सूरत में 213 करोड़ का खेल? सूरत में कूड़े का पहाड़! BJP के भ्रष्टाचार की खुली पोल!

गुजरात के सूरत शहर में कूड़ा प्रबंधन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है... दावा किया जा रहा है कि करीब 213 करोड़...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः सूरत शहर को गुजरात का डायमंड सिटी.. और स्वच्छता का मॉडल बताया जाता है.. जो अब कूड़े के पहाड़ और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा हुआ है.. देश के टॉप स्वच्छ शहरों में शामिल.. सूरत में 213 करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद.. खजोद डंपिंग साइट पर कचरे का विशाल ढेर जस का तस खड़ा है.. जानकारी के मुताबिक 29 अक्टूबर 2022 को सूरत नगर निगम ने सीडी ट्रांसपोर्ट नामक कंपनी को.. तीन साल में 30 लाख टन कचरा हटाने-प्रोसेस करने का ठेका 790 रुपये प्रति टन की दर से दिया था.. अनुबंध की समय-सीमा अक्टूबर 2025 में पूरी हो चुकी है.. लेकिन काम अधूरा है.. भुगतान भी हो गया.. लेकिन कूड़ा नहीं हटा..

सूरत गुजरात का दूसरा सबसे बड़ा शहर है.. यहां की आबादी करीब 80 लाख से ज्यादा है.. स्वच्छ सर्वेक्षण में सूरत लगातार टॉप 10 शहरों में रहता है.. 2024-25 में भी यह देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिना जाता है.. SMC का दावा है कि यहां डोर-टू-डोर कचरा संग्रह, सेग्रिगेशन और प्रोसेसिंग बेहतरीन है.. शहर में हर दिन 3,500-4,000 टन कचरा निकलता है.. जिसे आधुनिक प्लांट्स में प्रोसेस किया जाता है.. लेकिन पुराना कचरा बड़ा सिरदर्द बना हुआ है.. खजोद डंपिंग साइट पर दशकों से कचरा जमा होता रहा है.. यह साइट शहर के बाहरी इलाके में है.. और यहां पहाड़ जैसा कचरे का ढेर है.. SMC ने इसे वैज्ञानिक तरीके से बंद करने की योजना बनाई.. लेकिन काम धीमा पड़ गया..

आपको बता दें कि खजोद साइट पर 2011 से पहले कचरा डंप होता था.. बाद में यहां सैनिटरी लैंडफिल बनाया गया.. लेकिन पुराना कचरा अभी भी लाखों टन में मौजूद है.. यह कचरा प्लास्टिक, गीला कचरा, निर्माण मलबा आदि का मिश्रण है.. जिससे बारिश में जहरीला पानी निकलता है.. आग लगती रहती है और धुआं पूरे इलाके को प्रभावित करता है.. फरवरी 2026 में भी साइट से धुआं उठता दिखा.. आग की वजह गर्मी और ऊपर से गुजर रहे हाई टेंशन वायर बताए गए.. लेकिन स्थानीय लोग और विपक्ष कहते हैं कि यह गड़बड़ी छिपाने के लिए लगाई गई आग हो सकती है.. NGT में भी सूरत के लैंडफिल पर कई केस चल चुके हैं.. 2014 में ही एक NGO ने खजोद साइट पर गलत प्रोसेसिंग का केस किया था..

29 अक्टूबर 2022 को SMC ने सीडी ट्रांसपोर्ट को बड़ा ठेका दिया.. कुल 30 लाख टन लेगेसी वेस्ट को हटाना-प्रोसेस करना था.. रेट था 790 रुपये प्रति टन था.. और तीन साल का अनुबंध था.. जिसकी कुल लागत करीब 237 करोड़ रुपये बनती थी.. लेकिन खबरों में 213 करोड़ रुपये के भुगतान की बात सामने आई.. कंपनी का काम कचरे को खोदना था.. सेग्रिगेट करने के बाद प्रोसेस करना और साइट को साफ करना था.. जिसको लेकर SMC का कहना था कि इससे खजोद साइट को वैज्ञानिक रूप से बंद किया जाएगा.. लेकिन तीन साल बाद भी साइट पर कचरे के बड़े-बड़े ढेर मौजूद हैं.. वहीं जब मीडिया की टीम फरवरी 2026 में साइट पर पहुंची.. तो स्टाफ ने अंदर जाने से रोका.. अंदर धुआं उठ रहा था.. कचरे के पहाड़ साफ दिखाई दे रहे थे..

