तेजी से फैलता दायरा, कच्चे तेल की कीमतों में आग

  • खामनेई की मौत के बाद ईरानी तेवर उग्र विध्वंसक कार्रवाई जारी
  • भारत ने अभी तक नहीं की खामनेई की हत्या की निंदा
  • खामोशी का बारूद तेल की आग में झुलसने को तैयार भारत!

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। तेहरान पर अटैक के बाद उठी जंग की चिंगारी अब पूरी दुनिया को अपने घेरे में लेने लगी है। और इस जंग की सबसे खतरनाक सच्चाई यह है कि जंग की आग सीमाओं में नहीं रुकेगी। ईरान इजरायल और अमेरिका के बीच जो टकराव वर्षों से छाया युद्ध के रूप में उबाल मार रहा था अब खुली आग में बदलता दिख रहा है। हर विस्फोट के साथ एक नया सवाल उठ रहा है के क्या यह सिर्फ बदले की कार्रवाई है या किसी बड़े भू-राजनीतिक पुनर्गठन की शुरुआत?

टूट चुका है शक्ति का संतुलन

यह जंग सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रही। रूस चीन और पश्चिमी शक्तियां अपने अपने रणनीतिक हितों के अनुसार प्रतिक्रिया दे रही हैं। यह संघर्ष आने वाले वर्षों में वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकता है।

खून से बनती नई सीमाएं

तेहरान की रात उस दिन सामान्य नहीं थी। आसमान में गूंजती आवाजें बादलों की नहीं थीं वह इतिहास के टूटने की थीं। एक ऐसी परछाई जो दशकों से मध्य-पूर्व की राजनीति की धुरी थी अचानक सन्नाटे में बदल गई। दुनिया भर के खुफिया गलियारों में फुसफुसाहट थी क्या यह सिर्फ हमला था या सत्ता के दिल पर सीधा प्रहार? और इसी सन्नाटे में मिसाइलों की लकीरें खिंचती चली गईं जैसे किसी ने नक्शे पर खून से नई सीमाएं बना दी हों।

अयातुल्लाह अली खामनेई को लेकर उठती खबरें

इस पूरे संकट में सबसे रहस्यमयी और विस्फोटक पहलू है कि अयातुल्लाह अली खामनेई को लेकर उठती खबरें जिनकी आधिकारिक पुष्टि या खंडन के बीच पूरी दुनिया सांस रोके बैठी है। यदि यह सच साबित होता है तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं होगी यह एक विचारधारा एक प्रतिरोध और एक भू राजनीतिक धुरी पर हमला माना जाएगा। मध्य पूर्व की इस आग में सिर्फ मिसाइलें नहीं जल रहीं यहां भरोसा संतुलन और वैश्विक स्थिरता सब राख हो रहे हैं। और इस राख की गर्मी अब दुनिया के हर कोने तक पहुंचने लगी है।

पाकिस्तान में तनावपूर्ण स्थिति

पाकिस्तान में भी हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। नूरखान एयरबेस पर ड्रोन हमले की खबरें सामने आई हैं। इस्लामाबाद और रावलपिंडी में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। यह संकेत है कि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में ले सकता है।

तेल बाजार में विस्फोट 10 फीसदी तक का उछाल भारत पर सीधा असर

संघर्ष के तेज होते ही वैश्विक तेल बाजार में विस्फोट जैसी स्थिति बन गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक ही झटके में 10 फीसदी तक की उछाल दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड तेजी से ऊपर चढ़कर उस स्तर के करीब पहुंच गया है जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरनाक संकेत माना जाता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का साफ कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला और ईरान या उसके सहयोगी देशों ने तेल आपूर्ति मार्गों खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित किया तो कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी ऊपर जा सकती हैं।भारत के लिए यह स्थिति किसी आर्थिक भूकंप से कम नहीं है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है और उसमें भी एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है। ऐसे में तेल की कीमतों में यह उछाल सीधे पेट्रोल डीजल की कीमतों महंगाई दर और आम लोगों की जेब पर असर डालेगा। परिवहन लागत बढ़ेगी खाद्य पदार्थ महंगे होंगे और उद्योगों का उत्पादन खर्च भी तेजी से बढ़ेगा। इसका सबसे बड़ा असर आम नागरिक पर पड़ेगा, जो पहले ही महंगाई की मार झेल रहा है। अगर कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है, तो भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है। इसके साथ ही सरकार पर सब्सिडी और वित्तीय संतुलन बनाए रखने का दबाव भी बढ़ेगा।

