होर्मुज जलसंधि को खुलने नहीं देंगे रूस और चीन, यूएन में वीटो कर बिगाड़ा खेल

अमेरिका दुनिया भर में लोकतंत्र का ढिंढोरा पीटता है, आज उसी की सेना के अंदर 'गृहयुद्ध' जैसे हालात हैं। ट्रंप भले ही दावा कर रहे हों कि ईरान में उन्होंने तख्तापलट कर दिया है,

4पीएम न्यूज नेटवर्क: ईरान से पंगा लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप न सिर्फ जंग में बुरी तरह फंस गए हैं, बल्कि व्हाइट हाउस में इस वक्त कोहराम मचा हुआ है।  पूरी दुनिया के डिफेंस एक्सपर्ट्स के होश उड़ गए हैं— अमेरिकी सेना में रातों-रात एक बड़ा विद्रोह हुआ है! और इस बगावत को दबाने के लिए ट्रंप ने अपने ही सेना प्रमुख, यानी चीफ ऑफ स्टाफ जनरल रैंडी जॉर्ज को पद से हटा दिया है।

लेकिन बात सिर्फ एक जनरल की नहीं है, खबर तो यहाँ तक है कि ट्रंप अब अपने सबसे खास सिपहसालारों, जिनमें काश पटेल का नाम भी शामिल है, उन पर ‘हंटर’ चलाने की तैयारी कर रहे हैं। एक ओर जहाँ ट्रंप अमेरिका के अंदर ही बुरी तरह घिरे हैं, तो दूसरी ओर होर्मुज स्ट्रेट पर सैन्य कार्रवाई को लेकर रूस और चीन संयुक्त राष्ट्र (UN) में वो ‘वीटो’ ठोकने की तैयारी में हैं, जिससे ट्रंप का पूरा खेल ही बिगड़ गया है। क्या ट्रंप अपनी ही फौज के सामने हार चुके हैं? क्या नाटो देश अब खुल्लम-खुल्ला अमेरिका के खिलाफ हो गए हैं? क्यों रातों-रात जनरल रैंडी जॉर्ज को हटाया गया और कैसे होर्मुज के लिए रूस-चीन वीटो करने जा रहे हैं,

अमेरिका दुनिया भर में लोकतंत्र का ढिंढोरा पीटता है, आज उसी की सेना के अंदर ‘गृहयुद्ध’ जैसे हालात हैं। ट्रंप भले ही दावा कर रहे हों कि ईरान में उन्होंने तख्तापलट कर दिया है, लेकिन अब जो खबरें आ रही हैं, वे अमेरिकी सेना में गहरे विद्रोह की गवाही दे रही हैं। खबर पक्की है कि जनरल रैंडी जॉर्ज और डोनाल्ड ट्रंप के बीच ईरान जंग को लेकर ज़बरदस्त टकराव हुआ।

जनरल जॉर्ज का मानना था कि बिना किसी ठोस रणनीति के अमेरिकी सैनिकों को ईरान की ‘मौत की भट्ठी’ में झोंकना एक बड़ी ऐतिहासिक गलती है। जब जनरल ने ट्रंप के अंधाधुंध हमलों के आदेश पर सवाल उठाए, तो ट्रंप ने उन्हें रातों-रात पद से रुखसत कर दिया। लेकिन यह सिर्फ एक जनरल की विदाई नहीं है, यह अमेरिकी फौज के उस गुस्से का इज़हार है जो अब फूटने लगा है। हर दिन अमेरिकी सैनिकों की लाशें घर पहुँच रही हैं और ट्रंप साहब सिर्फ अपनी ‘ईगो’ की खातिर इस खूनी खेल को जारी रखना चाहते हैं।

जनरल रैंडी जॉर्ज को बिना कोई कारण बताए तुरंत पद छोड़ने के लिए कहा गया, जबकि उनका रिटायरमेंट अगले साल होना था। उनकी जगह जनरल ला नीव को नियुक्त किया गया है, जो इस पद से पहले रक्षा मंत्री हेगसेथ के निजी सैन्य सहायक के रूप में काम कर रहे थे।

हेगसेथ के नेतृत्व में हटाए गए वरिष्ठ सैन्य नेताओं की सूची अब चौंका देने वाली है। ज्वाइंट चीफ्स के चेयरमैन, नौसेना प्रमुख, वायु सेना के चीफ ऑफ स्टाफ, रक्षा खुफिया प्रमुख, और अब सेना के चीफ ऑफ स्टाफ—सबको किनारे लगा दिया गया है। यह सब ऐसे समय हो रहा है जब 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक सक्रिय युद्ध क्षेत्र में तैनात हैं।

