देवघर कोषागार घोटाला: लालू की सजा निलंबन पर SC में अप्रैल से होगी सुनवाई
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से चारा घोटाले में सजा पाए आरोपियों के सजा से निलंबन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से चारा घोटाले में सजा पाए आरोपियों के सजा से निलंबन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी. इस मामले में आज मंगलवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच में सुनवाई हुई.
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के देवघर जिला कोषागार घोटाले मामले में मिली सजा के निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल से सुनवाई होगी. सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में लालू की सजा के निलंबन को चुनौती दी और कहा कि ये लोग अवैध रूप से बाहर हैं.
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से चारा घोटाले में सजा पाए आरोपियों के सजा से निलंबन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई गई थी. इस मामले में आज मंगलवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एनके सिंह की बेंच में सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील ने कहा कि ये सभी आरोपी अवैध रूप से बाहर हैं. और ये दोषसिद्धि के बाद की स्थिति है.
मर गए लोगों के केस को बंद कर देंगेः SC
इस पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि फाइलें यूं ही लंबित पड़ी हुई हैं. हम अप्रैल में सुनवाई की तारीख देंगे. जिन मामलों में प्रतिवादियों की मृत्यु हो गई है, उन्हें हम बंद कर देंगे.
देवघर जिला कोषागार घोटाले में साल 1990 और 1994 के बीच देवघर ट्रेजरी से 89 लाख रुपये की कथित हेराफेरी शामिल है. पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और आरजेडी के प्रमुख लालू यादव को इस घोटाले में दोषी ठहराया गया था. साल 2017 में CBI की स्पेशल कोर्ट ने उन्हें 3.5 साल की सजा सुनाई थी.
फेक रसीद के जरिए निकाले गए थे 89 लाख
देवघर जिला पशुपालन विभाग को दवा और अस्पताल के लिए सामानों की खरीद के लिए 4.7 करोड़ रुपए दिए गए थे. लेकिन आरोप लगा कि घोटाला करने वालों ने फेक रसीद के सहारे 89 लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली. इस केस में लालू पर यह आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग किया. मामले की जांच के लिए आई फाइल को अपने पास रोके रखा.
केस को लेकर यह मामला जब गंभीर हुआ तो जांच के आदेश दिए गए. लालू यादव देवघर चारा घोटाला मामले के साथ ही 4 अन्य केस में भी सजायाफ्ता हैं. उन्हें चाईबासा ट्रेजरी से अवैध निकासी के 2 मामले के अलावा दुमका ट्रेजरी से अवैध निकासी और डोरंडा मामले में सजा सुनाई जा चुकी है.