वहीं अब सवाल यह है कि जब काम पूरा नहीं हुआ.. तो 213 करोड़ रुपये कैसे चुकाए गए.. जिसको लेकर SMC के डिप्टी कमिश्नर दिनेश कुमार गुरव ने कहा कि.. कुल 213 करोड़ में से सिर्फ 107 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है.. लेकिन विपक्ष का कहना है कि पूरा भुगतान हो चुका है.. और अब ठेके को रिन्यू करने की तैयारी है.. कांग्रेस के पूर्व पार्षद विजय पानसेरिया ने आरोप लगाया कि नियमों का पालन नहीं हुआ.. 213 करोड़ रुपये दे दिए गए.. ठेका खत्म होने के बाद भी नवीनीकरण की तैयारी है.. ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर एफआईआर दर्ज होनी चाहिए.. और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए..

कंपनी पर वजन घटाने और कचरा बाहर बेचने के आरोप भी लगे.. एक अलग घोटाले में सीडी ट्रांसपोर्ट एजेंसी पर 2.5 करोड़ रुपये का फाइन लगाया गया.. जनवरी 2026 में पता चला कि कंपनी ने अनप्रोसेस्ड कचरा शहर से 70-80 किमी दूर काकरिया गांव के एक निजी प्लॉट पर डंप किया.. करीब 500 ट्रक कचरा वहां फेंका गया.. कुछ कचरा बेच भी दिया गया.. जिससे SMC को 90 लाख रुपये का नुकसान हुआ.. GPCB ने शिकायत के बाद छापा मारा.. SMC ने एजेंसी पर 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया..

जानकारी के अनुसार इस घोटाले में SMC के कई अधिकारी भी फंसे.. एनवायरनमेंट इंजीनियर शरद काकलोतार.. और एक्जीक्यूटिव इंजीनियर राकेश मोदी को शो-कॉज नोटिस दिया गया.. असिस्टेंट इंजीनियर मोहसिन पठान, सैनिटरी इंस्पेक्टर अब्बास पठान.. और सब-इंस्पेक्टर दीपक पटेल पर भी लापरवाही के आरोप लगे.. 16 अधिकारियों और कर्मचारियों को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट विभाग से ट्रांसफर कर दिया गया.. पांच सदस्यीय कमिटी बनाई गई.. जिसमें एक IAS अधिकारी भी शामिल हैं.. कमेटी फाइनेंशियल एंगल और रैकेट की जांच करेगी.. लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह सिर्फ दिखावा है और असली दोषी बच गए हैं..

आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने इसे गुजरात की BJP सरकार की लॉबी का घोटाला बताया.. AAP कार्यकर्ताओं ने मेयर का घेराव किया.. और उन्होंने कहा कि स्वच्छता का ढोंग है.. 213 करोड़ रुपये पानी में गए.. जनता के पैसे से ठेकेदार और अधिकारी मोटे हो रहे हैं.. कांग्रेस ने पूरे मामले की CBI जांच की मांग की.. जिसको लेकर लोग कह रहे हैं कि गुजरात मॉडल की असलियत सामने आ गई है.. एक तरफ पीएम मोदी स्वच्छ भारत का प्रचार करते हैं.. दूसरी तरफ उनके गृह राज्य में ऐसा घोटाला सामने आ रहा है..

SMC का कहना है कि जांच चल रही है.. नया टेंडर जल्द जारी होगा.. इसमें डिजिटल मॉनिटरिंग, सख्त नियम.. और वेट ब्रिज अनिवार्य होंगे.. डिप्टी कमिश्नर गुरव ने आग को प्राकृतिक बताया.. और उन्होंने कहा कि नई वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट बामरोली में बन रही है.. खजोद साइट को वैज्ञानिक तरीके से बंद किया जाएगा.. BJP नेताओं का कहना है कि विपक्ष राजनीति कर रहा है.. सूरत अभी भी स्वच्छ है.. डोर-टू-डोर कलेक्शन 100% है.. लेकिन पुराना कचरा एक बड़ी चुनौती है.. जो पूरे देश में है..

वहीं यह घोटाला सिर्फ पैसों का नहीं, पर्यावरण का भी है.. खजोद साइट से मीथेन गैस निकलती है.. आग से उठने वाला धुआं दक्षिण सूरत को प्रभावित करता है.. लीचेट नदियों में जाता है.. बायोमेडिकल वेस्ट मिलने के आरोप हैं.. जो खतरनाक है.. स्थानीय लोगों को सांस की बीमारियां और त्वचा रोग हो रहे हैं.. NGT ने कई बार SMC को फटकार लगाई है.. 2016 के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का उल्लंघन स्पष्ट है.. अनप्रोसेस्ड कचरा निजी जमीन पर डंप करना गैरकानूनी है..

 

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