अचानक क्यों रुक गया गुलमर्ग रोपवे? जानिए हादसे की पूरी वजह
जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में सोमवार को बड़ी तकनीकी खराबी के कारण गोंडोला केबल कार सेवा अचानक ठप हो गई.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग में सोमवार को बड़ी तकनीकी खराबी के कारण गोंडोला केबल कार सेवा अचानक
ठप हो गई.
घटना के समय 62 केबिनों में सवार करीब 300 पर्यटक हवा में फंस गए. सेना, फायर ब्रिगेड और पर्यटन विभाग की संयुक्त टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया, जिसके तहत अब तक 100 पर्यटकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है.
जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग को ‘धरती का स्वर्ग’ कहा जाता है, लेकिन सोमवार दोपहर करीब 2 बजे यहां 300 पयर्टकों की सांसें अटक गईं. ये पर्यटक ‘गुलमर्ग गोंडोला’ (केबल कार) के 62 केबिन में सवार थे. अचानक से केबल कार रुकने से सही दहशत में आ गए और चीख-पुकार मचाने लगे.
बताया गया कि रोपवे सिस्टम का एक महत्वपूर्ण पुर्जा टूट जाने के कारण पूरी केबल कार सेवा बीच रास्ते में रुक गई. सूचना मिलते ही सेना, फायर ब्रिगेड और पर्यटन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गई. करीब 6 घंटे से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. 100 पर्टयकों को अभी तक केबल कार से बाहर निकाला गया है.
62 केबिन बीच आसमान में रुके
जानकारी के मुताबिक, जिस समय तकनीकी खराबी आई, उस वक्त गोंडोला सेवा के कुल 62 केबिन ऑपरेशनल थे. अचानक सिस्टम बंद होने के कारण सभी केबिन हवा में ही रुक गए. इन केबिनों में देश-विदेश से आए करीब 300 पर्यटक सवार थे, जो गुलमर्ग की बर्फीली वादियों और खूबसूरत पहाड़ों का आनंद लेने पहुंचे थे. अचानक गोंडोला रुकते ही कई पर्यटक घबरा गए
और मदद के लिए पुकार लगाने लगे.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ केबिन काफी ऊंचाई पर फंसे हुए थे, जिससे यात्रियों में डर और बेचैनी बढ़ गई. बच्चों और महिलाओं की स्थिति को देखते हुए मौके पर मौजूद अधिकारियों ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया.
सेना, फायर ब्रिगेड और पर्यटन विभाग ने संभाला मोर्चा
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और जम्मू-कश्मीर सरकार तुरंत हरकत में आ गई. भारतीय सेना की विशेष रेस्क्यू टीमें, फायर ब्रिगेड के जवान और पर्यटन विभाग के प्रशिक्षित कर्मचारी संयुक्त रूप से राहत कार्य में जुट गए. बचाव अभियान को युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है, ताकि सभी पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतारा जा सके.
रेस्क्यू टीमों ने रस्सियों और विशेष सुरक्षा उपकरणों की मदद से फंसे हुए लोगों को निकालना शुरू किया. अधिकारियों के अनुसार अब तक लगभग 100 पर्यटकों को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया है, जबकि बाकी लोगों को निकालने का अभियान लगातार जारी है.
कैसे किया जा रहा पर्यटकों का रेस्क्यू?
जानकारी के मुताबिक, तीनों टीमें एक रणनीति के तहत रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. एक जगह पर टीमें मौजूद हैं. जहां से रोपवे के तारों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है. उसी जगह पर एक-एक कर केबल कारों के केबिन को लाया जा रहा है.
फिर सीढ़ी और रस्सियों की मदद से एक-एक पर्यटक को बाहर निकाला जा रहा है. चूंकि अभी रेस्क्यू ऑपरेशन एक जगह से ही चल रहा है तो इसमें काफी समय लग रहा है. वहीं टेक्निकल टीम के एक्सपर्ट केबल कारों के सहारे केबिनों तक पहुंच रहे हैं और पर्यटकों को नीचे उतारने में मदद कर रहे हैं.
फेज-1: यह गुलमर्ग रिसॉर्ट से कोंगडोरी घाटी तक जाती है. इसकी लंबाई 2.5 किलोमीटर है और इसमें करीब 9 मिनट का समय लगता है.
फेज-2: यह कोंगडोरी से शुरू होकर अफरवट चोटी (4,200 मीटर की ऊंचाई) तक जाती है. इसकी लंबाई 1.7 किलोमीटर है और इसमें लगभग 12 मिनट का समय लगता है.
चेयरलिफ्ट (फेज-3): कोंगडोरी से मैरीज शोल्डर तक एक अलग चेयरलिफ्ट सिस्टम भी है, जिसे अक्सर तीसरे फेज के रूप में गिना जाता है.
CM ऑफिस ने जारी किया बयान
जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने घटना पर नजर बनाए रखी है. सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने जैसी कोई बात नहीं है. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सभी केबिन सुरक्षित हैं और तकनीकी टीम लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है.
सरकार ने यह भी कहा कि प्राथमिकता सभी पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकालना है. रेस्क्यू ऑपरेशन में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही और हर केबिन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.
पर्यटन सीजन में बड़ा सवाल
गुलमर्ग गोंडोला जम्मू-कश्मीर पर्यटन का एक प्रमुख आकर्षण माना जाता है. हर साल लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं और केबल कार की सवारी का आनंद लेते हैं. पीक टूरिस्ट सीजन के दौरान इस तरह की तकनीकी खराबी सामने आने से सुरक्षा व्यवस्थाओं और रख-रखाव पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि रोपवे सिस्टम जैसे संवेदनशील ढांचे में नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा ऑडिट बेहद जरूरी होते हैं. ऐसे में किसी मुख्य पुर्जे का टूट जाना यह संकेत देता है कि रख-रखाव व्यवस्था में कहीं न कहीं कमी रही है.
गुलमर्ग को कहते हैं ‘धरती का स्वर्ग’
गुलमर्ग भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले में स्थित एक बेहद प्रसिद्ध और खूबसूरत हिल स्टेशन है. यह पीर पंजाल रेंज (हिमालय) में समुद्र तल से लगभग 2,730 मीटर (8,600 फीट) की ऊंचाई पर बसा हुआ है. यह जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से लगभग 50-55 किलोमीटर की दूरी पर उत्तर-पश्चिम में स्थित है. सड़क मार्ग से यहां पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगता है.
अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण इसे ‘धरती का स्वर्ग’ भी कहा जाता है. यह एशिया की सबसे ऊंची और सबसे लंबी केबल कार (गोंडोला राइड), स्कीइंग ढलानों और दुनिया के सबसे ऊंचे गोल्फ कोर्स के लिए मशहूर है. यहां सर्दियों में बर्फबारी का आनंद लिया जा सकता है और गर्मियों में हरे-भरे घास के मैदान देखने को मिलते हैं.