भारत के लिए खतरे की घंटी तेल की आग में जलती अर्थव्यवस्था

इस जंग की सबसे खतरनाक गूंज हजारों किलोमीटर दूर भारत में भी सुनाई दे रही है। क्योंकि मिसाइलों की हर आवाज के साथ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है और हर उछाल भारत के करोड़ों लोगों की जेब पर सीधा हमला होता है। भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा तेल है। क्रूड आयल पहले ही तेजी से ऊपर जा चुका है। हर दिन हो रही 10 डॉलर प्रति बैलर की वैश्विक बढ़ोत्तरी भारत के आयात बिल में अरबों डॉलर जोड़ देती है। इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा। महंगाई बढ़ेगी परिवहन महंगा होगा और आम आदमी की जिंदगी सीधे प्रभावित होगी। भारत की खामोशी भी सवालों के घेरे में है। कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना आसान नहीं लेकिन इस जंग में तटस्थ रहना भी जोखिम भरा है। भारत जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का 80 फीसदी से ज्यादा तेल आयात करता है इस युद्ध का प्रत्यक्ष पक्ष नहीं है। लेकिन इसका सबसे बड़ा आर्थिक शिकार बन सकता है। तेल बाजारों में घबराहट फैल चुकी है। और संकेत साफ हैं के यह जंग सिर्फ सीमाओं को नहीं बल्कि अर्थव्यवस्थाओं को भी तोडऩे वाली है।

कांग्रेस का हमला भारत की खामोशी पर सवाल?

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस पूरे घटनाक्रम पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में अयातुल्लाह खामनेई की हत्या हुई है तो यह सिर्फ एक देश के नेता की मौत नहीं बल्कि वैश्विक नैतिक व्यवस्था पर हमला है। खेड़ा ने पूछा है कि भारत जिसने हमेशा शांति और नैतिक नेतृत्व की बात की आज खामोश क्यों है? उन्होंने कहा कि यह वही भारत है जिसने दुनिया को अहिंसा का संदेश दिया लेकिन आज जब मध्य पूर्व जल रहा है तब उसकी आवाज़ कहीं सुनाई नहीं दे रही। उन्होंने चेतावनी दी कि यह खामोशी भविष्य में भारत की वैश्विक साख को नुकसान पहुंचा सकती है।

जंग में अमेरिका इजरायल को भारी सैन्य नुकसान

जिम्मेदार मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक हालिया हमलों में अमेरिका और इजरायल को गंभीर सैन्य नुकसान हुआ है। रिपोर्टस का दावा है कि दोनों मुल्कों के अबतक 173 से ज्यादा सैनिक मारे जा चुके हैं।

  • बहरीन में 32 से ज्यादा अमेरिकन/इजरायली सैनिकों की मौत
  •  कतर में 41 से ज्यादा अमेरिकन/इजरायली सैनिकों की मौत
  •  यूएई में 63 से ज्यादा अमेरिकन/इजरायली सैनिकों की मौत
  •  इजरायल में 37 से ज्यादा अमेरिकन/इजरायली सैनिकों की मौत की खबरें हैं।
सीमाओं से परे जाता संघर्ष

ईरान के भीतर गुस्सा सिर्फ सैन्य प्रतिक्रिया नहीं बल्कि अस्तित्व की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है। सड़कों पर गूंजते नारे, सैन्य ठिकानों पर बढ़ती गतिविधियां, और धार्मिक प्रतिष्ठानों से उठती चेतावनियां। यह सब संकेत दे रहे हैं कि यह संघर्ष अब सीमाओं से परे जा चुका है। ईरान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इस हमले को सिर्फ सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय अस्तित्व पर हमला मानता है। जंग की पूरी कमान अब रेवोशूनली गार्ड के पास है। गतिविधियां तेज हो चुकी हैं।

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