शंकराचार्य केस में बड़ा मोड़! हाईकोर्ट की रोक, नार्को टेस्ट के लिए अविमुक्तेश्वरानंद तैयार
शंकराचार्य से जुड़े मामले में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है... हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए मामले की पूरी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए.. शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है.. कोर्ट ने उनके खिलाफ तत्काल कोई कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है.. वहीं इस फैसले से वाराणसी के श्री विद्या मठ में जश्न का माहौल बन गया.. भक्तों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाई.. हर-हर महादेव के नारे लगाए.. और रंगभरी एकादशी मनाई.. शंकराचार्य ने खुद कहा कि सच्चाई की जीत होगी.. वहीं शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रम्हचारी ने भरोसा जताया कि धर्म की विजय होगी.. और पीड़ितों को न्याय मिलेगा.. जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला काफी संवेदनशील है.. क्योंकि इसमें नाबालिग बच्चों से जुड़े आरोप हैं..
आपको बता दें कि शिकायतकर्ता का पूरा नाम आशुतोष पांडेय है.. जिन्हें आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज कहा जाता है.. उन्होंने 2022 में जगद्गुरु रामभद्राचार्य से संन्यास दीक्षा ली.. वे सहारनपुर के शाकुंभरी देवी मंदिर के पंडा हैं.. वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले में मुकदमेबाज हैं.. और श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के चेयरमैन भी हैं.. आशुतोष ब्रम्हचारी पश्चिम उत्तर प्रदेश के शामली जिले के रहने वाले हैं.. पुलिस के अनुसार उनके खिलाफ शामली के कंधला थाने में गुंडा एक्ट समेत कई आपराधिक मामले दर्ज थे.. लेकिन वे कहते हैं कि ये सभी मामले झूठे थे.. और अखिलेश यादव सरकार के समय उनके सनातन धर्म रक्षा आंदोलन को दबाने के लिए लगाए गए थे.. और उन्होंने दावा किया है कि सभी मामलों से वे बरी हो चुके हैं..
बता दें कि यह पूरा मामला प्रयागराज के माघ मेले से जुड़ा है.. जहां 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य.. और प्रशासन के बीच स्नान को लेकर विवाद हुआ.. शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उन्हें स्नान नहीं करने दिया गया.. इसके छह दिन बाद 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को शिकायत दी.. शिकायत में कहा गया कि माघ मेला 2025-26.. और महाकुंभ 2025 के दौरान शंकराचार्य के कैंप और गुरुकुल में नाबालिग बटुकों का यौन शोषण हुआ.. आरोप था कि बच्चों को धार्मिक सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों.. और पालकी उठाने के नाम पर रखा जाता था.. आशुतोष महाराज ने दावा किया कि उनके पास सबूत हैं.. जब पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो 8 फरवरी 2026 को उन्होंने प्रयागराज की स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की.. यह याचिका दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(4) के तहत थी..
13 फरवरी को कोर्ट में दो बच्चों को पेश किया गया.. 21 फरवरी को बच्चों के बयान दर्ज किए गए.. कैमरे की निगरानी में इन-कैमरा बयान हुए.. पुलिस कमिश्नर की जांच रिपोर्ट भी आई.. जिसमें स्वतंत्र गवाहों और बच्चों के बयान शामिल थे.. बच्चों ने आरोप लगाया कि जनवरी 2025 से फरवरी 2026 तक.. 18 जनवरी को मेले के दौरान.. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद.. और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी ने उनके साथ बार-बार यौन शोषण किया.. वहीं रिपोर्ट में मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स भी शामिल थीं.. जज चौरसिया ने 21 फरवरी को आदेश दिया कि झूंसी थाने की पुलिस एफआईआर दर्ज करे.. एफआईआर उसी दिन रात में दर्ज हो गई.. इसमें भारतीय न्याय संहिता की 351(3), 69, 74, 75, 76, 79, 109.. और पॉक्सो एक्ट की 3, 4(2), 5(1), 6, 16, 17 धाराएं लगाई गईं.. ये धाराएं बच्चों से बलात्कार, गंभीर यौन हमला.. और बच्चों की पहचान उजागर न करने से जुड़ी हैं..
