Himanta Biswa Sarma पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार, Assam की राजनीति में भारी उबाल!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रह है...जिसके बाद सवाल उठा कि क्या असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जेल जाएंगे?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रह है…जिसके बाद सवाल उठा कि क्या असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा जेल जाएंगे?

दरअसल, मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं…गन शॉट से जुड़े एक वीडियो को लेकर विपक्ष ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई है और अब उनकी गिरफ्तारी की मांग भी उठने लगी है…पहले से विवादित बयानों के कारण घिरे सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के लिए ये वीडियो अब उनकी गिरफ्तारी की वजह बन गया है…जिससे बीजेपी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं…तो गन शॉट वाले वीडियो को लेकर FIR के बाद अब किसने की गिरफ्तारी की मांग…जिससे सीएम हिमंता बिस्वा सरमा की कुर्सी पर खतरा मंडराने की होने लगी बात..

असम की राजनीति इस समय जबरदस्त उबाल पर है और राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर गिरफ्तारी की तलवार लटकती नजर आ रही है…बीते दिनों एक शूटिंग वीडियो को लेकर खड़ा हुआ विवाद अब महज सोशल मीडिया बहस तक सीमित नहीं रहा…बल्कि कानूनी और राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है…विपक्षी दलों ने इसे न केवल आपत्तिजनक बताया है…बल्कि इसे सांप्रदायिक सद्भाव पर सीधा हमला करार देते हुए हिमंता बिस्वा सरमा की तत्काल गिरफ्तारी की मांग तेज कर दी है…

ये पूरा मामला 7 फरवरी को सामने आए एक वीडियो से शुरू हुआ…बताया गया कि ये वीडियो असम बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से शेयर किया गया था…वीडियो में हिमंता बिस्वा सरमा को दो मुस्लिम व्यक्तियों की ओर राइफल ताने हुए दिखाया गया…वीडियो के सामने आते ही राजनीतिक हलकों में भूचाल आ गया…विपक्ष ने आरोप लगाया कि…ये दृश्य न केवल गैर-जिम्मेदाराना है…बल्कि राज्य के संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के आचरण के खिलाफ भी है…

हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद वीडियो को हटा लिया गया…लेकिन तब तक मामला तूल पकड़ चुका था…विपक्ष का कहना है कि वीडियो हटाना ये स्वीकार करने जैसा है कि उसमें कुछ तो गलत था…असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस पूरे प्रकरण को लेकर हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ FIR दर्ज कराई…कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ये सिर्फ एक वीडियो नहीं, बल्कि पिछले कई महीनों से चल रही एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है…जिसमें एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है…

इसी कड़ी में AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने इस मामले में सबसे कड़ा रुख अपनाया है…उन्होंने हिमंता बिस्वा सरमा की तत्काल गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि…पिछले 6 महीनों से एक खास समुदाय के खिलाफ नफरत भरे बयान दिए जा रहे हैं…अजमल ने मांग की है कि…अदालत मुख्यमंत्री को चुनाव लड़ने से रोके और उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए…बदरुद्दीन अजमल का कहना है कि हिमंता बिस्वा सरमा अपने पद पर बने रहने के योग्य नहीं हैं…बदरूद्दीन अजमल का कहना है कि अगर किसी आम नागरिक ने इस तरह का वीडियो जारी किया होता…तो अब तक उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो चुकी होती…लेकिन मुख्यमंत्री होने के कारण प्रशासन चुप्पी साधे हुए है…

वहीं, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है…ओवैसी ने हैदराबाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और सवाल उठाया कि…हिमंता बिस्वा सरमा लंबे समय से विभिन्न मंचों के जरिए मुस्लिम विरोधी भावनाएं भड़का रहे हैं…लेकिन उनका हालिया वीडियो सबसे ज्यादा चिंताजनक है…ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था…जिसे बाद में सीएम हिमंत बिस्वा सरमा की तरफ से इसे हटा लिया गया…साथ ही औवैसी ने एख्स पर लिखा कि…. मैंने Hyderabad City Police के समक्ष आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई है और हिमंता शर्मा के (अब हटाए गए) हिंसक वीडियो के लिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है…जिसमें उन्हें मुसलमानों पर गोली चलाते हुए दिखाया गया है..दुर्भाग्य से, नरसंहारकारी घृणास्पद भाषण आम बात हो गई है….

