बीजेपी की तैयारी: राहुल गांधी को प्रिविलेज नोटिस? हरदीप पुरी ने खुद कबूली एपस्टीन फाइल की सच्चाई
राहुल गांधी ने भरे सदन में बजट परिचर्चा के दौरान यूएस-भारत ट्रेड डील पर सवाल क्या उठाया, उनको घेरने के लिए मोदी सरकार पूरी ताकत से जुट गई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राहुल गांधी ने भरे सदन में बजट परिचर्चा के दौरान यूएस-भारत ट्रेड डील पर सवाल क्या उठाया, उनको घेरने के लिए मोदी सरकार पूरी ताकत से जुट गई है।
बड़ी खबर सामने आई है कि मोदी सरकार राहुल गांधी को प्रिविलेज नोटिस यानि विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने जा रही है। हालांकि इस बीच पीएम साहब के मंत्री हरदीप पुरी ने खुद पूरे मामले पर बड़ा बयान देकर सनसनी मचा दी है और इस बयान के बाद न सिर्फ बीजेपी बुरा फंस गई है कि बल्कि उनका प्रिविलेज वाला गेम भी कहीं न कहीं पलटता नजर आ रहा है। ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी बीजेपी की तरफ से नया फार्मूला लेकर निशिकांत दूबे मैदान ले चुके हैं। ऐसे में वीडियो बहुत ही इनटरेस्टिंग होने वाली है। हम चर्चा करेंगे कि राहुल गांधी ने सदन में क्या केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी को लेकर सवाल उठाया और कैसे हरदीपपुरी ने जवाब दिया और अब पूरे मामले पर निशिकांत दूबे जी क्या नया फार्मूला लेकर आ गए हैं।
बजट सत्र में चल रहे भयंकर गतिरोध के बाद कल राहुल गांधी बजट पर चर्चा के लिए सदन में अपनी बात रखी लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उनके भाषण को लेकर भयंकर विवाद हो गया है। राहुल गांधी ने बजट परिचर्चा में यूए-भारत ट्रेड डील पर निशाना साधते हुए सरकार पर भारत को गिरवी रखने का बड़ा आरोप लगाया था। सदन में राहुल गांधी ने तथ्यों के साथ बताया था कि ट्रेड डील में भारत का न सिर्फ भारत का भयंकर नुकसान है बल्कि ये डील किस आधार पर की गई है और सरकार इसको किस आधार पर सही कह रही है, ये अपने आप में एक बड़ा रहस्य है। राहुल गांधी का दावा था कि मोदी सरकार ने देश के हितों से समझौता कर दिया है। इस बीच राहुल गांधी ने समझौते के कई दावे गिनाने थे, जिसमें एक दावा एपस्टीन फाइल को लेकर भी था।
किस तरह से कार्यवाहक स्पीकर जगदंबिका पाल का दावा है कि बिना तथ्यों के यह दावा पेश नहीं किया जा सकता है। इस पर खुद किरेण रिजिजू ने खडे हो ये कहा कि स्पीकर के कहने के बाद जिस तरह से राहुल गांधी ने सदन में अपनी बात कही है उनको इसका सबूत देना होगा। हालांकि राहुल गांधी इसका सबूत देने को तुरंत तैयार भी थे। वो हाथ में एक कागज दिखा रहे थे लेकिन बाद में स्पीकर के कहने पर उन्होंने अपनी बात को आगे जारी रखा और ट्रेड डील को लेकर काफी कुछ कहा।
लेकिन बाद में सदन के बाहर निकलते ही बीजेपी ने राहुल गांधी को घरने कीे एक नई स्ट्रेटजी तैयार की है। बीजेपी का दावा है कि राहुल गांधी ने जो बातें सदन में कही हैं वो सही नहीं है। इसके लिए राहुल गांधी को प्रिविलेज नोटिस दिया जाए।
हालांकि इधर किरेन रिजिजू जी का बयान आया तो उधर थोड़ी देर बाद खुद ही पीएम साहब के मंत्री कैमरे पर आए और उन्होंने यह बात कबूल की कि सच में वो एपस्टीन से एक बार नहीं तीन चार बार मिले हैं। हालांकि मंत्री जी का दावे है कि उनकी मुलाकात एक अनौपचारिक थी और वो किसी काम के सिलसिले में बिल्कुल नहीं थी। हालांकि सदन में राहुल गांधी ने सिर्फ मुलाकात का ही जिक्र किया था, उन्होंने कोई भी गंभीर आरोप मंत्री पर नहीं लगाए थे।
खुद पीएम साहब के मंत्री हरदीप पुरी ने माना है कि वो मिस्टर एपस्टीन से मिले थे लेकिन ये अनौपचारिक मुलाकातें थीं। ऐसे में कहीं न कहीं बीजेपी को प्रिविलेज नोटिस का खेल कुछ फीका पड़ा गया है। हालांकि कुछ दावे अभी भी है कि राहुल गांधी को प्रिविलेज नोटिस दिया जाएगा।
सदन में प्रिविलेज नोटिस यानि कि विशेषाधिकार प्रस्ताव तब लाया जाता है जब किसी सदस्य या मंत्री द्वारा सदन, या इसके सदस्यों के विशेषाधिकारों का हनन या अपमान किया जाता है। अध्यक्ष/सभापति की अनुमति मिलने पर, मामला जांच के लिए विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है, जो दोषी को फटकार, चेतावनी या निलंबन जैसी कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है। इसमें किसी सदस्य को अध्यक्ष (लोकसभा) या सभापति (राज्यसभा) को लिखित में नोटिस देना होता है, आमतौर पर सदन की कार्यवाही से पहले।
अध्यक्ष या सभापति देखते हैं कि मामला हाल की घटना से संबंधित है या नहीं और उसमें प्रथम दृष्टया विशेषाधिकार हनन का आधार है या नहीं। यदि नोटिस स्वीकार किया जाता है, तो सदस्य को सदन में इसे उठाने की अनुमति दी जाती है। अधिकतर मामलों में, स्वीकार्य नोटिस को जांच के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाता है जिसमें लोकसभा में 15, राज्यसभा में 10 सदस्य होते हैं। सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाती है। समिति अपनी रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत करती है। दोषी पाए जाने पर सदन सदस्य को चेतावनी, फटकार, या सदन की सेवा से निलंबित कर सकता है।
यदि कोई सदस्य बिना शर्त माफी मांगता है, तो सदन आमतौर पर मामले को छोड़ देता है लेकिन पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के खिलाफ सदन से निलंबित भी इसी तरह के मामले में किया जा चुका है। लेकिन अब इससे अलग बीजेपी के सांसद निशिकांत दूबे जी का एक अलग बयान आ गया है। वो राहुल गांधी की न सिर्फ संसद सदस्यता रद्द कराने के बल्कि राहुल गांधी कभी चुनाव न लड़ पाएं, इसका प्रस्ताव लाने की तैयारी में बताए जा रहे हैं। उनका दावा है कि इस बार राहुल गांधी के खिलाफ इतना ठोस प्रस्ताव लाएंगे कि न राहुल कभी संसद का चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे.



