ईरान के आगे झुके ट्रंप, ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर रोक के बाद मिडिल ईस्ट में हलचल

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ पर रोक की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है... डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः दुनिया फिलहाल एक बड़े तनाव के दौर से गुजर रही है.. अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा युद्ध भले ही सीजफायर के कारण थम गया हो.. लेकिन असली शांति अभी भी दूर नजर आ रही है.. होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव चरम पर है.. जहां से दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है.. इसी बीच पाकिस्तान ने खुद को एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में आगे किया है.. पाकिस्तान का कहना है कि अगर अमेरिका एक खास शर्त मान ले.. तो दोनों देशों के बीच स्थायी शांति समझौता हो सकता है.. जानकारी के मुताबिक अमेरिका ने इस बात को मान भी लिया है..

आपको बता दें कि बीते कुछ महीने पहले अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर बड़े हमले किए.. जिसे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी नाम दिया गया.. इसके जवाब में ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया.. इस स्ट्रेट से दुनिया का 20-30 प्रतिशत तेल गुजरता है.. जब रास्ता बंद हुआ तो हजारों जहाज फंस गए.. हजारों नाविकों की जिंदगी खतरे में पड़ गई.. व्यापार प्रभावित हुआ.. और तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं.. वहीं अमेरिका ने इस समस्या को हल करने के लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू किया.. यह मिशन फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने.. और रास्ता खोलने का था.. जिसको लेकर अमेरिकी नौसेना के विध्वंसक जहाज, हवाई जहाज.. और अन्य साधन तैनात किए गए.. लेकिन यह मिशन ज्यादा दिन नहीं चला.. पाकिस्तान के अनुरोध पर अमेरिका ने इसे अस्थायी रूप से रोक दिया..

पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा कि अगर आप प्रोजेक्ट फ्रीडम रोक देते हैं.. तो हम ईरान के साथ बातचीत करा सकते हैं.. और शांति समझौते की राह आसान हो जाएगी.. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान.. और कुछ अन्य देशों के अनुरोध पर इसे स्वीकार कर लिया.. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करके बताया कि प्रोजेक्ट फ्रीडम को कुछ समय के लिए रोका जा रहा है.. ताकि डिप्लोमेसी काम कर सके.. हालांकि, होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी अभी भी जारी है..

वहीं पाकिस्तान कई महीनों से अमेरिका.. और ईरान के बीच पुल की भूमिका निभा रहा है.. इस्लामाबाद में लंबी बैठकें हुईं.. जानकारी के मुताबिक एक बैठक तो करीब 22 घंटे चली.. लेकिन नतीजा नहीं निकला.. फिर भी पाकिस्तान ने हार नहीं मानी.. पाकिस्तानी नेता अमेरिका के साथ सीधे संपर्क में रहे.. और उन्होंने बताया कि प्रोजेक्ट फ्रीडम जैसे सैन्य मिशन चलने से बातचीत मुश्किल हो जाती है..

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एनबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में साफ कहा कि पाकिस्तान ने अनुरोध किया था.. और उन्होंने बताया कि पाकिस्तानियों ने कहा कि अगर आप इस मिशन को रोक देते हैं.. तो शांति समझौते की संभावना बढ़ जाएगी.. राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीतिक समाधान चाहते हैं.. इसलिए हमने इसे रोकने का फैसला किया.. वहीं पाकिस्तान की यह कोशिश इसलिए भी महत्वपूर्ण है.. क्योंकि वह ईरान का पड़ोसी देश है.. और दोनों के बीच अच्छे संबंध रहे हैं.. साथ ही पाकिस्तान अमेरिका का भी पुराना सहयोगी रहा है.. इस मध्यस्थता से पाकिस्तान अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है..

आपको बता दें कि ट्रंप प्रशासन एक तरफ बातचीत पर जोर दे रहा है.. तो दूसरी तरफ मजबूत धमकियां भी जारी हैं.. ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है.. उन्हें बेहतर प्रस्ताव लाना होगा.. वरना और कड़े हमले हो सकते हैं.. ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम रोकने का कारण बताया.. और उन्होंने कहा कि ईरान के साथ हो रही प्रगति और पाकिस्तान का अनुरोध.. लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि नाकाबंदी जारी रहेगी.. अगर समझौता नहीं हुआ तो प्रोजेक्ट फ्रीडम जैसा बड़ा ऑपरेशन भी हो सकता है..

