ईरानी राष्ट्रपति ने अमेरिका को घेरा, बदले तेवर से बढ़ी टेंशन
ट्रंप साहब की आदत है कि वे हवा में महल बनाते हैं। कल उन्होंने दावा किया था कि पजशकियान 'कम कट्टर' हैं और सीज़फायर की गुहार लगा रहे हैं।

4pm न्यूज नेटवर्क: कल तक जो डोनाल्ड ट्रंप सीना ठोककर दावा कर रहे थे कि ईरान के नए राष्ट्रपति मसूद पजशकियान उनके दोस्त बन चुके हैं और ईरान की सरकार दो-फाड़ हो चुकी है, आज उसी राष्ट्रपति पजशकियान ने ट्रंप के मुँह पर तमाचा जड़ते हुए ऐसे सवाल दागे हैं कि व्हाइट हाउस में सन्नाटा पसर गया है।
लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट यह है कि सुपरपावर रूस की इस जंग में एंट्री हो गई है! व्लादिमीर पुतिन ने साफ़ कह दिया है कि अगर शांति चाहिए, तो रूस मदद के लिए तैयार है। उधर ईरान ने दहाड़ते हुए कह दिया है कि— “अमेरिका हमारे एडवांस हथियारों की परछाईं तक नहीं छू पाया है!” क्या ट्रंप का ‘महा-डील’ वाला सपना चकनाचूर हो गया है? क्या नेतन्याहू की ज़िद अब इज़राइल को ही ले डूबेगी?
ट्रंप साहब की आदत है कि वे हवा में महल बनाते हैं। कल उन्होंने दावा किया था कि पजशकियान ‘कम कट्टर’ हैं और सीज़फायर की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन आज ईरानी राष्ट्रपति ने साफ़ कर दिया कि ईरान किसी के सामने गिड़गिड़ा नहीं रहा है। पजशकियान ने अमेरिका से सीधा सवाल किया— “जब आप हमारी सरज़मीं पर बम बरसा रहे हैं, तो किस मुँह से शांति की बात करते हैं?” पजशकियान का यह पत्र ईरान के ‘प्रेस टीवी’ के ज़रिए सामने आया है। इस खत में उन्होंने ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति पर कड़े सवाल उठाए और पूछा कि क्या यह नीति वाकई अमेरिकी अवाम के हितों में है?
राष्ट्रपति पजशकियान ने लिखा कि— “अमेरिकी लोगों का कौन सा हित इस युद्ध से पूरा हो रहा है? क्या मासूम बच्चों का कत्लेआम, कैंसर की दवा बनाने वाली कंपनियों की तबाही, या किसी देश को ‘पत्थर युग’ में भेजने की डींगें हांकना अमेरिका की साख बढ़ाने का काम कर रहा है?” ईरान ने साफ़ लफ़्ज़ों में कह दिया है कि वे जंग, बातचीत और सीज़फायर के उस पुराने चक्र में नहीं फंसेंगे जिसे अमेरिका सिर्फ अपनी सहूलियत के लिए इस्तेमाल करता है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी फौजें पीछे नहीं हटाता और सुरक्षा की लिखित गारंटी नहीं देता, तब तक कोई समझौता मुमकिन नहीं है।
इस महाजंग के बीच आज की सबसे बड़ी खबर यह है कि रूस और मिस्र के बीच आज एक अहम बैठक होने जा रही है। व्लादिमीर पुतिन ने इस जंग में ‘शांतिदूत’ बनकर कदम रखा है। पुतिन जानते हैं कि अगर यह जंग और खिंची, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी। रूस ने पेशकश की है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता (Mediation) करने को तैयार है। लेकिन पुतिन की यह ‘शांति’ ट्रंप के लिए किसी झटके से कम नहीं है। क्योंकि अगर रूस इस जंग को रुकवाता है, तो दुनिया में अमेरिका की साख मिट्टी में मिल जाएगी। यह साबित हो जाएगा कि ट्रंप सिर्फ आग लगा सकते हैं, उसे बुझाना पुतिन के ही बस की बात है। नेतन्याहू इस बात से बुरी तरह बौखलाए हुए हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि रूस की एंट्री उनके ‘ग्रेटर इज़राइल’ के सपने को दफन कर देगी।
