ईरान के हमले के बाद ट्रंप जंग से पीछे हटे, एक हमले ने उजागर किया पूरा सच

डोनाल्ड ट्रंप हर दिन कोई न कोई नाटक रच कर बतातें हैं कि वो वॉर जीत गए हैं और अब कोई अटैक नहीं होगा, लेकिन ईरान उनके सारी नाटकबाजी निकाल देता है।

4pm न्यूज नेटवर्क: जब से ट्रंप ने ईरान पर हमला बोला है उनके बुरे शुरू हो गए हैं। ईरान के हाथों मुंह की खाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप बस किसी तरह से चाहते हैं कि ये जंग खत्म हो जाए जिससे उनकी कम से कम फजीहत हो लेकिन ईरान है कि मानने को राज़ी नहीं है।

डोनाल्ड ट्रंप हर दिन कोई न कोई नाटक रच कर बतातें हैं कि वो वॉर जीत गए हैं और अब कोई अटैक नहीं होगा, लेकिन ईरान उनके सारी नाटकबाजी निकाल देता है।  ईरान के जोरदार पलटवार और अमेरिका भर में हुए प्रदर्शन के बाद ट्रंप की कुर्सा हिलने लगी है, जिसके बाद उन्होंने सफलता के बड़े दावे करते हुए जंग से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। वहीं इस बीच ईरान ने भी एकऐसा दावा किसा है जिससे अमेरिका को तगड़ा झटका लगा है। तो कैसे अब ट्रंप झूठ के सहारे इस जंग से भागते हुए दिखाई दे रह हैं और कैसे ईरान ने अमेरिका को तगड़ा झटका दिया है,

जब से जंग शुरू हुई है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इतने झूठे दावे कर चुके हैं कि अब उनकी बातों और बड़े बड़े दावों की कोई कीमत नहीं रह गई है। पहले कुछ दावा करते हैं फिर अगले ही घंटे उससे उलट बात कह डालते हैं।  ट्रंप के मुताबिक न जाने कितने दिनों से उनकी ईरान पर जीत पक्की हो चुकी है लेकिन ईरान दूसरा अटैक करके उनके दावों की पोल खोल देता है। अब डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिकी सेना ने ईरान में “कई वांछित लक्ष्यों” को नष्ट कर दिया है।

मिडिल ईस्ट संघर्ष को लेकर उन्होंने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा है, “ईरान के लिए बड़ा दिन। हमारी महान सेना, जो दुनिया की सबसे बेहतरीन और घातक सेना है, ने कई वांछित लक्ष्यों को नष्ट कर दिया है। भगवान आप सभी का भला करे!” ट्रंप का यह बयान फाइनेंशियल टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू के बाद आया है। उन्होंने एयर फ़ोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “ईरान में सत्ता परिवर्तन हो चुका है। हम ऐसे लोगों से निपट रहे हैं जिनसे पहले कभी कोई नहीं निपटा। ये बिल्कुल अलग तरह के लोग हैं।

इसलिए मैं इसे सत्ता परिवर्तन मानूंगा।” एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “मुझे ईरान को लेकर समझौता होने की उम्मीद है। यह जल्द ही हो सकता है।” इससे पहले फाइनेंशियल टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका “पसंदीदा विकल्प” ईरान का तेल लेना है। उन्होंने तेहरान के मुख्य तेल निर्यात केंद्र खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की संभावना का संकेत दिया था। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पूरे क्षेत्र को गहरे संकट में डाल दिया है और वैश्विक तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है।

इंटरव्यू में ट्रंप ने रविवार को कहा, “मेरा पसंदीदा काम ईरान का तेल लेना होगा।” उन्होंने वेनेजुएला का उदाहरण दिया, जहां निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद अमेरिका तेल क्षेत्र पर “अनिश्चितकाल” के लिए नियंत्रण रखने की योजना बना रहा है। ट्रंप ने आगे कहा, “ईमानदारी से कहूं तो मेरी फेवरेट चीज है ईरान का तेल लेना, लेकिन अमेरिका में कुछ बेवकूफ लोग कहते हैं- ‘तुम ये क्यों कर रहे हो?’ लेकिन वे बेवकूफ लोग हैं।” ट्रंप का इशारा नो किंग्स रैलियों की ओर था। जब एक महीने पहले अमेरिका ने ईरान पर हमला बोला था तो ट्रंप दावा कर रहे थे कि उनका मकसद ईरान में रिजीम चेंज करने का था। लेकिन फिर कुछ दिन बाद दावा किया गया कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए हमला किया गया है।

फिर जब सवाल उठने लगे कि आखिर क्यों अमेरिका ने इजराइल के कहने पर अमेरिका ने ईरान पर हमला बोल दिया तो बड़ा अजीब सा बयान आया कि ईरान हमला करने वाला था इसलिए अमेरिका ने हमला कर दिया। लेकिन  ट्रंप ने सारे दावों को झूठा बताते हुए अपना मकसद साफ कर दिया कि उनका मकसद सिर्फ अपना फायदा देखना था। उनकी नजर शुरू से ही ईरान के तेल भंडार पर थी।  ट्रंप के इस बयान के बाद एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार को 116 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।

खार्ग द्वीप ईरान का सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र है, जिसके जरिए ईरान के अधिकांश तेल निर्यात किए जाते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के तेल पर कब्जे का कोई भी कदम खार्ग द्वीप पर कब्जा करने से जुड़ा होगा। उन्होंने कहा, “शायद हम खार्ग द्वीप ले लें, शायद न लें। हमारे पास बहुत सारे विकल्प हैं।”

