वे कैबिनेट मंत्री होते.. शिंदे का इशारा 2024 के विधानसभा चुनावों की ओर था.. जब सोपाल ने उद्धव गुट के साथ रहकर शिंदे का साथ नहीं दिया.. रैली में शिंदे ने गठबंधन के उम्मीदवारों के लिए प्रचार किया.. और कहा कि स्थानीय स्तर पर एकजुट होकर भाजपा को रोकना जरूरी है.. दिलीप सोपाल, जो बारशी से उद्धव गुट के विधायक हैं.. उन्होंने इस गठबंधन की घोषणा की थी.. और उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर शिंदे गुट को आमंत्रित किया.. और कहा कि महा अघाड़ी बनाकर भाजपा को हराना है..

जानकारी के अनुसार सीट शेयरिंग के मामले में गठबंधन काफी स्पष्ट है.. बारशी में अजित पवार के NCP को 3 ZP सीटें.. और 8 पंचायत समिति सीटें मिली हैं.. शिंदे शिवसेना को 2 ZP सीटें.. और 4 पंचायत समिति सीटें दी गई हैं.. उद्धव गुट की शिवसेना (UBT) को 1 ZP सीट मिली है.. सभी पार्टियां अपने-अपने चुनाव चिन्हों पर लड़ेंगी.. UBT का मशाल, NCP गुटों का घड़ी और तुतारी, शिंदे सेना का धनुष-बाण.. लेकिन चुनाव पूर्व समझौते के तहत वे भाजपा के खिलाफ एकजुट रहेंगे.. यह गठबंधन बारशी तालुका तक सीमित है.. लेकिन अगर सफल रहा तो अन्य जिलों में भी ऐसे मोर्चे बन सकते हैं..

वहीं इस पूरे खेल को जानने के लिए महाराष्ट्र की राजनीति का बैकग्राउंड समझना जरूरी है.. ताकि इस गठबंधन की अहमियत पता चले.. आपको बता दें कि शिवसेना का विभाजन जून 2022 में हुआ था.. जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत की.. और 40 विधायकों के साथ भाजपा से हाथ मिला लिया.. शिंदे मुख्यमंत्री बने और उनकी सरकार में अजित पवार का NCP भी शामिल हुआ.. NCP का विभाजन जुलाई 2023 में हुआ.. जब अजित पवार ने शरद पवार से अलग होकर शिंदे-भाजपा सरकार जॉइन की.. उद्धव गुट और शरद पवार गुट अब विपक्ष में हैं.. राज्य स्तर पर ये गुट एक-दूसरे पर तीखे हमले करते हैं.. लेकिन स्थानीय चुनावों में सियासी समीकरण अलग होते हैं.. बारशी में भाजपा के पूर्व विधायक राजेंद्र राउत का प्रभाव मजबूत है.. जो मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी हैं.. राउत ने पहले शिंदे से टैक्टिकल गठबंधन किया था.. लेकिन शिंदे कार्यकर्ताओं को सीटें नहीं मिलीं, जिससे नाराजगी थी..

इस गठबंधन पर उद्धव गुट में भी कुछ असमंजस है.. शिवसेना (UBT) के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि पार्टी लीडरशिप को इसकी पूरी जानकारी नहीं थी.. और उद्धव ठाकरे भी पूरी तरह अवेयर नहीं हैं.. राउत ने कहा कि वे विधायक दिलीप सोपाल से बात करेंगे.. हालांकि राउत ने यह भी जोड़ा कि जहां भाजपा को हराने का मौका हो.. वहां वे समर्थन करते हैं.. लेकिन बारशी का गठबंधन पार्टी की आधिकारिक नीति नहीं है.. उद्धव गुट ने पहले भी MNS के साथ KDMC चुनाव में गठबंधन को अस्वीकार किया था.. लेकिन दिलीप सोपाल ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ लोकल पॉलिटिक्स है.. और भाजपा को रोकने के लिए जरूरी है..

 

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