वहीं इस वीडियो को लेकर वाम दलों ने भी इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाया है…CPM और CPI ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और मांग की है कि मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए…उनका कहना है कि ये सिर्फ असम का मामला नहीं…बल्कि देश की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष संरचना से जुड़ा सवाल है…

जबकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये विवाद ऐसे समय में उभरा है…जब असम की राजनीति पहले से ही ध्रुवीकरण के दौर से गुजर रही है…मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने बयानों और सख्त प्रशासनिक कदमों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहे हैं…समर्थक उन्हें कड़े फैसले लेने वाला नेता बताते हैं…जबकि विपक्ष उन्हें विवादों से घिरे मुख्यमंत्री करार देते हैं..

ऐसे में अब सवाल ये उठ रहा है कि क्या ये मामला केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित रहेगा या वास्तव में कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ेगा…FIR दर्ज होने के बाद जांच प्रक्रिया शुरू हो सकती है और अगर अदालतों ने इसे गंभीर माना तो मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं…विपक्ष का कहना है कि ये मामला सिर्फ एक वीडियो का नहीं…बल्कि उस मानसिकता का है…जो समाज में विभाजन की रेखाएं गहरी करती है….कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार की नीतियां और बयान लगातार एक खास समुदाय को लक्ष्य बनाते रहे हैं…उनका कहना है कि मुख्यमंत्री का ये गन शॉट उसी राजनीति का हिस्सा है…

दूसरी ओर, बीजेपी की ओर से इस मामले पर सफाई दी जा रही है…पार्टी के नेताओं का कहना है कि वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया है और इसे राजनीतिक लाभ के लिए बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है…हालांकि, भाजपा नेताओं का ये तर्क विपक्ष को संतुष्ट नहीं कर पा रहा…असम की जनता के बीच भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है…सोशल मीडिया पर बहस तेज है और कई नागरिक संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है…कुछ संगठनों का कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री का आचरण संविधान के अनुरूप होना चाहिए और उन्हें ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जिससे सामाजिक तनाव बढ़े…साथ ही चर्चा में ये भी है कि अगर जांच आगे बढ़ती है और अदालत कोई सख्त टिप्पणी करती है…तो इससे न केवल मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की व्यक्तिगत छवि प्रभावित होगी….बल्कि असम की राजनीति की दिशा भी बदल सकती है…ऐसे में अब गिरफ्तारी की मांग ने पहले ही राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है….

क्योंकि पहले ही मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने देशभर में 100 एफआईआर दर्ज करने का ऐलान करते हुए तैयारी शुरू कर दी है…वहीं अगर FIR की बात करें…तो अब तक अहमदाबाद और उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में सीएम के खिलाफ शिकायतें दर्ज भी कराई गई हैं…बताया जा रहा है कि इस मुहिम का मकसद संदेश देना है कि ऐसी बयानबाजी और ध्रुवीकरण की राजनीति को केवल असम तक सीमित नहीं रहने दिया जाएगा…इसका देशभर में इसका विरोध होगा…

वहीं इसे लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी लोकतंत्र में संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की जिम्मेदारी सामान्य नागरिक से कहीं अधिक होती है…ऐसे में अगर हिमंता बिस्वा सरमा पर गंभीर आरोप लगते हैं…तो पारदर्शी और निष्पक्ष जांच ही एकमात्र रास्ता होता है…जिससे जनता का विश्वास कायम रह सके…..हालांकि, अभी ये देखना बाकी है कि जांच एजेंसियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं और अदालतें इस पर क्या रुख अपनाती हैं…लेकिन इतना तो तय है कि ये विवाद जल्द थमता नहीं दिख रहा…जिसकी वजह से मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के सामने राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर चुनौती खड़ी हो गई है….

गिरफ्तारी की मांग ने असम की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है….विपक्ष इसे लोकतांत्रिक मूल्यों की लड़ाई बता रहा है…जबकि सत्तापक्ष इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहा है….ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि…आने वाले दिनों में ये विवाद किस करवट बैठेगा….ये तो समय ही बताएगा…..लेकिन फिलहाल असम की सियासत में उबाल अपने चरम पर है और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार ने पूरे राज्य की राजनीति को झकझोर कर रख दिया है..

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