बता दें कि मार्को रूबियो ने कहा कि अमेरिका अभी भी कूटनीति को प्राथमिकता दे रहा है.. प्रयास जारी हैं.. लेकिन ईरान आंतरिक रूप से विभाजित है.. ईरान के अंदर अलग-अलग गुट हैं.. इसलिए जवाबी प्रस्ताव मिलना मुश्किल हो रहा है.. कोई निश्चित डेडलाइन नहीं है.. लेकिन अमेरिका समाधान चाहता है.. आपको बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है.. यह जगह संकरा है, करीब 21 मील चौड़ा.. यहां से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है.. चीन, भारत, जापान, यूरोप जैसे बड़े तेल आयातक देश इस रास्ते पर निर्भर हैं..

जब ईरान ने इसे बंद किया तो तेल की कीमतें आसमान छू गईं.. एक समय में कच्चे तेल की कीमत 112-114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं.. इससे पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा बढ़ गया.. भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल महंगे हो गए.. और आगे भी तेल के दाम बढ़ने की अशंका है.. ईरान की नौसेना यहां मजबूत है.. उसने कुछ जहाजों पर हमले भी किए.. अमेरिका ने जवाब में कुछ ईरानी नावों को नष्ट किया.. UAE पर भी हमले हुए.. इस वजह से क्षेत्रीय सुरक्षा और बिगड़ी.. और हालात तनाव पूर्ण हो गए..

आपको बता दें कि फरवरी 2026 में अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए.. जिसके बाद ईरान ने होर्मुज बंद किया और जहाजों पर हमले किए.. वहीं तनाव को बढ़ता देख सीजफायर हुआ लेकिन पूरी शांति नहीं आई.. पाकिस्तान के माध्यम से इस्लामाबाद में बातचीत हुई.. लेकिन बेनतीजा रही.. मई 2026 में अमेरिका ने प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू किया.. कुछ जहाज निकाले गए.. लेकिन ईरानी हमलों के कारण मिशन रोका गया.. जिसके बाद ट्रंप ने धमकियां दी.. और पाकिस्तान के कहने पर मिशन एक बार फिर से रोक दिया..

वहीं ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को आत्मसमर्पण जैसा बताकर खारिज किया.. अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव को पर्याप्त नहीं माना.. दोनों तरफ से बातचीत चल रही है.. लेकिन सहमति अभी दूर है.. बता दें कि तेल की कीमतें बढ़ने से पूरी दुनिया प्रभावित है.. सऊदी अरब, UAE जैसे देश भी चिंतित हैं.. क्योंकि उनका तेल व्यापार ठप हो गया.. चीन और रूस ईरान के करीब हैं.. लेकिन वे भी स्थिरता चाहते हैं.. भारत तेल आयात पर निर्भर होने से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है.. दुनिया भर के नेता शांति की अपील कर रहे हैं.. कई देश पाकिस्तान की मध्यस्थता का स्वागत कर रहे हैं.. अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो महंगाई बढ़ेगी.. आर्थिक संकट गहराएगा.. और नई जंग की आशंका बनी रहेगी..

जानकारी के अनुसार ईरान युद्ध से आर्थिक और सैन्य रूप से कमजोर हुआ है.. प्रतिबंध पहले से थे.. अब और मुश्किलें बढ़ी हैं.. लेकिन ईरान अपनी संप्रभुता और होर्मुज पर नियंत्रण की बात पर अड़ा हुआ है.. वह चाहता है कि प्रतिबंध हटें, नुकसान का मुआवजा मिले.. और उसके परमाणु कार्यक्रम को मान्यता मिले.. जिसके चलते ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से नया प्रस्ताव भी भेजा है.. लेकिन दोनों पक्षों के बीच अभी भी कई मुद्दों पर मतभेद हैं..

 

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