टफ तमिलनाडु : स्टालिन के किले में बीजेपी का मिशन या मृगतृष्णा ?

  • घोषणापत्रों की जंग में डीएमके व एआईएडीएमके आमने-सामने
  • बीजेपी की तीसरी ताकत बनने की जिद
  • डीएमके का तोहफा महिलाओं को 8 हजार के कूपन
  • फाइनेंशियल मदद एक हजार से बढ़ाकर दो हजार करने का इरादा
  • जयललिता वाली एआईएडीएमके ने किया वोटर्स को फ्रि ज देने का वादा

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। तमिलनाडु की धरती पर एक बार फिर चुनावी रणभेरी बज चुकी है जहां शब्दों से ज्यादा इशारों में राजनीति होती है और नारों से ज्यादा पहचान का खेल चलता है। एक तरफ सत्ता पर काबिज डीएमके अपने कामकाज और वेलफेयर माडल के दम पर जनता का भरोसा बनाए रखने में जुटी है तो दूसरी ओर एआईएडीएमके अपने बिखरे कुनबे को जोड़कर वापसी की जद्दोजहद में है।
लेकिन इस बार तमिलनाडू की राजनीतिक कहानी में एक नया एंगल भी शामिल हो रहा है और वह है बीजेपी की तीसरी राजनीतिक ताकत बनने की जिद। बीजेपी न सिर्फ तमिलनाडू में राजनीतिक खेल खेलना चाहती है बल्कि खेल के नियम बदलने का दावा भी कर रही है। इस बार की राजनीतिक फिजा में भले ही चुनावी चौसर पर शाह और मात का नहीं बल्कि सांप और सीढ़ी का खेल ज्यादा दिखाई दे रहा है।

स्टालिन चमकने के लिए बेताब

तमिलनाडु की राजनीति का मौजूदा चेहरा एमके स्टालिन एक ऐसा नेता हैं जिसने विरासत को सिर्फ संभाला नहीं बल्कि उसे नए दौर के मुताबिक ढालने की कोशिश भी की। द्रविड़ राजनीति के दिग्गज एम करूणानिधी के बेटे होने के कारण स्टालिन को शुरुआत से ही सियासत का माहौल मिला लेकिन उन्होंने अपनी पहचान वंशवाद से आगे बढ़कर प्रशासनिक पकड़ के जरिए बनाई। स्टालिन का राजनीतिक सफर आसान नहीं रहा। पार्टी के भीतर लंबे समय तक खुद को साबित करने की चुनौती विपक्ष के हमले और जनता की उम्मीदों का दबाव इन सबके बीच उन्होंने धीरे धीरे संगठन और सरकार दोनों पर पकड़ मजबूत की। आज वे डीएमके के सबसे भरोसेमंद चेहरे बन चुके हैं। उनकी राजनीति की सबसे बड़ी ताकत है वेलफेयर माडल। महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार और गरीब वर्ग के लिए योजनाओं का विस्तार। इससे उन्होंने एक मजबूत प्रो पीपल छवि बनाई है। हालांकि आलोचक इसे फ्रीबी कल्चर कहकर राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का असर साफ दिखता है।

सियासी जंग में वादों की बारिश

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए सत्ताधारी डीएमके और विपक्षी एआईएडीएमके ने अपने अपने चुनावी घोषणा पत्र जारी किए हैं। घोषणा पत्र में डीएमके ने 2021 के चुनावों में 505 वादे किए थे लेकिन इस बार उसने अपने वादों की संख्या बढ़ाकर 525 कर दी है। वहीं दूसरी ओर सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही एआईएडीएमके ने कल्याणकारी योजनाओं और लक्षित सब्सिडी पर केंद्रित 297 वादे किए हैं। दोनों घोषणापत्रों का एक प्रमुख पहलू महिला केंद्रित योजनाओं पर जोर देना है। सीएम एम. के. स्टालिन ने घोषणा की है कि आयकर न देने वाले परिवारों की गृहिणियों को आवश्यक घरेलू उपकरण खरीदने या बदलने के लिए 8,000 रुपए के कूपन मिलेंगे। डीएमके ने महिलाओं के लिए मासिक वित्तीय सहायता को 1,000 रुपए से बढ़ाकर 2,000 रुपए करने का भी वादा किया है। एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने वादा किया है कि अगर पार्टी सरकार बनाती है तो राशन कार्ड धारकों को मुफ्त रेफ्रिजरेटर दिए जाएंगे। इसके अलावा कुला विलाक्कू योजना के तहत एआईएडीएमके ने सभी परिवार कार्ड धारकों के लिए 2,000 रुपए की सब्सिडी का प्रस्ताव रखा है जिसे वह राज्यभर के परिवारों के लिए प्रत्यक्ष लाभ के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

