Dubai में फोटो शेयर करना पड़ा भारी, एयरस्ट्राइक तस्वीर भेजते ही ब्रिटिश क्रू मेंबर गिरफ्तार

दुबई में एक ब्रिटिश क्रू मेंबर को एयरस्ट्राइक से जुड़ी तस्वीर शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः दुबई दुनिया को हमेशा से सबसे सुरक्षित, चमकदार.. और शांत शहर के रूप में दिखाता रहा है.. लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग ने इस छवि को हिला दिया है.. 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई इस जंग में ईरान ने गल्फ देशों पर भी जवाबी हमले किए.. दुबई और अबू धाबी के पास ड्रोन और मिसाइल हमले हुए.. दुबई एयरपोर्ट पर भी असर पड़ा.. उड़ानें रुकीं, लोग घबराए..

इसी बीच एक छोटी सी तस्वीर ने एक 25 साल के ब्रिटिश फ्लाइट अटेंडेंट को बड़ी मुसीबत में डाल दिया.. उसने दुबई एयरपोर्ट के पास हुए ड्रोन स्ट्राइक की क्षति की एक फोटो ली.. और अपने सहकर्मियों के निजी व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर कर दी.. और सिर्फ इतना पूछा था कि क्या एयरपोर्ट से गुजरना सुरक्षित है.. लेकिन यही फोटो उसके लिए जेल की सजा बन गई.. UAE पुलिस ने उसका फोन चेक किया.. फोटो मिली और उसे साइबर क्राइम कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया.. अब उसे दो साल तक जेल.. और करीब 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है..

वहीं यह मामला अकेला नहीं है.. गल्फ न्यूज और डेली मेल की रिपोर्ट्स के मुताबिक.. 18 मार्च 2026 तक सिर्फ एक कार्रवाई में कम से कम 35 लोगों को हिरासत में लिया गया.. कुल मिलाकर 70 से ज्यादा ब्रिटिश नागरिक.. टूरिस्ट, एक्सपैट और केबिन क्रू—इस चपेट में आए हैं.. एक 60 साल के ब्रिटिश पर्यटक को भी एयरस्ट्राइक की तस्वीर लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया.. भले ही उसने तुरंत फोटो डिलीट कर दी थी..

आपको बता दें कि UAE सरकार का साफ कहना है कि संकट के समय कोई भी ऐसा कंटेंट शेयर करना.. जो सार्वजनिक सुरक्षा को प्रभावित करे या घबराहट फैलाए, अपराध है.. डिटेन्ड इन दुबई नाम की संस्था के मुताबिक.. 21 लोगों पर एक साथ साइबर क्राइम कानूनों के तहत आरोप लगाए गए हैं.. इनमें कई ऐसे हैं जिन्होंने सिर्फ फॉरवर्ड किया था या ग्रुप में भेजा था..

7 मार्च 2026 को ईरान के ड्रोन ने दुबई एयरपोर्ट के पास हमला किया.. उड़ानें अस्थायी रूप से रोकी गईं.. एयरपोर्ट के कुछ हिस्से क्षतिग्रस्त हुए.. 25 साल का यह ब्रिटिश युवक एक लोकल एयरलाइन में काम करता था.. वह सुरक्षा को लेकर चिंतित था.. एयरलाइन ने स्थिति को ज्यादा खतरनाक नहीं बताया था.. लेकिन उसने अपनी आंखों से देखी क्षति की फोटो ली.. और सहकर्मियों के प्राइवेट व्हाट्सएप ग्रुप में भेज दी.. और सिर्फ यही पूछा कि क्या यहां से गुजरना सुरक्षित है..

जिसके कुछ घंटों बाद पुलिस ने उसे रोक लिया.. फोन चेक किया, फोटो मिल गई.. और तुरंत गिरफ्तार कर लिया.. UAE के सख्त साइबर क्राइम कानून (फेडरल डिक्री लॉ नंबर 34 ऑफ 2021) के तहत केस दर्ज किया गया.. इस कानून के मुताबिक, कोई भी सामग्री जो राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है.. उसे शेयर करना जुर्म है.. जिसके लिए 2 साल जेल और 5 लाख दिरहम (करीब 1.15 करोड़ रुपये) तक जुर्माना हो सकता है..