जहां अखबार को दिए गए इंटरव्यू में ट्रंप शेखी बघार रहे हैं और ऐसे बता रहे हैं जैसे सब उनके हिसाब से हो रहा है वहीं ईरान ऐसी ऐसी विडियोज सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं जो ट्रंप के सभी दावों की पाल पट्टी खोल कर रख दे रही हैं। ऐसा ही एक वीडियो ईरान की तरफ से जारी किया गया जिसमें अमेरिका के AWACS विमान पूरी तरह से तबाह होता हुआ दिखाई दिया। इस वीडियो को शेयर कर दावा किया गया कि अमेरिका का जो एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम यानी AWACS दुश्मन सेनाओं का दूर से ही पता लगा लेता है उसके विमान को ईरान ने ध्वस्त कर दिया है।

ईरान ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमला करके अमेरिकी सेना का एक अत्याधुनिक E-3 सेंट्री AWACS विमान को भारी नुकसान पहुंचाया है। कुछ रिपोर्टों में इसे पूरी तरह नष्ट बताया गया है। हालाँकि, अमेरिका की तरफ़ से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इस विमान के नुक़सान से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की हवाई निगरानी और युद्ध नियंत्रण क्षमता पर असर पड़ सकता है। जानकारों का कहना है कि यह अमेरिकी एयर सुपीरियॉरिटी को बड़ा झटका है। यह घटना शनिवार की है। ईरान ने इस एयर बेस पर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें और 29 ड्रोन दागे थे।

ईरानी मीडिया प्रेस टीवी ने बताया कि इस हमले में AWACS विमान नष्ट हो गया और 12 से 15 अमेरिकी सैनिक घायल हुए, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है। सोशल मीडिया पर विमान के मलबे की तस्वीरें भी वायरल हुई। अमेरिकी सेना की ओर से अभी तक इस हमले या नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स और तस्वीरों से यह बात सामने आ रही है कि विमान को काफी नुकसान पहुंचा है। बेस पर रिफ्यूलिंग टैंकर विमान भी क्षतिग्रस्त हुए। अमेरिका के लिए AWACS विमान क्यों इतना अहम है,  E-3 सेंट्री AWACS को ‘उड़ता हुआ रडार’ भी कहा जाता है।

यह विमान सैकड़ों किलोमीटर दूर से दुश्मन के विमान, मिसाइल और ड्रोन को पहचान सकता है और ट्रैक कर सकता है। यह युद्ध के मैदान की पूरी तस्वीर रीयल टाइम में कमांड सेंटर को देता है। लड़ाकू विमानों और जमीनी सेना को सपोर्ट देता है। यह पुराना लेकिन बहुत कीमती विमान है। यही वजह है कि इसके नष्ट हो जाने से अमेरिका को गहरा झटका लगा है। वहीं प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर हमले की बात करें तो इस बेस को ईरान पहले भी निशाना बना चुका है। यह एयर बेस रियाद से करीब 96 किलोमीटर दूर है।

पिछले हफ्ते भी यहां दो बार हमले हुए थे, जिनमें 14 अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे। इस हफ्ते कुल 24 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं। युद्ध शुरू होने से अब तक 300 से ज़्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं और कम से कम 13 की मौत हो चुकी है। ईरान कहता है कि अमेरिकी और इसराइली ठिकाने उसके वैध लक्ष्य हैं। इस हमले के साथ-साथ ईरान ने सऊदी अरामको की रस तनुरा रिफाइनरी और यनबू पोर्ट की रिफाइनरी को भी निशाना बनाया। इसका मक़सद खाड़ी क्षेत्र से तेल आपूर्ति बाधित करना था।

आखिरकार इस पूरे घटनाक्रम को देखें तो साफ नजर आता है कि हालात ट्रंप के दावों से बिल्कुल उलट दिशा में जा रहे हैं। एक तरफ जहां डोनाल्ड ट्रंप लगातार जीत के दावे कर रहे हैं, वहीं जमीन पर तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। ईरान लगातार पलटवार कर अमेरिका को चुनौती दे रहा है और उसके हर दावे की हवा निकाल रहा है। AWACS जैसे अहम सैन्य संसाधनों को नुकसान पहुंचने की खबरें अगर सच साबित होती हैं, तो यह अमेरिका के लिए बड़ा झटका है, जिसे छिपाना आसान नहीं होगा।

सबसे बड़ी बात यह है कि ट्रंप के बयानों में लगातार बदलाव उनकी रणनीति पर सवाल खड़े कर रहा है। कभी रिजीम चेंज, कभी परमाणु खतरा, और अब खुलकर तेल पर कब्जे की बात — यह साफ दिखाता है कि असली मकसद क्या था। दूसरी ओर, ईरान न सिर्फ सैन्य स्तर पर जवाब दे रहा है बल्कि मनोवैज्ञानिक और प्रचार युद्ध में भी बढ़त बनाता दिख रहा है। अब स्थिति ऐसी बनती जा रही है जहां ट्रंप के लिए इस जंग से बाहर निकलना मजबूरी बन सकता है, लेकिन बिना नुकसान के निकल पाना मुश्किल दिख रहा है। यही वजह है कि दावों और हकीकत के बीच का फर्क अब दुनिया के सामने खुलकर आ रहा है।

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