गुजरात में नकली नोटों का काला खेल! फर्जी योग गुरु के कारनामे सुन सिर पकड़ लेंगे

गुजरात के सूरत में नकली नोटों के बड़े रैकेट का खुलासा हुआ है... जहां एक योग आश्रम में फर्जी नोट छापे जा रहे थे...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात राज्य की आर्थिक राजधानी अहमदाबाद में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है.. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच की टीम ने नकली करेंसी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है.. इस रैकेट से जुड़े मुख्य आरोपी सूरत के श्री सत्यम योग फाउंडेशन यानी सत्यम योग आश्रम के कथित गुरु.. प्रदीप जोटांगिया उर्फ प्रदीप गुरुजी समेत कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है.. पुलिस ने इन आरोपियों के पास से 500 रुपये के नकली नोटों की फेस वैल्यू में.. 2.38 करोड़ रुपये से ज्यादा की जाली करेंसी बरामद की है.. ये नोट इतने अच्छी गुणवत्ता के थे कि.. पहली नजर में असली नोटों से अलग करना मुश्किल था.. इस मामले में पुलिस की जांच अभी जारी है.. और पूछताछ में और भी नाम सामने आने की संभावना है..

जानकारी के मुताबिक यह पूरा घटनाक्रम 19 मार्च को शुरू हुआ.. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को गुप्त सूचना मिली थी कि.. सूरत से नकली नोटों की एक बड़ी खेप अहमदाबाद लाई जा रही है.. सूचना के आधार पर टीम ने अमराईवाड़ी इलाके में जाल बिछाया.. वहां एक फॉर्च्यूनर कार को रोका गया.. कार में छिपाकर रखे पैकेट और काले बैग से 500 रुपये के हजारों नकली नोट निकले.. जिसकी कुल फेस वैल्यू 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की थी.. कार सत्यम योग फाउंडेशन की थी.. और उस पर भारत सरकार तथा आयुष मंत्रालय के स्टिकर लगे हुए थे.. वीवीआईपी स्टिकर भी चिपकाए गए थे.. ताकि पुलिस की नजर न पड़े.. कार में सवार सात लोग पकड़े गए.. जिनमें एक महिला भी शामिल है..

आपको बता दें कि गिरफ्तार आरोपियों में प्रदीप जोटांगिया मुख्य आरोपी हैं.. और उन्हें गुरुजी या सदगुरु प्रदीप के नाम से जाना जाता था.. उनके अलावा मुकेश थुम्मर उर्फ मुकुल, अशोक मावानी, रमेश भालर, दिव्येश राणा, भरत काकड़िया.. और एक महिला शामिल हैं.. सभी आरोपी प्रदीप गुरुजी के अनुयायी या शिष्य बताए जा रहे हैं.. उन्होंने मिलकर यह नेटवर्क चलाया था.. पुलिस ने इन सातों को कोर्ट में पेश किया.. और 14 दिन की रिमांड मांगी है.. साथ ही सूरत में छापेमारी कर प्रिंटिंग यूनिट भी पकड़ी गई.. वहां से अतिरिक्त 28 लाख रुपये फेस वैल्यू के नकली नोट.. प्रिंटिंग मशीनें, कटिंग मशीनें, कंप्यूटर, खास कागज, स्याही.. और दस्तावेज बरामद हुए.. कुल मिलाकर जब्ती 2.38 करोड़ रुपये फेस वैल्यू तक पहुंच गई..

जानकारी के लिए बता दें कि प्रदीप जोतांगिया सूरत में श्री सत्यम योग फाउंडेशन चलाते थे.. वहीं पुलिस जांच में सामने आया कि वह केवल 12वीं पास हैं.. और पहले राजकोट में नाई की दुकान चलाते थे.. वहीं जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि प्रदीप के कई राजनीतिक नेताओं के साथ करीबी संबंध थे.. जो समय-समय पर उनके आश्रम में आते रहे हैं.. सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी.. और अन्य नेताओं के साथ साझा की जा रही हैं.. जो उनकी व्यापक पहुंच को दर्शाती हैं.. पुलिस के मुताबिक, यह गैंग पिछले 3-4 महीनों से सक्रिय था.. इन्होंने प्रिंटर और कटर मशीनों की मदद से सूरत के एक घर में नकली नोट छापे.. प्रदीप ने दावा किया कि उन्होंने फाउंडेशन के सामाजिक कार्यों के लिए धन की कमी होने पर यह रास्ता चुना.. वहीं वह योग गुरु और ‘हीलर’ बनकर लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे थे.. और बिना किसी मेडिकल डिग्री के कैंसर जैसी बीमारियों के इलाज का दावा करते थे..