पेंटागन ईरान में जमीनी अभियान (Ground Operation) की योजना बना रहा है। जंग के बीच जनरलों को बर्खास्त करना पहले केवल युद्धक्षेत्र की नाकामियों के लिए होता था, लेकिन यह मामला कुछ और ही है। संकेत साफ हैं कि अमेरिकी सेना का एक बड़ा हिस्सा ट्रंप की ईरान नीति के खिलाफ है। पेंटागन ने पुष्टि की है कि रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के कहने पर ही जनरल रैंडी जॉर्ज को हटाया गया है। पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल ने बयान जारी कर कहा कि जनरल रैंडी जॉर्ज तुरंत प्रभाव से रिटायर हो रहे हैं।

अमेरिका में अब यह चर्चा आम है कि जो व्यक्ति रक्षा सचिव हेगसेथ का ‘ब्रीफकेस’ उठाता था, अब वह पूरी सेना की कमान संभाल रहा है। कहा जा रहा है कि जनरल जॉर्ज ने बिजली संयंत्रों पर हमले और खार्ग द्वीप पर छापे मारने जैसे फैसलों का कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद उनकी छुट्टी कर दी गई।

ट्रंप की फितरत रही है कि जब भी वे फेल होते हैं, तो इसका ठीकरा अपने वफादारों पर फोड़ देते हैं। ईरान जंग में बुरी तरह फंसने के बाद अब ट्रंप का गुस्सा उनके अपनों पर ही निकल रहा है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का दावा है कि काश पटेल समेत तीन बड़े अधिकारियों पर कभी भी गाज़ गिर सकती है।

ट्रंप को लगता है कि इन लोगों ने उन्हें ईरान की ताकत का गलत अंदाज़ा दिया। लेकिन हकीकत यह है कि ट्रंप किसी की सुनते ही नहीं हैं। वे सिर्फ अपनी साख बचाने के लिए अपनों की बलि दे रहे हैं। नेतन्याहू के दबाव में आकर ट्रंप ने जो दलदल खोदा था, अब वे खुद उसमें धंस रहे हैं। क्या काश पटेल की छुट्टी ट्रंप की डूबती नैया को बचा पाएगी? शायद नहीं! क्योंकि होर्मुज बंद होने से पूरी दुनिया आर्थिक मंदी के मुहाने पर खड़ी है और ट्रंप अब दुनिया की नज़र में एक ‘खलनायक’ बन चुके हैं। ट्रंप की लोकप्रियता का ग्राफ 36 प्रतिशत से भी नीचे गिर चुका है और सेना के अफसर भी अब विद्रोह पर आमादा हैं।

एक ओर जहाँ ट्रंप घर में घिरे हैं, तो दूसरी ओर होर्मुज के मुद्दे पर ईरान के साथ रूस और चीन डटकर खड़े हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) बहरीन के उस प्रस्ताव पर मतदान करने वाली थी, जिसका मकसद होर्मुज के पास सैन्य पहरा बिठाना है। लेकिन वीटो शक्ति रखने वाले चीन ने साफ़ कर दिया कि वह बल प्रयोग वाले किसी भी प्रस्ताव को वीटो कर देगा। रूस ने भी ईरान का खुलकर साथ दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि फ्रांस ने भी इस पर एतराज जताया है, जबकि वह खुद नाटो का हिस्सा है।

ईरान पर हमलों के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक महीने से ज़्यादा खिंच चुका है, जिससे होर्मुज में जहाजों की आवाजाही ठप है और तेल की कीमतों में आग लगी हुई है। चीन के विदेश मंत्रालय ने तो यहाँ तक कह दिया कि होर्मुज के संकट की असली वजह इज़राइल और अमेरिका की ‘अवैध एयरस्ट्राइक’ है। बहरीन ने सुरक्षा के नाम पर जो प्रस्ताव रखा था, रूस और चीन की आपत्तियों के बाद उसे कमज़ोर करना पड़ा। चीन के यूएन दूत फू कॉन्ग ने साफ़ चेतावनी दी कि बल प्रयोग से हालात और बिगड़ेंगे।

कूटनीति के मोर्चे पर ट्रंप को यह सबसे करारा झटका लगा है। रूस और चीन की जुगलबंदी ने ट्रंप के उस सपने को चकनाचूर कर दिया है जिसमें वे दुनिया की ‘लाइफलाइन’ पर कब्ज़ा करना चाहते थे। नतीजा यह हुआ कि वोटिंग टल गई है और अब फैसला शनिवार को होगा। ट्रंप अब अपनों और बेगानों, दोनों के निशाने पर हैं। एक तरफ फौज की बगावत है, तो दूसरी तरफ रूस-चीन की दीवार। नेतन्याहू की ज़िद ने इज़राइल को तो खतरे में डाला ही था, अब ट्रंप की कुर्सी भी डोल रही है।

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