योगी के सबसे करीबी विधायक उमाशंकर पर इनकम टैक्स का छापा

  • बलिया स्थित आवास और कार्यालय में भी छापेमारी हुई
  • उमाशांकर ईडी छापा मामले में बीजेपी में बन रही है विद्रोह की स्थिति
  • राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह खुलकर आये समाने
  • लखनऊ में 3 गाडिय़ों से पहुंची आयकर टीम, 50 से ज्यादा अफसर खंगाल रहें हैं दस्तावेज
  • लखनऊ में उनके आवास और सोनभद्र के ठिकानों पर रेड मारी गई है

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। आखिर वही हुआ जिसका डर था। आज सुबह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के 50 से ज्यादा अधिकारियों ने सीएम योगी के सबसे करीबी विधायक उमाशंकर सिंह के आवास पर छापा मार दिया। इनकम टैक्स के इस छापे की कार्रवाई जंगल में आग की तरह फैल गयी और हर कोई छापे की कार्रवाई के टाइम को लेकर बड़े राजनीतिक एंगल को तलाशने में जुट गया। सीएम योगी इन दिनों अपनी तीन दिवसीय विदेश यात्रा के तहत जापान में हैं और उनके करीबी विधायक के घर पर छापा पड़ गया। उमाशंकर वैसे तो बसपा के टिकट पर इस बार का विधानसभा चुनाव जीते हैं और अधिकारिक तौर पर वह पूरे यूपी में बसपा के इकलौते विधायक है। उमाशंकर पर पड़े छापे को राजनीतिक विशलेषक दिल्ली वर्सेज यूपी की लड़ाई के तौर पर देख रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश की राजनीति की नींद उड़ा देने वाला इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की यह रेड नहीं बल्कि एक संदेश है और संदेश हमेशा शब्दों से नहीं टाइमिंग से पढ़ा जाता है। टाइमिंग यही इस कहानी का असली किरदार है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस वक्त जापान की धरती पर निवेश और विकास का सपना बेच रहे हैं और इधर उनके सबसे करीबी माने जाने वाले चेहरे के दरवाजे पर केंद्रीय एजेंसी की दस्तक हो जाती है। सवाल यह नहीं कि छापा क्यों पड़ा सवाल यह है कि छापा अभी क्यों पड़ा? क्या भ्रष्टाचार आज ही पैदा हुआ? क्या दस्तावेज आज ही अचानक धरती से निकले? या फिर यह सब पहले से फाइलों में कैद था बस सही वक्त का इंतजार हो रहा था?

हर कदम शतरंज की चाल

राजनीति में संयोग नाम की कोई चीज नहीं होती। यहां हर कदम शतरंज की चाल होता है। और यह चाल भी साधारण नहीं है। उमाशंकर सिंह कोई साधारण विधायक नहीं हैं। वह बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक भी हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या यह सिर्फ टैक्स चोरी की जांच है या फिर यह सत्ता के भीतर और सत्ता के ऊपर चल रही अदृश्य रस्साकशी का हिस्सा है? यह पहली बार नहीं है जब एजेंसियों की गाडिय़ां राजनीतिक घरों के बाहर रुकी हों। लेकिन हर बार सरकारें यही कहती हैं कि कानून अपना काम कर रहा है। और जनता हर बार यही पूछती है कि कानून को काम करने की याद सिर्फ कुछ खास मौकों पर ही क्यों आती है? क्या कानून की घड़ी भी राजनीतिक कैलेंडर देखकर चलती है? क्या जांच एजेंसियों की दिशा कम्पास से नहीं बल्कि सत्ता के इशारों से तय होती है?

राजनीतिक संकेत बन चुके हैं छापे

सच यह है कि इस देश में छापे अब सिर्फ जांच नहीं रहे वह राजनीतिक संकेत बन चुके हैं। वह बताते हैं कि कौन लाइन में है और कौन लाइन से बाहर जाने की हिम्मत कर रहा है। वह डर पैदा करते हैं संदेश देते हैं और कभी कभी सीमाएं भी तय कर देते हैं। लेकिन असली सवाल अभी भी हवा में तैर रहा है कि छापे में क्या मिला और उससे बड़ा सवाल यह है कि इस छापे से किसे क्या संदेश मिला। क्योंकि भारत की राजनीति में छापे सिर्फ अलमारी नहीं खोलते। वह इरादे खोलते हैं, रिश्ते खोलते हैं, और कभी-कभी सत्ता की असली कहानी भी खोल देते हैं।

जीरो से हीरो अरबों/करोड़ों का अंबार

विधायक उमाशांकर सिंह का जीरो से शुरू हुआ सफर आज करोड़ों अरबो की उंचाईयों पर है। कहते हैं कि राजनीति सिर्फ कुर्सी का खेल नहीं होती यह किस्मत साहस अवसर और सिस्टम को पढ़ लेने की कला का नाम है। और अगर इस कला का कोई जीवंत उदाहरण ढूंढना हो तो नाम आता है उमाशंकर सिंह। एक ऐसा नाम जो कभी भीड़ का हिस्सा था लेकिन आज भीड़ उसके दरवाजे के बाहर खड़ी दिखाई देती है। यह कहानी किसी रजवाड़े में पैदा हुए वारिस की नहीं है। यह कहानी उस शख्स की है जिसने जमीन से शुरुआत की धूल फांकी सिस्टम को करीब से देखा और फिर उसी सिस्टम के भीतर अपनी जगह बना ली। बलिया की गलियों से निकलकर सत्ता के गलियारों तक पहुंचने का सफर उमाशंकर ने बहुत ही करीने से पूरा किया। कंपनियां बनाई व्यापार किया और सत्ता की ताकत के बल पर अकूत दौलत को इक्टठा किया।

सुबह-सुबह टीम ने दी दबिश

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की टीमें सुबह करीब सात बजे विधायक के आवास पर पहुंची। अधिकारियों ने पहुंचते ही परिसर को घेर लिया और अंदर-बाहर की आवाजाही सीमित कर दी। बताया जा रहा है कि टीम में लगभग 30 से अधिक अधिकारी शामिल हैं जिनके साथ स्थानीय पुलिस फोर्स भी तैनात है। सूत्रों के मुताबिक आयकर विभाग कुछ वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है। हालांकि विभाग की ओर से आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने घर के भीतर मौजूद फाइलें, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड खंगालना शुरू कर दिया। कार्रवाई कई घंटों तक चलने की संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा के लिहाज से घर के बाहर पुलिस बल तैनात है और मीडिया को भी दूर रखा गया है।

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