जानकारी के अनुसार 26 फरवरी को बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट आई.. पुलिस सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में शोषण की पुष्टि हुई.. स्वामी जी ने इसे लेकर सवाल उठाया कि इतने दिन बाद रिपोर्ट का क्या मतलब है.. उन्होंने कहा कि अगर कोई गलत काम हुआ भी हो तो उससे सीधे उनका नाम नहीं जुड़ता.. 24 फरवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की.. याचिका में कहा गया कि उन्हें गिरफ्तारी का डर है.. इसलिए पहले से सुरक्षा दी जाए.. 27 फरवरी को सुनवाई हुई.. कोर्ट रूम में भीड़ अधिक थी.. इसलिए जस्टिस सिन्हा ने चैंबर में सुनवाई की.. करीब एक घंटे तक बहस चली..
शंकराचार्य की ओर से वरिष्ठ वकील पी.एन. मिश्रा ने दलीलें दीं.. और उन्होंने कहा कि पूरा मामला माघ मेले के विवाद से उपजा है.. बच्चे कभी आश्रम या गुरुकुल में नहीं रहे.. एक बच्चे की मार्कशीट पेश की गई.. जिसमें उसे वयस्क बताया गया.. उम्र की जांच और जुवेनाइल बोर्ड की बात उठाई गई.. पूछा गया कि दूसरा बच्चा कहां है.. और उसे क्यों नहीं पेश किया गया.. और कहा गया कि यह साजिश है.. और शंकराचार्य जैसी संस्था को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है.. नार्को टेस्ट की मांग भी की गई.. यदि फैसला प्रतिकूल हुआ तो सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही गई..
वहीं राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने जमानत का विरोध किया.. और उन्होंने कहा कि शंकराचार्य प्रभावशाली व्यक्ति हैं.. यदि जमानत मिल गई तो केस प्रभावित हो सकता है.. पॉक्सो जैसे गंभीर मामले में पहले निचली अदालत से जमानत मांगनी चाहिए थी.. शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की ओर से वकील रीना सिंह ने दलीलें रखीं.. उन्होंने कहा कि बच्चे पीड़ित हैं.. मेडिकल रिपोर्ट शोषण की पुष्टि करती है.. उम्र से संबंधित दस्तावेज प्रक्रिया में हैं..
जस्टिस सिन्हा ने दोनों पक्षों को सुना.. उन्होंने पूछा कि सीधे हाईकोर्ट क्यों आए.. निचली अदालत क्यों नहीं गए.. बच्चों के ठिकाने की जानकारी मांगी.. एफआईआर और सबूत देखे.. जिसके बाद फैसला सुनाने से पहले अंतरिम राहत दी.. और आदेश में कहा गया कि याचिका के अंतिम निर्णय तक आरोपी गिरफ्तार नहीं होंगे.. उन्हें जांच में सहयोग करना होगा.. जांच जारी रहेगी.. दोनों पक्ष 12 मार्च तक लिखित दलीलें और केस लॉ दाखिल करें.. अंतिम फैसला मार्च के तीसरे हफ्ते में आएगा..
वहीं फैसले के बाद शंकराचार्य ने मीडिया से बात की.. और उन्होंने कहा कि यह मुकदमा झूठा बनाया गया है.. मुझे न्याय की उम्मीद हमेशा रही है.. बटुक कभी आश्रम में रहे ही नहीं.. शंकराचार्य नाम की संस्था को बदनाम करने की साजिश रची गई.. झूठ ज्यादा वक्त तक नहीं टिकता.. जिन्होंने झूठी कहानी गढ़ी है.. वे बेनकाब हो रहे हैं.. यदि नार्को टेस्ट से सच्चाई सामने आ सकती है तो यह अवश्य किया जाना चाहिए.. सच उजागर करने के लिए जो भी तरीके उपलब्ध हैं.. उन्हें अपनाया जाना चाहिए.. उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठाया.. और कहा कि बच्चे आशुतोष महाराज के साथ रह रहे थे.. उन्हें किशोर गृह क्यों नहीं भेजा गया.. कहा कि बच्चों को हरदोई के होटल में रखा गया.. और पत्रकारों से मिलने नहीं दिया गया..



