8 विपक्षी सांसदों से हटा निलंबन, थमेगा घमासान
संसद में प्रस्ताव लाकर सांसदों का निलंबन रद्द

संसद के बजट सत्र में पक्ष-विपक्ष का हंगामा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। संसद में निलंबित किए गए आठ सांसदों का निलंबन आज वापस ले लिया गया है। मंगलवार को संसद में प्रस्ताव लाकर इन सांसदों का निलंबन रद्द किया किया। साथ ही उन्हें चेतावनी भी दी गई कि आगे इस तरह का आचरण न अपनाए। सोमवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बनी थी।
वहीं बीजेपी ने दावा किया है कि पक्ष और विपक्ष के बीच दो समझौते हुए हैं, जिसके तहत अब विपक्ष फर्जी बयानबाजी नहीं करेगा। बीजेपी सांसद निशिकांत ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि आज सभी कांग्रेस पार्टी के सांसदों का निलंबन शायद वापस होगा। उन्होंने कहा, यह पहला समझौता हुआ कि विपक्ष के नेता अनर्गल, बेबुनियाद,तथ्यहीन,बकवास बातें सदन में नहीं करेंगे। उसके बदले मैं शांतिपूर्ण व्यवहार करूंगा।

मैं बहुत खुश हूं : प्रियंका गांधी
सभी 8 सांसदों का निलंबन रद्द होने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, मैं बहुत खुश हूं कि यह रद्द हो गया है।
वेल में सत्ता पक्ष की तरफ नहीं जाएंगे विपक्ष के सांसद : निशिकांत दुबे
निशिकांत दुबे ने आगे बताया कि, दूसरा समझौता हुआ है कि वेल में विपक्ष के सांसद सत्ता पक्ष की तरफ नहीं जाएंगे, कागज नहीं फेंकेंगे, लोकसभा के मेज पर चढक़र उत्पात नहीं मचाएंगे लोकसभा के अधिकारियों के साथ अभद्रता नहीं करेंगे।लोकतंत्र की मर्यादा बनी रहे,जनता ने हमें वाद विवाद के लिए संसद बनाया है ना कि उत्पात मचाने के लिए।
महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार बुलाए सर्वदलीय बैठक : खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, मैंने संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजीजू को एक चि_ी लिखकर मांग की है कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को सर्दलीय बैठक बुलाना चाहिए। विपक्षी दलों को अलग-अलग सलाह मशवरे के लिए बुलाना सही नहीं होगा, क्योंकि इसके जरिए राजनीतिक दलों को इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर डिवाइड करने की कोशिश हो सकती है। यह राष्ट्रीय हित से जुड़ा मामला है. इस पर सरकार को सभी राजनीतिक दलों में आम सहमति और उनकी राय लेकर ही आगे बढऩा चाहिए।
उन्नाव रिश्वत कांड में छोटी मछली पर कार्रवाई, बड़े अफसर पर उठते सवाल!
उन्नाव शिक्षा विभाग में 50 हजार की मांग का वीडियो वायरल बाबू सस्पेंड, बीएसए की भूमिका पर जांच को लेकर संशय
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
उन्नाव। उन्नाव के बेसिक शिक्षा विभाग में सामने आए एक रिश्वत कांड ने प्रदेश सरकार की जीरो टोलरेंस दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला बांगरमऊ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय तमोरिया बुजुर्ग से जुड़ा है जहां एक शिकायत के निस्तारण के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग का आरोप लगा है। इस पूरे प्रकरण में कार्रवाई तो हुई लेकिन केवल निचले स्तर के कर्मचारी तक सीमित रहने से अब जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के मुताबिक जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज एक शिकायत के आधार पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमरेश प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया गया था। यह नोटिस बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश पाण्डेय की ओर से भेजा गया था। विद्यालय प्रशासन ने समय रहते शिकायत का जवाब भी प्रस्तुत कर दिया लेकिन आरोप है कि इसके बाद फाइल को बंद कराने के लिए पैसे की मांग शुरू हो गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई करने से सिस्टम की जवाबदेही तय नहीं हो पाती। जरूरत इस बात की है कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और पारदर्शी जांच हो, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जिम्मेदारी किस स्तर तक जाती है। फिलहाल उन्नाव का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती सिर्फ दावों तक सीमित है या जमीनी स्तर पर भी उसकी असली परीक्षा होनी बाकी है।
बड़े बाबू का उच्चाधिकारियों के निर्देश पर खेल
बताया जा रहा है कि बीएसए कार्यालय में तैनात बड़े बाबू उदयवीर सिंह ने अधिकारी के नाम पर 50 हजार रुपये की डिमांड रखी। जब रकम देने में देरी हुई तो दोबारा नोटिस जारी कर कार्रवाई का दबाव बनाया गया। इस घटनाक्रम ने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया। इस बीच अध्यापक और बाबू के बीच हुई बातचीत का एक वीडियो सामने आया जो खुफिया कैमरे में रिकार्ड किया गया बताया जा रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में पैसे की मांग करते हुए आवाजें साफ सुनी जा सकती हैं। वीडियो के सार्वजनिक होने के बाद मामला तेजी से तूल पकडऩे लगा और शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे।
उदयवीर को किया गया निलंबित
विवाद बढऩे पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाबू उदयवीर सिंह को निलंबित कर दिया। वहीं बीएसए शैलेश पाण्डेय ने पूरे मामले की जांच के आदेश देने की बात कही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद भी कई सवाल अनुत्तरित हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि रिश्वत की मांग कथित तौर पर अधिकारी के नाम पर की गई तो क्या सिर्फ बाबू पर कार्रवाई कर मामले को खत्म करना पर्याप्त है? क्या जांच उसी तंत्र के भीतर रहकर निष्पक्ष हो पाएगी जिस पर आरोप लग रहे हैं?