रूस के बाद अब चीन भी खुलकर सामने आ गया है। ईरान युद्ध को लेकर चीन ने सभी पक्षों से तुरंत युद्धविराम की अपील की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि सैन्य कार्रवाई से किसी मसले का हल नहीं निकल सकता। माओ निंग ने चेतावनी दी कि संघर्ष को बढ़ाना किसी के हित में नहीं है और होर्मुज स्ट्रेट में जारी तनाव की असल जड़ ‘गैरकानूनी सैन्य कार्रवाई’ है, जो वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। चीन ने कहा कि सभी देशों को संयम बरतते हुए बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए।
आज सुबह ही ट्रंप दावा कर रहे थे कि उन्होंने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खत्म कर दी है। लेकिन ईरान के रक्षा मंत्रालय ने आज जो बयान जारी किया है, उसने पेंटागन की रातों की नींद हराम कर दी है। ईरान ने कहा है कि अमेरिका की पूरी ताकत और हज़ारों टन बारूद के बावजूद, वे हमारे एडवांस हथियारों और ‘अंडरग्राउंड मिसाइल सिटीज़’ को छू भी नहीं पाए हैं। ईरान ने चेतावनी दी है कि दुश्मन की हर हरकत पर उनकी नज़र है। अगर अमेरिका या इज़राइल ने ज़मीनी हमला करने की हिमाकत की, तो उनकी फौजें बचकर वापस नहीं जा पाएंगी। ईरान का कहना है कि ट्रंप साहब, उन 12 जेट्स को यूके बेस पर उतारकर आप किसे डरा रहे हैं? ईरान तो आपके ‘सरप्राइज’ का इंतज़ार कर रहा है।
ईरान की सेना के एयरस्पेस फोर्स के कमांडर माजिद मौसवी ने अमेरिका को सख्त लहज़े में चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि जो लोग ईरान को धमकी दे रहे हैं, वे असल में अपने ही सैनिकों को मौत की तरफ धकेल रहे हैं। माजिद मौसवी ने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि ईरान को ‘स्टोन एज’ में भेजने की बात सिर्फ एक खयाली पुलाव है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा— “शायद हॉलीवुड ने आपके दिमाग में भ्रम पैदा कर दिया है। अमेरिका सिर्फ 250 साल पुराना देश है, जबकि ईरान की सभ्यता 6,000 साल पुरानी है।” ईरान की मिलिट्री यूनिट IRGC ने साफ़ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह उनके कंट्रोल में है और यह अमेरिकी राष्ट्रपति की बेतुकी बातों से नहीं खुलेगा।
वैसे इस पूरी खूनी बिसात के असली विलेन नेतन्याहू ही हैं। नेतन्याहू अब ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं कि वे रूस की शांति वार्ता को ठुकरा दें। हालांकि ईरान का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि नेतन्याहू ने अपने ‘ग्रेटर इज़राइल’ के सपने के लिए खुद इज़राइल को खतरे में डाल दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि इज़राइल की गलत ‘कैलकुलेशन’ की वजह से अमेरिका इस युद्ध में फंसा है। बघाई ने यह भी साफ़ किया कि ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई पूरी तरह स्वस्थ हैं और सुरक्षा कारणों से सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि ईरान की जनता अब अमेरिका के साथ किसी भी तरह के ‘धोखेबाज़’ समझौते के पक्ष में नहीं है।
एक तरफ मासूमों का खून बह रहा है, तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, और दूसरी तरफ ये ट्रंप और नेतन्याहू सिर्फ अपनी साख बचाने के लिए झूठ पर झूठ बोले जा रहे हैं। क्या दुनिया इन दोनों के इस ‘पावर गेम’ को और बर्दाश्त करेगी? जब ब्रिटेन जैसे अपने ही पुराने साथी हाथ छुड़ा रहे हैं, तो समझ लीजिए कि इनका अंत करीब है।