दुबई अपनी सुरक्षित शहर वाली ब्रांडिंग पर बहुत गर्व करता है.. यहां हर साल करोड़ों टूरिस्ट आते हैं.. रियल एस्टेट, पर्यटन, शॉपिंग और एयरपोर्ट बिजनेस पर पूरा शहर टिका है.. जंग के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं, पर्यटन घटा.. और उड़ानें प्रभावित हुईं.. अगर लोग सोशल मीडिया पर ड्रोन हमलों की तस्वीरें-वीडियो शेयर करें तो घबराहट फैल सकती है.. विदेशी निवेशक डर सकते हैं.. इसलिए सरकार ने सख्ती बरती..

अटॉर्नी जनरल ने 10–35 लोगों की गिरफ्तारी का आदेश दिया.. कुछ वीडियो AI जनरेटेड भी थे.. जो गलत जानकारी फैला रहे थे.. लेकिन असली तस्वीरें शेयर करने वालों को भी नहीं बख्शा गया.. 60 साल के ब्रिटिश पर्यटक का मामला और भी चौंकाने वाला है.. लंदन से छुट्टियां मनाने आए इस व्यक्ति ने दुबई में मिसाइल हमले की फुटेज रिकॉर्ड की.. पुलिस ने देख लिया.. और उन्होंने तुरंत डिलीट कर दी.. लेकिन फिर भी गिरफ्तार कर लिया गया.. अब वह भी 21 लोगों के साथ एक केस में चार्ज किया गया है..

जिसको लेकर डिटेन्ड इन दुबई की CEO राधा स्टर्लिंग ने कहा कि लोग सिर्फ परिवार को सुरक्षित रहने की खबर दे रहे थे.. लेकिन UAE इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा मान रहा है.. संस्था के मुताबिक.. दुबई में 35 ब्रिटिश और अबू धाबी में करीब उतने ही.. कुल 70 ब्रिटिश नागरिक हिरासत में हैं.. इनमें टूरिस्ट, एक्सपैट, केबिन क्रू और एक वकील भी शामिल हैं..

गिरफ्तार लोगों की हालत भी चिंताजनक बताई जा रही है.. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जेल में भीड़ ज्यादा है.. नींद, खाना और दवा की कमी की शिकायतें आई हैं.. एक ब्रिटिश कैदी ने हाथ से लिखा नोट भेजा.. जिसमें पुलिस द्वारा पीटने का आरोप लगाया गया.. हालांकि UAE सरकार ने इन आरोपों को खारिज किया है.. ब्रिटिश सरकार के विदेश कार्यालय ने कुछ मामलों में कांसुलर मदद दी है.. लेकिन सभी 70 मामलों में नहीं.. राधा स्टर्लिंग कहती हैं कि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला है.. लोग डर के माहौल में जी रहे हैं..

UAE का रुख बहुत साफ है.. उनका कहना है कि ऐसे कंटेंट से अफवाहें फैलती हैं.. लोगों में दहशत होती है और सुरक्षा बलों की गतिविधियां उजागर हो सकती हैं.. कुछ वीडियो AI से बने थे, जो झूठी तस्वीर दिखा रहे थे.. इसलिए पूरे देश में चेकिंग बढ़ा दी गई.. पुलिस होटल, एयरपोर्ट, मॉल और सड़कों पर लोगों के फोन चेक कर रही है.. एक्सपैट्स और टूरिस्ट को चेतावनी दी गई है.. कि कोई भी फोटो-वीडियो शेयर न करें, यहां तक कि प्राइवेट चैट में भी..

जानकारी के मुताबिक यह सख्ती दुबई की अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए है.. शहर का पूरा मॉडल पर्यटन और विदेशी निवेश पर टिका है.. अगर दुनिया भर में दुबई को असुरक्षित बताया गया तो निवेश रुक सकता है.. होटल खाली हो सकते हैं और एयरलाइंस उड़ानें कम कर सकती हैं.. इसलिए सरकार हर उस चीज पर लगाम कस रही है.. जो इस छवि को खराब करे.. लेकिन आलोचक कह रहे हैं कि यह अतिरंजित है.. मानवाधिकार संगठन चिंता जता रहे हैं.. और उनका कहना है कि जेल की स्थिति खराब है.. और कानून बहुत व्यापक है..

 

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