शंकराचार्य यौन शोषण मामले में नया मोड़ | Swami Avimukteshwaranand पहुंचे हाईकोर्ट 

शंकराचार्य को कथित रूप से फंसाने की साजिश के आरोपों के बीच अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाईकोर्ट का रुख किया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः देश की राजनीति में इस वक्त शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का नाम सुर्खियों में है.. एक तरफ वे BJP सरकार पर लगातार तीखे हमले कर रहे हैं.. तो दूसरी तरफ उनके खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर सियासी घमासान मचा हुआ है.. हाल ही में सामने आए यौन उत्पीड़न के मामले ने विवाद को और गहरा कर दिया है.. जिसको लेकर समर्थकों का दावा है कि उन्हें राजनीतिक रूप से फंसाने की साजिश रची जा रही है.. जबकि विरोधी पक्ष इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है.. वहीं मामला अब अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है.. और इसे लेकर विपक्ष खुलकर सरकार पर सवाल उठा रहा है.. धार्मिक, कानूनी और राजनीतिक आयामों से घिरे इस विवाद ने माहौल को बेहद संवेदनशील बना दिया है.. आरोप-प्रत्यारोप के बीच सच्चाई क्या है.. यह जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही साफ होगा.. लेकिन फिलहाल यह मुद्दा देश की सियासत के केंद्र में आ गया है..

आपको बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है.. इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई है.. बता दें कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मंगलवार को हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की है.. यह याचिका उनके वकीलों राजर्षि गुप्ता, सुधांशु कुमार.. और श्रीप्रकाश के जरिए दाखिल की गई.. कोर्ट में इस पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है.. वहीं इस मामले ने न सिर्फ धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है.. बल्कि राजनीतिक रंग भी ले लिया है.. कई लोग इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ स्वामी के बयानों से जोड़कर देख रहे हैं.. विपक्षी पार्टियां स्वामी के समर्थन में उतर आई हैं.. जबकि सनातन धर्म के समर्थक इसे हिंदुत्व के लिए खतरा बता रहे हैं..

आपको बता दें कि यह मामला प्रयागराज के झूंसी थाने में दर्ज हुआ है.. यहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ दो व्यक्तियों.. जिनमें एक नाबालिग बच्चा शामिल है.. उनपर यौन शोषण के आरोप लगाए गए हैं.. एफआईआर में प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेज एक्ट की धाराओं के अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) भी जोड़ी गई है.. आरोपों के मुताबिक ये कथित घटनाएं पिछले एक साल में हुईं.. लेकिन पुलिस को अब तक कोई ठोस सबूत नहीं मिला है.. और एफआईआर सिर्फ आरोपों के आधार पर दर्ज की गई है.. जानकारी के मुताबिक यह शिकायत तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने की थी.. उन्होंने जिला अदालत में अर्जी दाखिल की.. और POCSO स्पेशल कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया.. स्पेशल जज विनोद कुमार चौरसिया ने पिछले हफ्ते इस पर फैसला सुनाया था.. जिसमें उन्होंने पीड़ितों के बयान और सबूतों की जांच के बाद पुलिस को जांच करने का निर्देश दिया..

वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया है.. उन्होंने इसे साजिश बताते हुए कहा कि उनके समर्थक.. और वकील खुद आगे आए और कानूनी मदद की पेशकश की.. जिसे उन्होंने स्वीकार किया.. स्वामी ने कहा कि अगर पुलिस हमें गिरफ्तार करने की कार्रवाई भी करती है.. तो हम उनका विरोध नहीं करेंगे.. हम सहयोग करेंगे.. जनता सब कुछ देख रही है.. झूठ का पर्दाफाश आखिरकार हो ही जाता है.. कहानी झूठी साबित होगी.. अगर आज नहीं तो कल, अगर कल नहीं तो परसों.. और उन्होंने प्रयागराज में लगे सीसीटीवी कैमरों का हवाला दिया.. और कहा कि सब कुछ रिकॉर्ड है..

स्वामी ने दावा किया कि आरोपी लड़के कभी उनके गुरुकुल में नहीं आए.. कभी पढ़ाई नहीं की.. और उनका उनसे कोई लेना-देना नहीं है.. वे हरदोई के एक स्कूल के छात्र हैं.. जैसा कि मुकदमे में जमा मार्कशीट से साबित होता है.. और उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सीडी है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा.. स्वामी ने कहा कि ये सारे सवाल आने वाले दिनों में पूछे जाएंगे.. और आरोप लगाने वालों को जवाब देना होगा.. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग सनातन धर्म को नष्ट करने के लिए हिंदू वस्त्र धारण करके आए हैं.. और वे हिंदुओं के खिलाफ काम कर रहे हैं..