बच्चे को गोद लेने वाली महिला को भी मैटरनिटी लीव का हक
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बच्चे को गोद लेने वाली महिला को को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि गोद लेने वाली महिलाओं को भी मातृत्व अवकाश देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
गोद लेने वाली महिलाओं को जन्म देने वाली माताओं के समान ही मातृत्व लाभ प्राप्त करने का अधिकार है। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि तीन महीने से अधिक उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को मातृत्व अवकाश देने से इनकार नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पितृत्व अवकाश नीति लाने पर विचार करने का आग्रह किया। सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि मातृत्व संरक्षण एक मूलभूत मानवाधिकार है। 3 महीने से बड़े बच्चे को गोद लेने वाली महिला को मैटरनिटी लीव देने से इनकार नहीं किया जा सकता। परिवार बनाने के गैर जैविक तरीके भी उतने ही कानूनी हैं। जैविक फैक्टर खुद से परिवार नहीं बनाते।गोद लिया हुआ बच्चा जैविक बच्चे से अलग नहीं होता। रिप्रोडक्टिव ऑटोनॉमी का अधिकार सिर्फ़ बायोलॉजिकल रिप्रोडक्शन तक सीमित नहीं है। हम गोद लेने वाली मां और जैविक मां के बीच अंतर मानते हैं, लेकिन हमें सवालों का जवाब देते समय इस एक्ट के मकसद को भी देखना चाहिए।
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60 (4) को स्ष्ट ने अनुच्छेद 14 यानी समानता और 21 यानी जीने के अधिकार का उल्लंघन मानते हुए असंवैधानिक ठहराया है।ये एक्ट दत्तक मां को 3 महीने से कम उम्र के बच्चों को गोद लेने पर ही मातृत्व लाभ की इजाजत देता था।
रास चुनाव में एनडीए को हुआ लाभ
135 से अधिक सीटें हो गई है, 37 में से 22 सीटों पर जीत दर्ज की
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राज्यसभा चुनाव में एनडीए 37 में से 22 सीटों पर जीत दर्ज करने में सफल रही है। विपक्ष को 15 सीटों पर जीत मिली है, अब राज्यसभा में एनडीए के पास बहुमतमाना जा रहा है कि केंद्र सरकार अब जल्द ही कुछ बिल पास करने की कोशिश में जुट सकती है। जिन ग्यारह सीटों के लिए कल वोट डाले गए उनमें एनडीए ने नौ सीटें जीत लीं।
पार्टी ने बिहार और ओडिशा में एक-एक अतिरिक्त सीट जीती जबकि हरियाणा में कांटे की टक्कर के बाद एक सीट उसके खाते में आई। 26 सीटों पर निर्विरोध चुनाव हुआ था जिनमें एनडीए ने 13 सीटें जीती थीं। इस तरह 37 में से एनडीए ने 22 सीटें जीत कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। विपक्ष के खाते में 15 सीटें आई हैं. कांग्रेस के लिए राहत की बात यह है कि उसकी राज्यसभा में विपक्ष के नेता की कुर्सी बची रहेगी। इसका सीधा असर राज्यसभा में देखने को मिलेगा। ऊपरी सदन में एनडीए अब स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुका है। बीजेपी 103 सीटों के साथ पहले ही सबसे बड़े दल के रूप में मजबूती से खुद को स्थापित कर चुकी थी। ताजा परिणामों के बाद पार्टी की स्थिति और अधिक मजबूत होगी. बीजेपी और उसके सहयोगियों की सीटें बढ़ कर 135 से भी अधिक हो गईं हैं जो महत्वपूर्ण बिलों को पारित कराने में बेहद मददगार साबित होने वाली हैं।
राज्यों में शानदार प्रदर्शन
