इलाहाबाद  HC का बड़ा फैसला: सरकारी अधिकारी पर लगे रेप के आरोप खारिज

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ रेप के आरोप खारिज कर दिए और कहा कि रिश्ता आपसी सहमति से था, ब्लैकमेल की धमकियों से नहीं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ रेप के आरोप खारिज कर दिए और कहा कि रिश्ता आपसी सहमति से था, ब्लैकमेल की धमकियों से नहीं. कोर्ट ने महिला के इस कबूलनामे पर ध्यान दिया कि उसने कथित वीडियो कभी नहीं देखा और लगातार सवाल उठाया.

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेप के आरोपी एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ चार्जशीट समेत क्रिमिनल कार्रवाई रद्द कर दी है. कोर्ट ने कहा कि वीडियो वायरल करने की धमकी देकर लंबे समय तक जबरन सेक्स करने के आरोप पहली नज़र में टिकने लायक नहीं हैं. मामले में कोर्ट ने माना है कि महिला ने आरोपी के साथ संबंध सहमति से बनाए थे.

जस्टिस अवनीश सक्सेना ने सोमवार को यह फैसला नीरज कुमार और उनके कजिन की भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के सेक्शन 528 के तहत दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुनाया है. अर्जी में उनके खिलाफ चार्जशीट रद्द करने की मांग की गई थी.

क्या है पूरा मामला?

1 दिसंबर 2024 को एक महिला ने FIR दर्ज कराई थी, जिसके मुताबिक महिला प्रोविंशियल सिविल सर्विसेज़ (PCS) एग्जाम की तैयारी कर रही थी, जब उसकी दोस्ती ममता नाम की एक महिला से हुई, जिसने उसे अपने भाई नीरज कुमार से मिलवाया. महिला का पति आर्मी था, तो वह उससे दूर रहकर ही तैयारी कर रही थी.

शिकायत करने वाली महिला ने आरोप लगाया कि 7 अगस्त 2022 को कुमार ने उसे अपने जन्मदिन के मौके पर बरेली के एक होटल में बुलाया और वहां उसके साथ रेप किया. उसने आगे दावा किया कि उसने आपत्तिजनक वीडियो बनाए और उन्हें वायरल करने की धमकी दी. उसने आगे आरोप लगया कि कुमार ने धमकी देकर उसका अलग-अलग होटलों में कई बार रेप किया.

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि 19 मई, 2024 को कुमार ने आपत्तिजनक वीडियो अपने कज़िन को ट्रांसफर कर दिए, जिसने फिर उन्हें वायरल करने की धमकी दी और सेक्सुअल फेवर की मांग की. जब उसने मना कर दिया, तो कथित तौर पर वीडियो उसके परिवार वालों को भेज दिए गए.

कोर्ट ने महिला के आरोपों पर क्या कहा?

कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड और महिला के बयान की जांच करने के बाद, कोर्ट ने आरोपों पर गंभीर शक जताया. कोर्ट ने कहा कि महिला ने माना है कि उसने असल में वे वीडियो कभी नहीं देखे जिनके बारे में उसने दावा किया था कि उनका इस्तेमाल उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया गया था.

कोर्ट ने कहा, “पीड़िता ने खुद कहा है कि उसने 7 अगस्त, 2022 को वीडियो नहीं देखे थे. यह मानना ​​मुश्किल है कि एक शादीशुदा महिला के साथ होटलों में लगातार सेक्स किया गया क्योंकि उसे डर था कि उसके वीडियो वायरल कर दिए जाएंगे.”

फैसले में यह भी बताया गया कि महिला और आरोपी 2017 से एक-दूसरे को जानते थे और 2017 से 2019 के बीच पार्कों और अपने-अपने घरों सहित कई जगहों पर कई बार मिले थे. कोर्ट ने आगे कहा कि महिला के पति या परिवार के सदस्यों को कोई अश्लील वीडियो या तस्वीर ट्रांसफर किए जाने का कोई सबूत नहीं था और होटलों से कोई CCTV फुटेज भी पेश नहीं किया गया था.

कोर्ट ने आगे कहा, “रिकॉर्ड में किसी भी अश्लील वीडियो के ट्रांसफर के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. ये सभी बातें बताती हैं कि पीड़िता की सहमति थी, जिसकी सहमति न तो उसके बच्चों की मौत के डर से ली गई थी और न ही उसे ब्लैकमेल करने के लिए.”

कोर्ट ने ये सभी तर्क देते हुए दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई रद्द करते हुए, कोर्ट ने यह नतीजा निकाला कि रेप या ब्लैकमेल के आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं था.

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