किसानों के लिए वादे

किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 3,500 रुपए प्रति क्विंटल और गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाकर 4,500 रुपए प्रति टन करने जैसे प्रमुख वादे भी किए गए हैं। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में स्टालिन ने बीमा पात्रता के लिए आय सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपए और कवरेज को 10 लाख रुपए करने का प्रस्ताव दिया है जबकि पलानीस्वामी ने हृदय शल्य चिकित्सा और कैंसर देखभाल जैसे प्रमुख उपचारों के लिए पूर्ण सरकारी वित्तपोषण का आश्वासन दिया है। दोनों दलों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कुछ पहलुओं के प्रति अपने विरोध को दोहराया है और तमिलनाडु के अधिकारों की रक्षा करने का संकल्प लिया है। उन्होंने शिक्षा को राज्य सूची में वापस लाने के लिए प्रयास करने का भी वादा किया है।

दोनों पार्टियों ने सामाजिक कल्याण में किए मिलते जुलते वादे

दोनों पार्टियों ने सामाजिक कल्याण क्षेत्र में मिलते जुलते वादे किए हैं। उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन को 1,200 रुपए से बढ़ाकर 2,000 रुपए करने और मछली पकडऩे पर प्रतिबंध से संबंधित राहत सहायता को 8,000 रुपए से बढ़ाकर 12,000 रुपए करने का आश्वासन दिया है। दिव्यांगजनों के लिए स्टालिन ने भत्ते को बढ़ाकर 2,500 रुपए करने का प्रस्ताव दिया है जबकि पलानीस्वामी ने इसे बढ़ाकर 2,000 रुपए करने की प्रतिबद्धता जताई है। शिक्षा क्षेत्र में डीएमके ने अगले पांच वर्षों में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे 35 लाख छात्रों को मुफ्त लैपटाप वितरित करने का संकल्प लिया है। एआईएडीएमके ने भी इसी तरह का प्रस्ताव रखा है जिसमें सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कालेजों में पढऩे वाले छात्रों को लैपटाप देने का वादा किया गया है। दोनों ही पार्टियों के घोषणापत्रों में आवास और ग्रामीण विकास को प्रमुखता दी गई है। डीएमके ने पांच साल के भीतर 10 लाख घर बनाने का संकल्प लिया है जबकि एआईएडीएमके ने अपनी अम्मा इल्लम योजना के तहत बेघर परिवारों को मुफ्त आवास देने का वादा किया है।

एआईएडीएमके की उलझन

एआईएडीएमके की सबसे बड़ी उलझन पोस्टर ब्वाय को लेकर है बिना पोस्टर ब्वाय के नैरेटिव बनने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कभी तमिलनाडु की राजनीति पर राज करने वाली एआईएडीएमके आज अपने ही सवालों में घिरी है। जे जयललिता के बाद पार्टी में वैसी करिश्माई लीडरशिप नहीं दिखी जो भीड़ को एकजुट कर सके। पार्टी के भीतर अंदरूनी कलह साफ दिखाई दे रही है। लीडरशिप का संकट और बीजेपी से दूरी यह वह दो मुख्य फैक्टर है जो एआईएडीएमके को कमजोर कर रहे हैं। हालांकि उसका पारंपरिक वोट बैंकऔर एंटी इंकम्बेंसी उसे पूरी तरह खत्म होने से बचा रहे हैं।

बीजेपी की उलझन

तमिलनाडु में भारतीय जनता पार्टी की सबसे बड़ी चुनौती है अपनी पहचान बनाना। तमिलनाडू में भाषा और संस्कृति का सवाल बहुत बड़ा है। यहां हिंदी बनाम तमिल का नैरेटिव जल्दी बनता है। हालंकि इस बार के चुनाव में बीजेपी ने रणनीति बदली है। बीजेपी इस बार लोकल चेहरों को आगे ला रही है और छोटे दलों से गठबंधन करके हिंदुत्व और विकास का काम्बो आफर पेश कर रही है। लेकिन दरहकीकत बीजेपी अभी भी यहां आउटसाइडर की छवि से जूझ रही है।

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