एनडीए ने महाराष्ट्र की सात में से छह, बिहार की सभी पांच, असम की सभी तीन, ओडिशा की चार में से तीन, तमिलनाडु की पांच में से दो, पश्चिम बंगाल की पांच में से एक और हरियाणा और छत्तीसगढ़ की दो में से एक सीट जीती। मनोनीत सांसद रंजन गोगोई का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है जिनकी जगह जल्दी ही मनोनयन होगा और वह सीट भी एनडीए के खाते में ही गिनी जाएगी।
’एपस्टीन से जोडऩे वाली सोशल मीडिया सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटायें’
हरदीप पुरी की बेटी की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की बेटी को दोषी ठहराए गए अमेरिकी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से जोडऩे वाली सोशल मीडिया सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ना ने कई उपयोगकर्ताओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस तरह की सामग्री को किसी भी तरह से प्रकाशित करने, प्रसारित करने या फैलाने से भी रोक दिया। हिमायनी पुरी द्वारा दायर मुकदमे की सुनवाई कर रहे न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि यदि सोशल मीडिया उपयोगकर्ता पोस्ट नहीं हटाते हैं, तो प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री को हटा देंगे या उस तक पहुंच को अवरुद्ध कर देंगे। अदालत ने पाया कि हिमायनी पुरी के पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला बनता है और यदि अंतरिम राहत नहीं दी गई तो उन्हें अपूरणीय क्षति होगी।
इसलिए, अगली सुनवाई की तारीख तक, निम्नलिखित निर्देश जारी किए जाते हैं, अदालत ने कहा और मामले की अगली सुनवाई अगस्त में सूचीबद्ध की। एपस्टीन फाइलें हजारों पन्नों के दस्तावेज़ हैं जो एपस्टीन और उसकी साथी घिसलेन मैक्सवेल द्वारा यौन तस्करी की दो आपराधिक जांचों से संबंधित हैं, जिनमें यात्रा वृत्तांत, रिकॉर्डिंग और ईमेल शामिल हैं, जो 2019 में हिरासत में एपस्टीन की मृत्यु के बाद से चर्चा का विषय रहे हैं।
पश्चिम एशिया संघर्ष का 18वां दिन, जनजीवन बेहाल
सऊदी, यूएई से कतर और लेबनान तक चिंता और डर में जी रहे आम लोग
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
दुबई। पश्चिम एशिया में बीते 18 दिनों से बारूद की ढेर पर खड़ा है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और भयावह होता जा रहा है। अमेरिका और इस्राइल के भीषण हमलों से दहक रहे मोर्चे पर ईरान भी जोरदार पलटवार कर रहा है।
मिसाइलों और ड्रोन की गरज के बीच यह संघर्ष अब 18वें दिन में प्रवेश कर चुका है और अभी भी ईरान की तरफ से इस्राइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार बमबारी जारी है, जिसके चलते संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सऊदी अरब, कतर, ईरान और लेबनान अब सुरक्षा खतरों का सामना कर रहे हैं।
तेल और गैस के बड़े क्षेत्र पर हमलों के कारण आम लोगों में डर और चिंता बढ़ गई है। इसी घटना के बाद यूएई की सेना ने बड़ा कदम उठाते हुए अपनी वायुमार्ग (एयरस्पेस) कुछ समय के लिए बंद कर दी। उन्होंने कहा कि वे ईरान से मिसाइल और ड्रोन खतरों का जवाब दे रहे हैं। बाद में एयरस्पेस को फिर से खोल दिया गया।
यूएई में तेल टैंक फार्म में आग
तेज होते हमलों के बीच मंगलवार को यूएई के पूर्वी तट पर स्थित फुजैराह में एक तेल टैंक फार्म में आग लग गई। यह आग ड्रोन हमले के कारण लगी थी। अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कोई घायल नहीं हुआ। आग को जल्द से जल्द बुझाने के लिए दमकल और सुरक्षा बल काम कर रहे हैं।



