मोदी के ‘गुजरात मॉडल’ की खुली पोल, एक शिक्षक के भरोसे 2936 स्कूल, 5612 स्कूल बंद

नीति आयोग की रिपोर्ट ने गुजरात की शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं... रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के 2936 स्कूल सिर्फ... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः हाल ही में गुजरात के देदियापाड़ा विधायक चैतर वसावा ने मोदी सरकार.. और गुजरात की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है.. उन्होंने कहा कि नीति आयोग की नई रिपोर्ट ने गुजरात मॉडल की पोल खोल दी है.. रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के 2,936 सरकारी स्कूलों में सिर्फ एक ही शिक्षक है.. साथ ही उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने 5,612 सरकारी स्कूल बंद कर दिए.. जिससे गांवों के बच्चों का शिक्षा का मूलभूत अधिकार छिन गया.. शिक्षा के लिए 63,134 करोड़ रुपये का बजट है.. लेकिन यह पैसा कहां खर्च हो रहा है.. किसी को पता नहीं..

आपको बता दें कि नीति आयोग की मई 2026 की रिपोर्ट School Education System in India: Temporal Analysis and Policy Roadmap for Quality Enhancement पर आधारित.. यह विश्लेषण पूरे देश के संदर्भ में भी देखा जाएगा.. नीति आयोग ने मई 2026 में स्कूल शिक्षा पर एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की.. यह रिपोर्ट पिछले 10 साल.. यानी 2014-15 से 2024-25 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करती है.. इसमें कुल 14.71 लाख स्कूल, 24.69 करोड़ छात्र.. और 1 करोड़ से ज्यादा शिक्षकों की स्थिति बताई गई है..

रिपोर्ट का मुख्य फोकस बुनियादी ढांचा, शिक्षक उपलब्धता, नामांकन, सीखने के नतीजे.. और चुनौतियों पर है.. पूरे देश में 1,04,125 स्कूल ऐसे हैं.. जो सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं.. इनमें से 89% ग्रामीण क्षेत्रों में हैं.. इन स्कूलों में एक शिक्षक कक्षा 1 से 8 तक के सभी विषय पढ़ाता है.. जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है.. गुजरात में ऐसे स्कूलों की संख्या 2,936 है.. ये स्कूल मुख्य रूप से ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में हैं.. रिपोर्ट में 63 ऐसे स्कूलों का भी जिक्र है.. जहां कोई छात्र नहीं है.. लेकिन शिक्षक तैनात हैं.. ऐसे स्कूलों पर संसाधन बर्बाद हो रहे हैं..

गुजरात में 2,936 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है.. एक शिक्षक को गणित, विज्ञान, भाषा.. और सामाजिक अध्ययन जैसे सभी विषय संभालने पड़ते हैं.. इससे बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान नहीं मिल पाता.. कई कक्षाओं के बच्चे एक साथ बैठकर पढ़ते हैं.. रिपोर्ट बताती है कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों में शिक्षक तैनाती मुश्किल होती है.. गुजरात जैसे राज्य में जिसे विकास का मॉडल माना जाता है.. यह स्थिति चिंताजनक है.. आदिवासी क्षेत्रों जैसे देदियापाड़ा, जहां चैतर वसावा विधायक हैं.. वहां यह समस्या और गंभीर हो सकती है..

आपको बता दें कि देशभर में तेलंगाना में 5,001.. और दूसरे राज्यों में भी हजारों एकल-शिक्षक स्कूल हैं.. लेकिन गुजरात में यह आंकड़ा विकास के दावों से मेल नहीं खाता.. चैतर वसावा ने दावा किया कि भाजपा सरकार ने 5,612 सरकारी स्कूल बंद कर दिए.. हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-26 के बीच गुजरात में 75 प्राथमिक स्कूल बंद किए गए.. जिसका मुख्य कारण नामांकन बहुत कम होना या जीरो एनरोलमेंट था..

सरकार का कहना है कि कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के स्कूलों में मर्ज किया गया.. बच्चों को परिवहन और अन्य सुविधाएं दी गईं ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो.. वहीं विपक्ष का कहना है कि स्कूल बंद होने से गांव के बच्चों को दूर जाना पड़ता है.. जिससे कई बच्चे ड्रॉपआउट हो जाते हैं.. पिछले वर्षों में बड़े आंकड़ों, यानी हजारों स्कूल बंद होने के दावे, राजनीतिक बहस में आते रहे हैं.. वास्तव में, देशभर में नामांकन घटने और निजी स्कूलों की बढ़त के कारण सरकारी स्कूलों की संख्या प्रभावित हुई है.. नीति आयोग की रिपोर्ट में भी सरकारी स्कूलों में नामांकन 49.24% तक गिरने की बात कही गई है..

गुजरात सरकार ने 2026-27 के बजट में शिक्षा विभाग के लिए 63,184 करोड़ रुपये आवंटित किए.. यह राशि स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर, छात्रवृत्ति, उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा और कल्याण योजनाओं पर खर्च होती है.. 108 नए सरकारी स्कूल बनाने के लिए 330 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं.. इसके अलावा कंपाउंड वॉल, मरम्मत और स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है.. आदिवासी क्षेत्रों पर विशेष फोकस और स्किल डेवलपमेंट व उच्च शिक्षा पर जोर दिया गया है..

 

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