रुपया गिरे या बीजेपी की इज्जत गिरे? अखिलेश ने बीजेपी पर कसा तीखा तंज
यूपी में योगी राज में जो हो जाए वही कम है। झूठे दावे करने वाली बीजेपी सरकार सवालों के घेरे में है। विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। लेकिन सत्ता के नशे में चूर भाजपाइयों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।

4pm न्यूज नेटवर्क: यूपी में योगी राज में जो हो जाए वही कम है। झूठे दावे करने वाली बीजेपी सरकार सवालों के घेरे में है। विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। लेकिन सत्ता के नशे में चूर भाजपाइयों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।
इसी बीच सपा मुखिया अखिलेश यादव ने बीजेपी पर जोरदार हमला बोला है। दरअसल अखिलेश ने
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में आई गिरावट के लिए बीजेपी पर निशाना साधा और कहा कि दोनों में गिरने के मामले में मुकाबला चल रहा है. उन्होंने कहा कि गिरने के मामले में भारतीय रुपये और भाजपा की छवि के बीच जबरदस्त मुकाबला चल रहा है। मतलब साफ है कि रुपया तेजी से कमजोर हो रहा है और साथ ही भाजपा की इमेज भी नीचे गिर रही है। दोनों एक-दूसरे से आगे निकलने की कोशिश में लगे हैं। यह बयान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जब रुपया डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर से नीचे चला गया।
यह बयान सिर्फ मजाक नहीं है। असल में यह भाजपा की पूरी नीतियों पर हमला है। अखिलेश यादव कहते हैं कि जैसे-जैसे भाजपा के नेताओं के कांड और भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, वैसे-वैसे पार्टी की छवि और गिर रही है। लोग अब भाजपा को भरोसे की नजर से नहीं देख रहे। पहले भाजपा खुद को साफ-सुथरी और ईमानदार पार्टी बताती थी, लेकिन अब रोज नए-नए घोटालों और गलत कामों के खुलासे हो रहे हैं।
इस्तीफे तो कोई देता नहीं, बल्कि आरोपों को दबाने की कोशिश होती है। इससे साफ जाहिर होता है कि भाजपा में नैतिकता पूरी तरह खत्म हो चुकी है।रुपये की गिरावट भी भाजपा सरकार की नाकामी को दिखाती है। केंद्र में भाजपा की सरकार सालों से चला रही है, लेकिन अर्थव्यवस्था की हालत खराब होती जा रही है। रुपया कमजोर होने से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। महंगाई आसमान छू रही है, पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और जरूरी चीजों के दाम बढ़ रहे हैं। किसान, मजदूर और छोटे व्यापारी परेशान हैं। बेरोजगारी भी चरम पर है। युवा नौकरियां नहीं पा रहे, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो गया है।
भाजपा बड़े-बड़े दावे करती है कि देश तरक्की कर रहा है, लेकिन हकीकत में गरीब और मध्यम वर्ग की हालत बद से बदतर हो रही है।अखिलेश यादव का आरोप है कि भाजपा के लोग अपने कुकर्मों को छिपाने में लगे हैं। भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं, लेकिन कोई जिम्मेदारी नहीं लेता। पार्टी के अंदर नैतिक दिवालियापन इतना बढ़ गया है कि अब यह पराकाष्ठा पर पहुंच चुका है। उत्तर प्रदेश में भी योगी सरकार पर यही आरोप लगते हैं।
कानून व्यवस्था खराब बताई जाती है, थानों में लूट की शिकायतें आती हैं, और विकास के नाम पर सिर्फ प्रचार होता है। अखिलेश यादव कहते हैं कि भाजपा जहां भी सत्ता में है, वहां लोगों को परेशानी ही मिल रही है।भाजपा की छवि गिरने का एक बड़ा कारण उसके अपने नेता और सहयोगियों के खुलासे हैं। कई मामलों में भ्रष्टाचार, साजिश और गलत नीतियों के आरोप लगते रहते हैं। फिर भी कोई इस्तीफा नहीं देता। इससे आम जनता में गुस्सा बढ़ रहा है। लोग सोच रहे हैं कि अगर सत्ता में रहने वाले ही इतने भ्रष्ट हैं, तो देश कैसे आगे बढ़ेगा?
अखिलेश यादव इस मुद्दे को उठाकर भाजपा को घेर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रुपया गिर रहा है तो अर्थव्यवस्था की कमजोरी दिखती है, और भाजपा की छवि गिर रही है तो उसकी नैतिक कमजोरी सामने आ रही है।उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह बयान खास महत्व रखता है। 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी को मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं। वे PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के फॉर्मूले पर जोर दे रहे हैं। उनका कहना है कि भाजपा की सरकार ने इन वर्गों को नजरअंदाज किया है।
महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दों पर हमला करके वे जनता का ध्यान अपनी तरफ खींचना चाहते हैं। दादरी जैसी रैलियों में भी वे भाजपा पर तंज कसते हैं।भाजपा की आर्थिक नीतियां भी आलोचना का शिकार हैं। अखिलेश यादव पहले भी कह चुके हैं कि रुपया गिरने से साबित होता है कि सरकार की आंकड़े झूठे हैं। वे दावा करते हैं कि भाजपा की सो-कॉल्ड विकास की कहानी फेल हो चुकी है। आम आदमी को रोज की जिंदगी में महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। छोटे कारोबार बंद हो रहे हैं, किसानों की आय नहीं बढ़ रही।
केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकारें प्रचार पर ज्यादा जोर दे रही हैं, असली समस्याओं को नजरअंदाज कर रही हैं।इस बयान से राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। अखिलेश यादव का तंज भाजपा को परेशान कर रहा है। वे लगातार योगी सरकार और मोदी सरकार दोनों पर हमले कर रहे हैं।
उनका फोकस 2027 के चुनाव पर है, जहां वे भाजपा को सत्ता से बाहर करने का दावा कर रहे हैं। जनता अब फैसला करेगी कि कौन सी पार्टी असली मुद्दों पर काम कर रही है। खैर यह कोई पहला मौका नहीं है जब अखिलेश ने बीजेपी को घेरा हो।



