पश्चिम एशिया के जंग में ट्रंप केतेवर पड़े ढीले

- अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान से वार्ता शुरू करने का दिया प्रस्ताव, अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग आज का 26वां दिन
- अमेरिकी क्रूज मिसाइलों को मार गिराया
- इजरायल बोला-तेहरान से आने वाली मिसाइलों को रोक दिया
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग आज 26वें दिन में पहुंच गई है। उधर दोनों गुट अपने-अपने दावे कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, हमने यह युद्ध जीत लिया है। ईरान पूरी तरह कमजोर हो चुका है। पर ईरान ने इससे इंकार किया है। इसबीच ट्रंप का पांच दिन तक ऊर्जा के लिए विराम लेने का फैसला बता रहा है कि वह अब पीछे हट रहे। अमेरिका ने दावा किया वह ईरान के साथ बातचीत करने के लिए आगे बढ़ रहा है। इस बीच इजरायल की सेना ने कहा है कि उन्होंने तेहरान से आने वाली मिसाइलों को रोक दिया है। इस बीच खबर ये भी है कि ईरान ने लड़ाई राकने से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति पर शर्तें थोप दी हैं।
पाकिस्तान ने सऊदी अरब से बात की
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात की। इस दौरान उन्होंने ईद-उल-फित्र की बधाई दी और क्षेत्रीय तनाव पर चर्चा की। शहबाज ने सऊदी अरब पर हाल के हमलों की मजबूत निंदा की और कहा कि पाकिस्तान इन मुश्किल वक्त में सऊदी अरब के साथ पूरी एकजुटता और अटूट समर्थन में खड़ा है। उन्होंने सऊदी अरब के सब्र की सराहना की और तुरंत डि-एस्केलेशन, शत्रुता खत्म करने और मुस्लिम उम्माह में एकता की जरूरत पर जोर दिया।
ईरान ने खार्ग द्वीप पर एफपीवी ड्रॉन्स से लैस सैनिक किए तैनात
ईरान ने खार्ग द्वीप पर तैनात सैनिकों को एफपीवी ड्रॉन्स से लैस कर दिया है, जो रूस-यूक्रेन युद्ध में अपनी घातक प्रभावशीलता दिखा चुके हैं। ये ड्रोन्स किसी भी ईरानी और अमेरिकी जमीन पर तैनात सैनिकों के बीच टकराव को अब एकतरफा नहीं रहने देंगे। ईरान के इस कदम से पता चलता है कि वे अपने सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, खासकर खार्ग द्वीप जैसे रणनीतिक स्थानों पर. खार्ग द्वीप ईरान के तेल निर्यात के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है और अमेरिकी सेना के साथ संभावित टकराव के लिए ईरान की तैयारी को दर्शाता है।
इजराइली ठिकानों पर हमलों की 80वीं लहर चलाई
वहीं ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया कि उन्होंने अमेरिकी और इजराइली ठिकानों पर हमलों की 80वीं लहर चला दी है। इस बीच इजरायल ने तेहरान पर हमला किया, जिसमें एक आवासीय इलाका भी प्रभावित हुआ। ईरानी हवाई सुरक्षा व्यवस्था ने तेहरान के पास और मरकजी प्रांत में अमेरिकी क्रूज मिसाइलों को मार गिराया। आईआरजीसी की एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने दो मिसाइलों को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया। ईरान का कहना है कि यह हमले उनकी एकीकृत राष्ट्रीय हवाई सुरक्षा नेटवर्क के तहत किए गए। ईरान के मुताबिक, इन हमलों में ठोस और तरल ईंधन वाली प्रिसीजन मिसाइलों के साथ ड्रोन भी इस्तेमाल किए गए। अमेरिकी बेस जैसे अली अल-सेलेम, अरिफजान, अल-अज्रक और शेख ईसा को भी टारगेट किया गया। ईरान इस पूरे अभियान को अपनी जवाबी कार्रवाई बता रहा है।
तेल अवीव में गिरी मिसाइलें
तेल अवीव पर एक ईरानी मिसाइल गिरने से छह लोग मामूली रूप से घायल हो गए हैं। पुलिस के अनुसार, लगभग 100 किलोग्राम विस्फोटक ले जा रहा एक गोला मध्य तेल अवीव में गिरा। इस हमले में कई इमारतों और वाहनों को नुकसान पहुंचा। मिसाइल के कुछ हिस्से तेल अवीव के पूर्व में स्थित रोश हा यिन में भी गिरे।
इजराइल के दक्षिण लेबनान में हमले के बाद 9 की मौत