वहीं अब सवाल उठता है कि एक योग आश्रम कैसे नकली नोटों का अड्डा बन गया.. प्रदीप जोटांगिया सूरत के कामरेज तालुका के धोरण पारडी गांव में.. श्री सत्यम योग फाउंडेशन चलाते थे.. बाहर से यह आश्रम योग और आध्यात्मिक गतिविधियों का केंद्र दिखता था.. और आश्रम के बाहर एक बड़ा बोर्ड लगा था.. जिसमें लिखा था कि यहां योग सिखाया जाता है.. लोग वहां योग सीखने और सेवा कार्यों के लिए आते थे.. लेकिन अंदर की कहानी बिल्कुल अलग थी.. प्रदीप गुरुजी आश्रम को बड़ा बनाना चाहते थे.. इसके लिए उन्हें भारी-भरकम पैसे की जरूरत थी.. पिछले करीब एक साल से वे फंड जुटाने की कोशिश कर रहे थे.. उन्होंने सेवा कार्यों से जुड़े पैम्फलेट छपवाए, अखबारों.. और सोशल मीडिया पर विज्ञापन दिए.. लोगों से चंदा मांगा.. लेकिन अपेक्षित रकम नहीं जुट सकी.. आर्थिक तंगी बढ़ती गई और आश्रम विस्तार की महत्वाकांक्षा अधूरी रह गई..

इसी तंगी में प्रदीप गुरुजी और उनके शिष्यों ने मिलकर एक खतरनाक प्लान बनाया.. उन्होंने नकली नोट छापने का फैसला किया.. मुकेश थुम्मर इस काम का मुख्य तकनीकी व्यक्ति था.. वह कंप्यूटर का अच्छा जानकार था.. उसने चीन से विशेष प्रकार का कागज मंगवाया.. यह कागज असली नोटों वाले वॉटरमार्क जैसा दिखता था.. और बहुत महंगा था.. पेमेंट क्रिप्टोकरेंसी के जरिए एजेंट के माध्यम से किया गया.. यह कागज भारत में प्रतिबंधित था.. फिर भी इसे चुपके से मंगवाया गया.. मुकेश के घर, सरथाणा इलाके में, प्रिंटिंग यूनिट सेटअप की गई.. एक A4 शीट पर तीन नोट छापे जा सकते थे.. प्रोफेशनल प्रिंटर, कलर इंक और कटिंग मशीन का इस्तेमाल हुआ.. नोट इतने उच्च गुणवत्ता के थे कि.. RBI और फॉरेंसिक लैब को भी जांच करनी पड़ी..

पुलिस की पूछताछ में पता चला कि यह रैकेट करीब छह महीने से प्लानिंग कर रहा था.. पहले छोटे स्तर पर नोट छापे गए.. और बाजार में आजमाए गए.. करीब 20 से 28 लाख रुपये फेस वैल्यू के नकली नोट पहले ही एजेंटों के जरिए अलग-अलग जिलों में खपाए जा चुके थे.. एजेंटों को 20 से 25 प्रतिशत कमीशन दिया जाता था.. सफलता देखकर अब बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू किया गया.. इस बार अहमदाबाद के एक खरीदार से डील तय हुई.. डील की शर्त 33 प्रतिशत की दर थी.. मतलब 3 लाख रुपये की नकली करेंसी के बदले सिर्फ 1 लाख रुपये असली पैसे लिए जाते.. इस डील से 2 करोड़ फेस वैल्यू के नकली नोट के बदले करीब 66 लाख रुपये असली कमाने की योजना थी.. यह उनकी पहली बड़ी डील थी.. आरोपी सूरत से अहमदाबाद पहुंचे थे कि सौदा पूरा करें.. लेकिन पुलिस ने पहले ही पकड़ लिया..

 

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