कई देशों का सीजफायर घोषित करने वाले ट्रंप ईरान में फंस गए, अंदर का खेल बाहर आते ही हड़कंप

ट्रंप के सबसे बड़े चाणक्य और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ हाथ जोड़कर तेहरान के सामने खड़े हैं कि साहब , कोई तो सीजफायर करा दो, लेकिन तेहरान है कि सुनने को तैयार नहीं। 

4पीएम न्यूज नेटवर्क: आज उनकी चीखें व्हाइट हाउस की दीवारों से बाहर आ रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप, जो सार्वजनिक मंचों पर खड़े होकर दहाड़ रहे हैं कि ईरान खत्म हो गया, ईरान घुटनों पर है, लेकिन  आज हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

खबर ये है कि ट्रंप के सबसे बड़े चाणक्य और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ हाथ जोड़कर तेहरान के सामने खड़े हैं कि साहब , कोई तो सीजफायर करा दो, लेकिन तेहरान है कि सुनने को तैयार नहीं।

ट्रंप साहब मीडिया के सामने आकर कहते हैं कि ईरान बातचीत के लिए बेताब है। लेकिन पर्दे के पीछे की कहानी सुनेंगे तो दंग रह जाएंगे।  Axios की एक रिपोर्ट आई, जिसमें अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्टीव विटकॉफ को मैसेज भेजकर जंग रोकने की भीख मांगी है। लेकिन जैसे ही ये खबर आई, Drop Site News ने इस झूठ की धज्जियां उड़ा दीं।

ईरानी अधिकारियों के हवाले से खबर आई है कि असलियत में मैसेज स्टीव विटकॉफ ने अराघची को भेजे थे! विटकॉफ बार-बार मैसेज कर रहे थे कि आइये, टेबल पर बैठते हैं, बात करते हैं। लेकिन ईरानी विदेश मंत्री ने उनके मैसेज को सीन करके छोड़ दिया, यानी पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। ईरान का साफ कहना है कि जब तक सर्वाेच्च नेता मोजतबा खामेनेई फैसला नहीं लेते, अमेरिका से किसी भी तरह की सीधी बातचीत का दरवाजा पूरी तरह बंद है।

और इस दौरान पहली बार व्हाइट हाउस के विशेष दूत और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच सीधी बात हुई है। वॉशिंगटन स्थित मीडिया आउटलेट Axiosने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से यह खबर दी है रिपोर्ट के अनुसार यह साफ नहीं है कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और अब्बास अराघची के बीच क्या बात हुई है, लेकिन यह जानकारी मिली है कि जंग शुरू होने के बाद यह पहली हाई लेवल बातचीत है।

मीडिया रिपोर्ट्स में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों का हवाला देते हुए एक ही बात को अलग-अलग तरीके से बताया जा रहा है. कुछ कह रहे हैं कि अराघची ने विटकॉफ को मैसेज किए, जबकि कुछ का ये कहना है कि विटकॉफ ने अराघची को जंग को लेकर मैसेज भेजा है। Axios की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया गया कि ईरानी विदेश मंत्री ने जंग खत्म करने के लिए स्टीव विटकॉफ को टेक्स्ट मैसेज किया. हालांकि, एक और मीडिया आउटलेट  Drop Site News ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि मैसेज स्टीव विटकॉफ ने अराघची को भेजे, लेकिन ईरानी विदेश मंत्री ने उनके मैसेज को न जरअंदाज कर दिया। अमेरिकी अधिकारियों का ये भी कहना है कि अराघची व्हाइट हाउस से बात करना चाहते थे, लेकिन अमेरिका उनसे बात नहीं कर रहा है. हालांकि, किसी भी आधिकारिक सूत्र ने यह जानकारी नहीं दी है कि कितने मैसेज किए गए और उनमें क्या बात हुई.

इस बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मुद्दे पर एक पोस्ट किया है। हालांकि माना जा रहा है अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सोंस ने यह खबर जानबूझकर फैलाई क्योंकि ट्रंप अमेरिका जैसे-जैसे जंग आगे बढ़ रही है हांफना शुरु कर चुके हैं। खासतौर से डॉप साइट न्यूज ने जिस तरह से रिपोर्टिंग की है, उसमें एक बात तो बहुत साफ है कि ये अफवाह जानबूझ कर फैलाई जा रही है ताकि अमेरिका और ईरान एक मेज पर आएं और जंग खत्म हो।

इसी बीच ईरान से एक और बड़ी खबर आई है जिसने इजराइल और अमेरिका के होश उड़ा दिए हैं। ईरान की सुरक्षा एजेंसियों ने मोसाद के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। खबर है कि 10 खूफिया एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है, जो ईरान के सैन्य ठिकानों और मिसाइल साइट्स की जानकारी लीक कर रहे थे। ये गिरफ्तारी साबित करती है कि ईरान न सिर्फ सरहदों पर लड़ रहा है, बल्कि अपने घर के अंदर छिपे गद्दारों और विदेशी जासूसों का भी सफाया कर रहा है।