लेबनान की स्वास्थ्य मंत्रालय के हवाले से बताया कि इजरायल के हमलों में दक्षिणी सिदोन इलाके के अदलौन शहर में कम से कम चार लोगों की मौत हो गई। कुल मिलाकर इस क्षेत्र में छह से ज्यादा लोगों की जान गई। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे इजरायली दुश्मन का हमला बताया है। ये हमले ईरान-इजराइल-अमेरिका संघर्ष के बीच लेबनान को भी प्रभावित कर रहे हैं। इजराइल का दावा है कि ये हमले हिजबुल्लाह जैसे ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए, लेकिन स्थानीय मीडिया में नागरिकों के मारे जाने की खबरें आ रही हैं। इस संघर्ष में लेबनान में अब तक सैकड़ों लोग प्रभावित हो चुके हैं।
ट्रंप ईरान से युद्ध में नाकाम हो रहे
ईरान संघर्ष के दौरान ट्रंप प्रशासन लगातार विरोधी संदेश दे रहा है, जिसमें कभी युद्ध को समेटने तो कभी ईरान के बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की धमकियां शामिल हैं। हालिया विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी को लेकर है, जिसने वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्पष्ट लक्ष्य की कमी और ईरान की युद्ध क्षमता के गलत आकलन की वजह से ही युद्ध ट्रंप के नियंत्रण से बाहर होता जा रहा है। सैन्य अभियान में अब तक अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर ढेरों बम बरसाए हैं और उसके शीर्ष नेतृत्व, जिसमें सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और अली लारिजानी जैसे नाम शामिल हैं, को निशाना बनाया। जवाब में ईरान ने भी इस्राइल और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर वार किए और उसे बड़े सैन्य और आर्थिक नुकसान पहुंचाए। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले ही ईरानी शीर्ष नेतृत्व से बातचीत की बात कहते हुए इस हफ्ते ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाने का आदेश टाल दिया हो, लेकिन पश्चिम एशिया में संघर्ष का दौर अभी भी जारी है।
ईरान ने वार्ता के लिए ट्रंप के सामने रख दी कड़ी शर्त
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वार्ता पुन: शुरू करने के प्रस्ताव के जवाब में, ईरान ने कथित तौर पर कई व्यापक मांगें रखी हैं, जिनमें खाड़ी में अमेरिकी सैन्य अड्डों को बंद करना, प्रतिबंधों को समाप्त करना और एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण हासिल करना शामिल है। यह तब हुआ जब तेहरान ने सार्वजनिक रूप से वाशिंगटन के चल रही वार्ताओं के दावों को खारिज करते हुए कहा कि दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच किसी समझौते की कोई संभावना नहीं है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि युद्धविराम समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करने की शर्तें अभी भी कठिन हैं, भले ही दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत शुरू हो रही हो। ईरानी प्रतिनिधियों ने खाड़ी में सभी अमेरिकी ठिकानों को बंद करने, युद्धकालीन नुकसान के लिए वित्तीय मुआवज़ा देने और हिज़्बुल्लाह के खिलाफ इजऱाइल के अभियान को समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने एक ऐसे ढांचे की भी मांग की है जो ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने की अनुमति देगा, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। मामले से परिचित लोगों ने बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने देश के नेतृत्व में अपनी शक्ति मजबूत कर ली है और इन मांगों को आगे बढ़ा रहा है। एक अन्य प्रमुख शर्त में होर्मुज जलडमरूमध्य को नियंत्रित करने वाली एक नई व्यवस्था शामिल है जो प्रभावी रूप से इसे ईरानी नियंत्रण में ला देगी, साथ ही यह ठोस गारंटी भी कि शत्रुता फिर से शुरू नहीं होगी। ईरान ने संघर्ष को समाप्त करने के लिए किसी भी समझौते के हिस्से के रूप में सभी प्रतिबंधों को हटाने पर भी जोर दिया है।




