प्रियंका चतुर्वेदी को राज्यसभा से दूर क्यों रखा गया? संजय राउत ने किया खुलासा
संजय राउत ने कहा कि शरद पवार की उम्मीदवारी और पर्याप्त संख्या बल न होने के कारण पार्टी ने यह फैसला लिया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राज्यसभा चुनाव में शिवसेना (UBT) ने प्रियंका चतुर्वेदी को उम्मीदवार न बनाने का कारण साफ किया है.
संजय राउत ने कहा कि शरद पवार की उम्मीदवारी और पर्याप्त संख्या बल न होने के कारण पार्टी ने यह फैसला लिया. महाविकास आघाड़ी शरद पवार का समर्थन कर रही है.
राज्यसभा चुनाव को लेकर शिवसेना (UBT) ने बड़ा दावा किया है. पार्टी नेता संजय राउत ने कहा कि सियासी समीकरणों और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) मुखिया शरद पवार की उम्मीदवारी कुछ अहम कारण हैं, जिनकी वजह से हमारी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में प्रियंका चतुर्वेदी को फिर से उम्मीदवार नहीं बनाया है. उन्होंने कहा कि पार्टी चाहती थी कि प्रियंका राज्यसभा के लिए फिर से चुनी जाएं. मगर, पार्टी के पास पर्याप्त संख्या नहीं है, जिससे पवार जैसे वरिष्ठ नेता के मैदान में उतरने से इस सीट पर चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया.
संजय राउत ने कहा, अगर सियासी समीकरण हमारे पक्ष में होते और शरद पवार चुनाव नहीं लड़ते तो शिवसेना (UBT) इस सीट पर चुनाव लड़ती. साथ ही प्रियंका चतुर्वेदी को एक और मौका देती. बता दें कि महाराष्ट्र से राज्यसभा की 7 सीट अगले महीने खाली हो रही हैं. कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में महाराष्ट्र से महाविकास आघाडी उम्मीदवार के तौर पर शरद पवार के समर्थन का ऐलान किया है.
एक फैसला और अटलकों पर लग गया विराम
इस फैसले के साथ ही एमवीए उम्मीदवार को लेकर जारी अटकलों पर विराम लग गया. इससे पहले एमवीए में शामिल 3 दलों (कांग्रेस, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) और शिवसेना (UBT) ने इस सीट पर उम्मीदवारी के लिए अपना-अपना दावा पेश किया था. वहीं, बीजेपी ने महाराष्ट्र से राज्यसभा चुनाव के लिए बुधवार को 4 उम्मीदवारों का ऐलान किया था. इसमें केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और विनोद तावड़े शामिल हैं.
बीजेपी के उम्मीदवारों पर संजय राउत क्या बोले?
आठवले और तावड़े के अलावा बीजेपी ने नागपुर की पूर्व महापौर माया चिंतामन इवनाते और रामराव वाडकुटे को मैदान में उतारा है. वाडकुटे विधान परिषद के सदस्य रहे हैं. उधर, संजय राउत ने राज्य में राज्यसभा के 4 उम्मीदवारों की बीजेपी की लिस्ट पर भी टिप्पणी की है. उन्होंने कहा कि आठवले का फिर से नामांकन तय माना जा रहा था. जबकि तावड़े की उम्मीदवारी हैरान करने वाली है. तावड़े ने पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए काम किया. राज्यसभा के लिए उनका नामांकन उन कोशिशों के लिए पुरस्कार है.



