तेल की नस पर वार मचेगा हाहाकार

  • दुनिया में डर : मिडिल ईस्ट में आग
  • वैश्विक तबाही की दस्तक
  • गैस फील्ड से रिफाइनरी तक पर हमले
  • कच्चे तेल पर जंग ने धड़कनें तेज कीं

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। हवा में धुआं है जमीन पर आग है और आसमान पर युद्ध की काली चादर तनी हुई है। मिडिल ईस्ट अब सिर्फ एक जंग का मैदान नहीं रहा यह उस बारूद का गोदाम बन चुका है जहां हर विस्फोट पूरी दुनिया की सांसें रोके दे रहा है। हुआ वही जिसका अंदेशा था और जिस दिन से तेल और गैस के भंडारों को निशाने पर लिया गया उसी दिन से यह साफ हो गया कि यह लड़ाई अब सिर्फ सरहदों की नहीं रही बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की गर्दन पर रखी तलवार बन चुकी है।
इजरायल ने जब ईरान के सबसे बड़े पार्स गैस फील्ड पर हमला किया तब यह सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी यह उस लाइफलाइन पर वार था जिससे दुनिया की ऊर्जा चलती है। लेकिन जवाब भी उतना ही भयानक आया। ईरान ने पलटवार करते हुए कतर की मुख्य गैस फैसिलिटी को निशाना बनाया। कुछ ही घंटों में पूरा इलाका आग के समंदर में बदल गया। गैस प्लांट्स से उठती लपटें और काले धुएं के गुबार ने यह बता दिया कि अब जंग ने अपना सबसे खतरनाक मोड़ पकड़ लिया है।

पूरी दुनिया को हिला दिया

इस टकराव ने सिर्फ मिडिल ईस्ट को नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को हिला दिया है। तेल के कुएं गैस रिफाइनरी और ऊर्जा सप्लाई के नेटवर्क अब सीधे निशाने पर हैं। यही वजह है कि अमेरिका की बेचैनी अब साफ दिखाई दे रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि हम हिचकिचाएंगे नहीं। यह बयान सिर्फ एक धमकी नहीं बल्कि उस डर का संकेत है कि अगर यह जंग ऊर्जा ठिकानों तक फैलती रही तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में ऐसा भूकंप आएगा जिसकी गूंज हर देश में सुनाई देगी।

रास लफ्फान पर हमले के बाद ईरानी राजनयिक ‘पर्सोना नॉन ग्राटा’ घोषित

कतर ने अपनी प्रमुख गैस सुविधा रास लफ्फान पर हुए हमले के बाद कड़ा रुख अपनाया है। कतर सरकार ने ईरानी राजनयिकों को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित करते हुए देश छोडऩे का आदेश दिया है। यह कदम कूटनीतिक रिश्तों में गंभीर दरार का संकेत है। कतर का कहना है कि इस हमले ने उसकी संप्रभुता और ऊर्जा सुरक्षा को सीधा नुकसान पहुंचाया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस फैसले को एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि अब यह संघर्ष केवल सैन्य नहीं बल्कि कूटनीतिक टकराव में भी बदल चुका है।

हम डूबेंगे तो तुम को भी ले डूबेंगे

ईरान का रुख भी साफ है अगर हम डूबेंगे तो सबको साथ लेकर डूबेंगे। यह रणनीति सीधी है तेल की कीमतें बढ़ाओ पश्चिमी देशों की जनता को परेशान करो और उनकी सरकारों पर दबाव बनाओ। यह जंग अब मिसाइलों से ज्यादा बाजारों में लड़ी जा रही है। कच्चा तेल 120 डालर प्रति बैरल या फिर 150 डॉलर या उससे भी ऊपर जाने की आशंका अब सिर्फ अनुमान नहीं बल्कि एक डरावनी हकीकत बनती जा रही है। इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा यह महंगाई व्यापार रोजगार और आम आदमी की जेब तक पहुंचेगा। सवाल अब यह नहीं है कि कौन जीत रहा है। सवाल यह है कि इस जंग में हार किसकी होगी क्योंकि इस बार हार सिर्फ किसी एक देश की नहीं बल्कि पूरी दुनिया की हो सकती है।

हबशान गैस प्लांट पर हमले से खलबली

ईरान के हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात में स्थित हबशान गैस प्लांट को लेकर स्थिति गंभीर हो गई है। यूएई ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता पर सीधा हमला बताया है। सुरक्षा कारणों से प्लांट के कुछ हिस्सों में अस्थायी रूप से आपरेशन रोकना पड़ा जिससे गैस सप्लाई पर असर पडऩे की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह के हमले जारी रहे तो खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। यूएई ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि इस संघर्ष को तुरंत रोका जाए क्योंकि इसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा।

ईरान को तबाह कर देंगे कतर हमले के बाद अमेरिका का आक्रामक रुख

कतर में हमले के बाद प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद सख्त बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ऊर्जा ठिकानों पर हमले बर्दाश्त नहीं करेगा। ट्रंप का यह बयान इस बात का संकेत है कि अमेरिका अब सीधे तौर पर इस संघर्ष में और गहराई से शामिल हो सकता है। उनका कहना है कि अगर ईरान ने अपनी रणनीति नहीं बदली तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

शहीदों को अंतिम विदाई, बदले की कसम के साथ ईरान का सख्त संदेश

ईरान में हमलों में मारे गए लोगों को अंतिम विदाई दी गई, जहां बड़े स्तर पर जनसमूह उमड़ा। इस दौरान नेताओं और सैन्य अधिकारियों ने प्रतिशोध का संकल्प लिया। ईरान का कहना है कि वह हर हमले का जवाब देगा और पीछे हटने का सवाल ही नहीं उठता। यह साफ संकेत है कि आने वाले दिनों में हमले और तेज हो सकते हैं।

खतरा बरकरार लंबी जंग की आशंका

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि लगातार हमलों से ईरान को नुकसान जरूर हुआ है लेकिन उसकी क्षमता अभी खत्म नहीं हुई है। रिपोर्ट के अनुसार ईरान अभी भी जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम है और उसके पास कई विकल्प मौजूद हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जंग जल्द खत्म होने वाली नहीं है। बल्कि आने वाले समय में यह और जटिल और खतरनाक हो सकती है जिसमें कई नए मोर्चे खुल सकते हैं।

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