भाजपा के इशारे पर काम कर रहा चुनाव आयोग

  • सीएम ममता बोलीं- बंगाल में अघोषित इमरजेंसी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव की घोषणा केबाद से ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। भाजपा व टीएमसी एक दूसरे पर हमलावर हैं। ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनावों से पहले बंगाल को अनुचित रूप से निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने दावा किया कि चुनाव अधिसूचना जारी होने से पहले ही शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों सहित 50 से अधिक वरिष्ठ अधिकारियों को मनमाने ढंग से हटा दिया गया है। बनर्जी ने इस कदम को राजनीतिक हस्तक्षेप करार दिया और चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयां संस्थागत निष्पक्षता को कमजोर करती हैं और राज्य में चुनावों के संचालन को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं।
पॉल ने टीएमसी और वामपंथियों दोनों की आलोचना करते हुए उन पर तुष्टीकरण की राजनीति में लिप्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन प्रयासों के बावजूद, अल्पसंख्यक समुदायों को कोई वास्तविक विकास नहीं मिला, बल्कि उन्हें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया गया। ये टिप्पणियां चुनावों से पहले पार्टियों के बीच बढ़ते जुबानी जंग को और हवा देती हैं। बनर्जी ने आरोप लगाया कि सूचना एवं आईबी, एसटीएफ और सीआईडी जैसी प्रमुख एजेंसियों को चुनिंदा तबादलों के जरिए कमजोर किया जा रहा है, जिसे उन्होंने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को पंगु बनाने का जानबूझकर किया गया प्रयास बताया। उन्होंने पारदर्शिता को लेकर चिंता जताते हुए पूरक मतदाता सूचियों के प्रकाशन में देरी पर भी सवाल उठाए। स्थिति को अघोषित आपातकाल बताते हुए उन्होंने भाजपा पर संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप लगाया और जोर देकर कहा कि बंगाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा।

एसआईआर में बाधा डाल रहीं टीएमसी : अग्निमित्रा पॉल

भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया के लिए डेटा प्रबंधन अधिकारियों की मांग की थी, लेकिन ममता बनर्जी सरकार ने सहयोग करने से इनकार कर दिया। उन्होंने दावा किया कि इस कदम से राज्य में चुनावी तैयारियों में बाधा उत्पन्न हुई। पॉल की ये टिप्पणियां पश्चिम बंगाल में चुनाव संचालन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच आई हैं।

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