बच्चों में गुस्सा कम करने के लिए कराएं ये योगासन

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
आज के बच्चे उम्र से पहले ही बड़े हो रहे हैं। उनका बर्ताव अब बच्चों जैसा न रहकर चिड़चिड़ा, गुस्सैल होता जा रहा है। इसका कारण है उनके आसपास का माहौल। मोबाइल स्क्रीन, ऑनलाइन क्लास, लगातार तुलना, पढ़ाई का दबाव और खेलने के लिए घटती खुली जगहों के कारण बच्चों में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा, बात-बात पर चिड़चिड़ापन और बेचैनी देखने को मिलती है। माता-पिता अक्सर इसे उम्र का असर या जिद कहकर टाल देते हैं, लेकिन इसे अनदेखा करना बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। बच्चों का मन थक चुका है और यह थकान उनके व्यवहार में दिखती है। उनके बाल मन से गुस्सा और चिड़चिड़ापन दूर रखने के लिए योग का सहारा लें। योग उनके लिए किसी संस्कार की तरह ही जरूरी है। योग से बच्चा सांस, संतुलन और स्थिरता को अपनाता है। ये तीनों मिलकर बच्चों के भीतर वह ठहराव पैदा करते हैं, जो आज की तेज दुनिया ने उनसे छीन लिया है। नियमित योग बच्चों को प्रतिक्रिया देने से पहले सोचने की आदत सिखाता है।

भुजंगासन

इस आसन से दबा हुआ तनाव बाहर निकालता है। इससे सीने का विस्तार होता है, सांस गहरी होती है। गुस्सा और घबराहट धीरे-धीरे कम होने लगती है। भुजंगासन के अभ्यास के लिए पेट के बल सीधा लेटकर पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें। अब हाथों को छाती के पास ले जाते हुए हथेलियों को नीचे टिका लें। गहरी सांस लेते हुए नाभि को ऊपर उठाएं और आसमान की तरफ देखें। उस मुद्रा में कुछ देर रहें। इस दौरान सामान्य सांस लेते रहें।

बालासन

बालासन का अभ्यास चिड़चिड़े मन को शांति देता है। यह आसन बच्चों के नर्वस सिस्टम को शांत करता है और भावनात्मक संतुलन लाता है। बालसन या बाल विश्राम मुद्रा योग का एक शानदार आसन है। इस आसन का नाम संस्कृत के शब्द बाला (बाल) से लिया गया है, जिसका अर्थ है बच्चे की आराम मुद्रा। दरअसल अगर आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि यह आसन भ्रूण की स्थिति जैसा दिखता है यानी कि एक शिशु जब मां के पेट में रहता है, तो वो इसी आसन में होता है।

ताड़ासन और वृक्षासन

ताड़ासन और वृक्षासन योगासन बच्चे को एकाग्रता और संतुलन सिखाते हैं। इन आसनों से शरीर स्थिर होता है और मन का भटकाव कम होता है। पढ़ाई में ध्यान बढ़ता है और बेचैनी घटती है। ताड़ासन से बच्चों की ब्रिदिंग कैपेसिटी बढ़ती है। ऊर्जा के स्तर को बढ़ाने में भी ताड़ासन योगाभ्यास मदद करता है। मूड अच्छा होता है और बच्चों की लंबाई भी बढ़ती है। परीक्षा के समय बच्चों को स्ट्रेस हो सकता है। वहीं पूरा पूरा दिन बैठकर पढ़ते रहने से उनके शरीर में दर्द भी होने लगता है। ऐसे में मानसिक शांति यानी स्ट्रेस कम करने और शरीर दर्द से राहत दिलाने के लिए वृक्षासन योग का अभ्यास लाभदायक हो सकता है। बच्चों को वृक्षासन योगाभ्यास सुबह करना चाहिए।

अनुलोम-विलोम

अनुलोम विलोम और भ्रामरी प्राणायाम गुस्से पर सीधा असर डालते हैं। सांस पर काम करने से बच्चों का मूड संतुलित होता है, नींद बेहतर आती है और चिल्लाने की आदत घटती है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम का एक हिस्सा है जिसे हम ब्रीदिंग एक्सरसाइज भी कहते हैं। इसे करते समय हम एक बार अपने नाक की दाहिनी तरफ से सांस लेते हैं और बाएं से छोड़ते हैं। इसके बाद इस प्रक्रिया को दोहराया जाता है। वैसे तो यह एक आसान प्रक्रिया है लेकिन इसके कई फायदे हो सकते हैं। अनुलोम विलोम ब्रेन और नर्वस के लिए मददगार साबित हो सकता है।

Related Articles

Back to top button