खामेनेई की मौत के बाद ट्रंप को मिला था सुप्रीम लीडर बनने का ऑफर? यूएस राष्ट्रपति ने किया चौंकाने वाला दावा
दुनिया में झूठ बोलने के कई रिकॉर्ड बने होंगे, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने आज जो दावा किया है, उसने तो 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड' को भी शर्मसार कर दिया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दुनिया में झूठ बोलने के कई रिकॉर्ड बने होंगे, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने आज जो दावा किया है, उसने तो ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’ को भी शर्मसार कर दिया है। ट्रंप का कहना है कि सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद उन्हें ईरान का ‘सुप्रीम लीडर’ बनने का ऑफर मिला था! क्या आप सोच सकते हैं? जिस मुल्क को ट्रंप तबाह करने की कसमें खाते हैं, वही मुल्क उन्हें अपना रहनुमा बनाने चला था?
इस मज़ाक के पीछे एक खौफनाक हकीकत छिपी है। मिडिल ईस्ट के हालात अब उस मोड़ पर हैं जहाँ से तबाही का मंज़र साफ़ दिख रहा है। एक तरफ खर्ग आईलैंड पर अमेरिकी सैनिक उतारने की खबर से खाड़ी के देश ईरान से सहम गए हैं, तो दूसरी ओर सऊदी अरब समेत 6 मुस्लिम देशों ने ईरान को अल्टीमेटम दे दिया है। साथ ही, जंग के बीच रूस ने ईरान की ढाल बनने के लिए अपने सबसे घातक ड्रोन्स की खेप तेहरान भेजने की तैयारी कर ली है।
ईरान ने भी दो टूक कह दिया है— “ट्रंप साहब, आप अपनों को नहीं बचा पाए, हमें क्या खाक डराएंगे?” मंचों से सरेआम झूठ बोलने के लिए ट्रंप साहब चर्चित रहे हैं। पिछले चुनाव में कई बार उनके झूठ ‘फैक्ट चेक’ में पकड़े गए हैं, लेकिन उसके बाद भी वे शर्माने और अपनी आदत में सुधार करने के बजाय और बढ़-चढ़कर झूठ बोलते हैं। यही वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बातों को दुनिया अब गंभीरता से लेना छोड़ चुकी है, लेकिन उनका ताज़ा दावा कॉमेडी की सारी हदें पार कर गया है।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि खामेनेई के बाद ईरान के कुछ बड़े लोगों ने उनसे संपर्क किया और कहा कि वे ही ईरान को संभाल सकते हैं। ट्रंप साहब, जिस मुल्क की आवाम सुबह की शुरुआत ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारों से करती है, वो आपको अपना सुप्रीम लीडर बनाएगी? यह दावा सिर्फ और सिर्फ ट्रंप की उस हताशा को दिखाता है जिसमें वे खुद को दुनिया का सबसे बड़ा मसीहा साबित करना चाहते हैं। सच तो यह है कि ईरान ने ट्रंप की 15 शर्तों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया है, और इसी बेइज्जती को छिपाने के लिए ट्रंप अब ऐसी ‘खयाली पुलाव’ वाली कहानियाँ सुना रहे हैं।
हालांकि, इस जंग के बीच एक चौंकाने वाली खबर आई है। सऊदी अरब समेत 6 खाड़ी देशों ने ईरान को एक सख्त पैगाम भेजा है कि ‘हमले रोकें या अंजाम भुगतें’। सवाल यह है कि जो अरब मुल्क अब तक ईरान के साथ रिश्तों को सुधारने की बात कर रहे थे, अचानक वे इतने तल्ख क्यों हो गए? सऊदी अरब, कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और जॉर्डन ने संयुक्त रूप से खुला पत्र जारी कर ईरान और उसके ‘प्रॉक्सी’ समूहों द्वारा किए जा रहे हमलों की कड़ी भर्त्सना की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे अब इन हमलों को और बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इन देशों ने अपने संयुक्त बयान में स्पष्ट कहा कि ईरान द्वारा सीधे या उसके समर्थित सशस्त्र गुटों के माध्यम से किए गए हमले संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रतिकूल हैं। इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून, अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और क्षेत्रीय देशों की संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन बताया गया है।
खाड़ी देशों ने अपने पत्र में इराक के साथ अपने पुराने और मज़बूत संबंधों का हवाला देते हुए एक बड़ी मांग रखी है। उन्होंने कहा है कि इराक की ज़मीन से सक्रिय मिलिशिया और सशस्त्र समूहों द्वारा जो हमले किए जा रहे हैं, उन्हें फौरन बंद किया जाए। यह सीधे तौर पर उन गुटों की ओर इशारा है जिन्हें ईरान का समर्थन प्राप्त है। इन देशों ने इराक सरकार से अपील की है कि वह अपनी भूमि से ऐसे हमलों को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए, ताकि क्षेत्रीय संबंधों को बचाया जा सके और तनाव को बढ़ने से रोका जा सके।