मोसाद के आंख और कान काटे जा रहे हैं, और यही वजह है कि अब इजराइल को सटीक लोकेशन नहीं मिल पा रही है। रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा है कि उत्तर-पूर्वी इलाके में 10 विदेशी नागरिकों को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया है। तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार इन लोगों पर संवेदनशील जगहों की जानकारी जुटाने और संभावित ऑपरेशन की तैयारी करने का आरोप है।

रिपोर्ट में गिरफ्तार लोगों की राष्ट्रीयता या उनकी गतिविधियों से जुड़ी ज्यादा जानकारी नहीं दी गई है। ट्रंप साहब दावा कर रहे हैं कि उन्होंने ईरान की 90 प्रतिशत मिसाइलें तबाह कर दी हैं। अगर ऐसा है ट्रंप साहब, तो फिर अमेरिकी तेल कंपनियों के प्रमुख व्हाइट हाउस के चक्कर क्यों लगा रहे हैं? अमेरिकी तेल दिग्गजों ने ट्रंप को चेतावनी दी है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जल्द नहीं खुला, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था का जनाजा निकल जाएगा।

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने साफ कर दिया है कि होर्मुज सबके लिए बंद नहीं है, लेकिन अमेरिका और उसके करीबियों के लिए ये रास्ता तब तक बंद रहेगा जब तक हमले नहीं रुकते। ट्रंप ने सोचा था कि वो एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाएंगे और होर्मुज को जबरदस्ती खोल देंगे। उन्होंने 2000 सैनिकों की तैनाती भी कर दी, लेकिन उनके दोस्तों ने ही उन्हें ठेंगा दिखा दिया। ट्रंप को उम्मीद थी कि नाटो उनके पीछे खड़ा होगा। लेकिन जर्मनी ने साफ कह दिया कि ये नाटो की जंग नहीं है। जर्मनी ने अमेरिका और इजराइल को आईना दिखाते हुए कहा कि आपने ये युद्ध शुरू करने से पहले हमसे कोई मशवरा नहीं किया था, तो अब इसकी आग खुद ही बुझाइए।

आज अमेरिका अकेला खड़ा है। बारूद खत्म हो रहा है, इजराइल के इंटरसेप्टर खाली हो चुके हैं और ईरान टस से मस होने को तैयार नहीं। ईरान का कहना है कि उसने न तो सीजफायर मांगा है और न ही बातचीत की जरूरत है; वो अपनी रक्षा करना बखूबी जानता है। एक्सपर्ट के मुताबिक, ईरान की सेना ने होर्मुज स्ट्रेट पर अपने कंट्रोल का फायदा उठाकर अमेरिका को एक लंबी और मुश्किल जंग में खींच लिया है। उन्होंने कहा कि ईरान सीधे टक्कर की बजाय ऐसी रणनीति अपना रहा है, जिसमें वह धीरे-धीरे दबाव बनाता रहे और समय के साथ विरोधी को कमजोर करे। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में से एक है और ईरान इसके उत्तरी हिस्से पर पकड़ रखता है। इसी वजह से वह दुनिया की अर्थव्यवस्था और अमेरिका पर दबाव बना सकता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि ईरान इस स्थिति का इस्तेमाल करके अपनी शर्तें मनवाने की कोशिश कर रहा है और जरूरत पड़े तो इसे लंबे समय तक जारी रख सकता है। तेल की कीमत बढ़कर 153 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो हाल के समय में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक मानी जा रही है। इस बढ़ोतरी का असर दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है, खासकर उन देशों पर जो तेल के आयात पर निर्भर हैं। तेल की कीमतों में अचानक आई इस तेजी के चलते कई देशों में महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। परिवहन, बिजली और जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

इसी बीच, श्रीलंका ने घोषणा की है कि अब सरकारी दफ्तर हफ्ते में 4 दिन ही खुलेंगे। यह फैसला ईंधन बचाने और ऊर्जा संकट से निपटने के लिए लिया गया है। ये साफ है कि अमेरिका ने ईरान को बहुत कम आंका था।

ट्रंप का अहंकार अब उन्हीं के गले की फांस बन गया है। एक तरफ ईरान के बढ़ते हमले और दूसरी तरफ दुनिया भर में तेल की बढ़ती कीमतें ट्रंप के सामने अब सिर्फ दो ही रास्ते हैं या तो वो अपनी हार मानकर पीछे हटें, या फिर पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की आग में झोंक दें। सवाल ये है कि क्या ट्रंप के ‘चाणक्य’ अब कोई नया दांव चल पाएंगे? या फिर ईरान का ‘चेकमेट’ अमेरिका की सुपरपावर छवि को हमेशा के लिए दफन कर देगा?

Related Articles

Back to top button