सीरियल ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला, हाई कोर्ट ने कायम रखी सजा-ए-मौत

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस के दोषियों को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. उच्च न्यायालय ने लोअर कोर्ट के फैसले (मौत की सजा) को बरकरार रखा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस के दोषियों को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. उच्च न्यायालय ने लोअर कोर्ट के फैसले (मौत की सजा) को बरकरार रखा है.

अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट केस में गुजरात हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया. कोर्ट ने दोषियों को राहत न देते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा. मतलब मौत की सजा कायम रहेगी. साल 2022 में निचली अदालत ने 38 दोषियों को फांसी की सजा और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. दोषियों ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी.

वहीं, राज्य सरकार ने भी उच्च न्यायालय के समक्ष मौत की सजा के लिए याचिका दायर की थी. हाई कोर्ट में पिछले कई महीनों तक इस मामले में सुनवाई हुई. आरोपी पक्ष ने जांच की प्रक्रिया, सबूतों और कबूलनामे को लेकर कई सवाल उठाए. वहीं राज्य सरकार ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने की मांग की. आज हाई कोर्ट दोषियों को बड़ा झटका देते हुए लोअर कोर्ट के फैसले को कायम रखा.

धमाकों में गई थी 56 निर्दोषों की जान
26 जुलाई 2008 को हुए हुए इस ब्लास्ट में 56 निर्दोष लोगों की जान गई थी. 21 धमाकों से पूरा अहमदाबाद दहला गया था. 45 मिनट के अंतराल में एक के बाद एक 21 बम धमाके हुए थे. हमलावरों ने नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था. अस्पतालों, बसों, सार्वजनिक स्थानों और बाजारों में बम लगाए थे.

38 दोषियों को मिली थी फांस की सजा
इस घटना के 14 साल बाद 18 फरवरी 2022 को निचली अदालत ने 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. अदालत ने इस मामले को सबसे दुर्लभ बताया और कहा कि मौत की सजा देना उचित है. साथ ही मारे गए और घायल लोगों के परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया. इसके बाद सभी दोषियों ने कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील की.

हाई कोर्ट के फैसले पर पूरे देश की नजर
कानून के मुताबिक, मौत की सजा को लागू करने के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी जरूरी होती है, इसलिए राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट में याचिका दायर की. हाई कोर्ट की बेंच ने पिछले कई महीनों से दोनों पक्षों की विस्तार से दलीलें सुनीं. आरोपी पक्ष ने जांच, सबूत और कबूलनामे से जुड़े कई सवाल उठाए. राज्य सरकार ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखने की मांग की. अब आज हाई कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा. हाई कोर्ट के फैसले पर पूरी देश की नजरें टिकी हैं.

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