आपको बता दें कि इस मामले में एक नया मोड़ आया जब पत्रकार रमाकांत दीक्षित का वीडियो बयान सामने आया.. मंगलवार को जारी इस वीडियो में दीक्षित ने कहा कि 18 फरवरी को तीन लोग उनके घर आए.. और उन्हें आशुतोष ब्रह्मचारी से फोन पर बात करवाई.. उन लोगों ने कहा कि स्वामीजी को थोड़ा सबक सिखाना पड़ेगा.. और शंकराचार्य पर आरोप लगवाने की बात की.. दीक्षित ने इनकार किया और कहा कि वे शंकराचार्य से मिल चुके हैं.. और उनके खिलाफ कोई शिकायत नहीं की.. आशुतोष ने उन्हें धमकी दी कि अगर साथ नहीं दोगे तो हमारे पास तमाम रास्ते हैं.. दीक्षित ने यह सारी बात स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सादे कागज पर लिखकर हस्ताक्षर करके दी.. यह बयान स्वामी के दावे को मजबूत करता है कि यह एक साजिश है..

वहीं इस पूरे विवाद की जड़ें गहरी हैं.. और यह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच चल रहे तनाव से जुड़ी हुई हैं.. जनवरी 2026 में माघ मेले के दौरान विवाद शुरू हुआ.. जब माघ मेला प्रशासन ने स्वामी को मौनी अमावस्या पर पालकी में संगम स्नान करने से रोका.. स्वामी ने इसे अपना अपमान बताया और विरोध प्रदर्शन किया.. और उन्होंने कुंभ मेले में हुई मौतों और अव्यवस्था का मुद्दा लगातार उठाया.. योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बयान देते हुए कहा कि हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं कह सकता.. और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जा सकता.. उन्होंने शंकराचार्य पद की परंपरा का हवाला दिया.. जो आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार पीठों की है.. योगी ने भीड़ प्रबंधन और स्टांपेड जैसी स्थितियों से बचाव का मुद्दा उठाया..

वही विवाद और गहरा गया जब अयोध्या के एक अधिकारी ने स्वामी पर योगी का अपमान करने का आरोप लगाकर इस्तीफा दे दिया.. स्वामी ने योगी सरकार पर हमले तेज कर दिए.. जबकि योगी ने कानून की समानता और धार्मिक मर्यादा पर जोर दिया.. हालांकि, उस अधिकारी ने बाद में अपना इस्तीफा वापस ले लिया.. और वह खुद भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरा हुआ है.. कई लोग मानते हैं कि स्वामी के योगी विरोधी बयानों के बाद यह POCSO मामला दर्ज हुआ है.. इससे पहले सरकार ने उन्हें माघ मेले में स्नान से रोका था.. योगी ने विधानसभा में उनके खिलाफ बयान दिए थे..

जिसको लेकर विपक्षी पार्टियां इस मामले पर स्वामी के साथ खड़ी हैं.. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर पोस्ट करके कहा कि भाजपा हटाओ, सनातन बचाओ.. और उन्होंने स्वामी के समर्थन में आवाज उठाई.. सपा और कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल ने स्वामी से मुलाकात की और समर्थन जताया.. कांग्रेस ने कहा कि यह धार्मिक नेता का अपमान है.. सपा ने इसे राजनीतिक साजिश बताया.. सनातन धर्म समर्थक संगठन योगी और शंकराचार्य के विवाद को हिंदुत्व के लिए खतरा बता रहे हैं.. एक चर्चा यह भी है कि स्वामी को दिल्ली के दिग्गज शीर्ष नेताओं का समर्थन मिला हुआ है.. जो योगी के खिलाफ अभियान छेड़ने में मदद कर रहे हैं..

पुलिस की जांच अब तेज हो गई है.. एफआईआर दर्ज होने के बाद प्रयागराज पुलिस वाराणसी में स्वामी से पूछताछ कर सकती है.. अभी तक पुलिस ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.. लखनऊ में गतिविधियां तेज हैं.. स्वामी ने एक और बयान में कहा कि शाहजहांपुर के एक परिवार ने उनसे बात की.. और लालच व धमकी देकर उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं.. आपको बता दें कि यह मामला धार्मिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण है.. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य हैं.. जो हिंदू धर्म की एक प्रमुख संस्था है.. उनके खिलाफ ऐसे आरोप लगना पूरे धार्मिक समुदाय को प्रभावित कर रहा है.. कई संत और धार्मिक नेता उनके समर्थन में हैं.. जबकि कुछ इसे कानूनी प्रक्रिया बताते हैं.. हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई से तय होगा कि गिरफ्तारी होगी या नहीं..

 

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