इस पत्र की सबसे बड़ी बात ‘आत्मरक्षा के अधिकार’ का ज़िक्र है। इन 6 देशों ने साफ़ कर दिया है कि अगर हमले नहीं रुके, तो वे UN Charter के तहत अपनी सुरक्षा के लिए अकेले या फिर ‘सामूहिक’ रूप से जवाबी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और स्थिरता की रक्षा के लिए सभी ज़रूरी उपाय करने का उन्हें अधिकार है। इन देशों ने साफ़ संदेश दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है और किसी भी तरह की अस्थिरता या आतंकी गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
माना जा रहा है कि इसके पीछे वाशिंगटन का हाथ साफ़ नज़र आ रहा है। ट्रंप प्रशासन इन मुल्कों पर दबाव डाल रहा है कि वे ईरान की घेरेबंदी में अमेरिका का साथ दें। ट्रंप ने इन देशों को डराया है कि अगर ईरान की मिसाइलें उनके तेल कुओं पर गिरीं, तो अमेरिका उनकी रक्षा तभी करेगा जब वे ईरान के खिलाफ खुलकर खड़े होंगे। लेकिन ईरान ने भी इन देशों को आईना दिखा दिया है।
तेहरान ने कहा है कि “सऊदी अरब और बाकी मुल्क याद रखें, अमेरिका ने न कभी अपने दोस्तों की हिफाज़त की है और न कभी करेगा। वियतनाम से लेकर अफगानिस्तान तक, अमेरिका सिर्फ इस्तेमाल करना जानता है।” खाड़ी मुल्कों के डर की दूसरी बड़ी वजह यह है कि अमेरिका ईरान के खर्ग आईलैंड पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रहा है और वहां सेना उतारना चाहता है। अगर ऐसा करने में अमेरिका कामयाब हो गया, तो यह बात पूरी तरह साफ़ है कि ईरान खाड़ी मुल्कों के तेल कुओं और अमेरिका के ठिकानों पर हमला करेगा, जिससे क्षेत्र में बड़ा नुकसान होना तय है।
हालांकि, जहाँ एक ओर ट्रंप ने खाड़ी मुल्कों के ज़रिए ईरान को अल्टीमेटम दिलवाया है, वहीं दूसरी ओर ईरान के लिए सबसे बड़ी राहत मास्को से आई है। रूस अब ईरान को बड़ी तादाद में अपने सबसे आधुनिक और घातक ड्रोन्स भेजने की तैयारी में है। ये वो ड्रोन्स हैं जिन्होंने यूक्रेन के युद्ध में तबाही मचा रखी है। रूस के इस कदम ने अमेरिका और इज़राइल के डिफेंस सिस्टम, खासकर ‘आयरन डोम’ की चिंता बढ़ा दी है।
पुतिन ने साफ़ कर दिया है कि अगर ईरान पर कोई बड़ा हमला होता है, तो रूस खामोश नहीं रहेगा। रूस का यह ‘ड्रोन पावर’ ईरान की वायु सेना को वो ताकत देगा जिससे वह भूमध्य सागर से लेकर हिंद महासागर तक अमेरिका के हर जहाज़ को निशाना बना सकेगा। ट्रंप साहब, आप ईरान को अकेला करना चाहते थे, लेकिन आपने उसे रूस के और करीब धकेल दिया है।
ईरान के विदेश मंत्रालय ने उन 6 मुस्लिम देशों को जो जवाब दिया है, वह कूटनीति के इतिहास में दर्ज होगा। ईरान ने कहा है— “इज़राइल की हालत देख लीजिए, अमेरिका उसे अपनी सरज़मीं पर बचाने में नाकाम रहा है। हर दिन तेल अवीव पर मिसाइलें गिर रही हैं। जब ट्रंप अपने सबसे लाडले दोस्त नेतन्याहू को नहीं बचा पा रहे, तो वे सऊदी अरब या कुवैत की हिफाज़त कैसे करेंगे?”
ईरान की यह दलील बहुत मज़बूत है। पिछले 27 दिनों की जंग में अमेरिका ने इज़राइल को हर मुमकिन मदद दी, लेकिन फिर भी इज़राइल आज ‘कौवों के साये’ में जी रहा है। इज़राइल की अर्थव्यवस्था तबाह हो चुकी है और उसके लोग बंकरों में रहने को मजबूर हैं। ईरान ने अरब मुल्कों को चेतावनी दी है कि वे अमेरिका के ‘प्रॉक्सी’ (मोहरे) न बनें, वरना इस जंग की आग उन्हें भी झुलसा देगी।
इस पूरी कहानी का सूत्रधार वही शख्स है जो अपनी कुर्सी बचाने के लिए पूरी दुनिया को जलाने को तैयार है— बेंजामिन नेतन्याहू। नेतन्याहू को पता है कि अगर ट्रंप ने 28 मार्च को सीज़फायर का ऐलान कर दिया, तो इज़राइल के अंदर उनका राजनीतिक करियर खत्म हो जाएगा। इसलिए वे अरब मुल्कों को उकसा रहे हैं ताकि ईरान पर एक सामूहिक हमला किया जा सके। लेकिन ईरान ने भी बाब-अल-मंदेब और होर्मुज को बंद करने की जो धमकी दी है, उसने ट्रंप की कमर तोड़ दी है। ट्रंप एक तरफ ‘सुप्रीम लीडर’ बनने के ख्वाब देख रहे हैं, और दूसरी तरफ उनकी नौसेना ईरान के बारूदी जाल से डर रही है।
ट्रंप के दावे उनकी हताशा और अहंकार का मिश्रण हैं। ईरान कोई लीबिया नहीं है जिसे वे बातों से डरा देंगे। रूस का समर्थन, चीन की खामोश मदद और ईरान की अपनी मिसाइल ताकत ने अमेरिका को एक ऐसे चौराहे पर खड़ा कर दिया है जहाँ से हर रास्ता नुकसान की तरफ जाता है। 28 मार्च की तारीख करीब आ रही है, और दुनिया यह देखना चाहती है कि ट्रंप का यह ‘सुप्रीम लीडर’ वाला नाटक और कितनी दूर तक जाता है।



