चॉकलेट और बिस्किट का भोग, लड्डू-पेड़ा नहीं: जानिए इस अनोखे मंदिर के बारे में
धार्मिक नगरी वाराणसी अपने प्राचीन मंदिरों और रहस्यमयी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां हर मंदिर की अपनी अलग मान्यता और खासियत है,

4pm न्यूज नेटवर्क: धार्मिक नगरी वाराणसी अपने प्राचीन मंदिरों और रहस्यमयी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यहां हर मंदिर की अपनी अलग मान्यता और खासियत है, लेकिन बटुक भैरव मंदिर एक ऐसा मंदिर है जो अपनी अनोखी परंपरा के कारण खास पहचान रखता है. इस मंदिर में भगवान को लड्डू-पेड़ा नहीं, बल्कि चॉकलेट, टॉफी और बिस्किट का भोग लगाया जाता है.
महादेव की नगरी काशी के कण-कण में शिव बसते हैं. बाबा विश्वनाथ की इस नगरी में भगवान भैरव को काशी का
कोतवाल कहा जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि वाराणसी में एक ऐसा मंदिर भी है जहां भगवान को पारंपरिक
मिठाई या लड्डू-पेड़ा नहीं, बल्कि चॉकलेट, टॉफी और बिस्किट का भोग लगाया जाता है? हम बात कर रहे हैं बटुक
भैरव मंदिर की, जहां आस्था का स्वरूप जितना गहरा है, उतना ही निराला भी. आइए जानते हैं इस मंदिर की महिमा और इसके पीछे की रोचक मान्यताएं.
बाल रूप में विराजमान हैं बटुक भैरव
इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां भगवान भैरव बटुक यानी एक बालक के रूप में विराजमान हैं.
बटुक शब्द का अर्थ ही होता है बालक. जिस तरह हम छोटे बच्चों को खुश करने के लिए उन्हें उनकी पसंद की
चीजें देते हैं, ठीक उसी तरह भक्त यहां बाबा को दुलारने के लिए खिलौने और टॉफी लेकर आते हैं.
चॉकलेट-बिस्किट का लगता है भोग
मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा यही है कि यहां आने वाले भक्त भगवान को टॉफी, चॉकलेट, बिस्किट और खिलौनों का भोग लगाते हैं. मान्यता है कि बटुक भैरव को ये चीजें बेहद प्रिय हैं. भक्त पूरे स्नेह और श्रद्धा के साथ भगवान को ये प्रसाद अर्पित करते हैं और उन्हें बच्चे की तरह दुलारते भी हैं.
संतान सुख और सुरक्षा के लिए लगती है भीड़
इस मंदिर में खासतौर पर वे श्रद्धालु आते हैं जो संतान से जुड़ी समस्याओं से परेशान होते हैं या अपने बच्चों की सुरक्षा और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. माना जाता है कि बटुक भैरव की पूजा करने से संतान संबंधी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में साहस व सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
दूर होते हैं कष्ट और बाधाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बटुक भैरव के दर्शन से शारीरिक और मानसिक कष्टों से राहत मिलती है. इसके साथ ही कुंडली में राहु-केतु से जुड़ी समस्याएं, नकारात्मक शक्तियां और ऊपरी बाधाएं भी दूर होती हैं. मंदिर परिसर में स्थित हवन कुंड में भक्त पूजा-अनुष्ठान कर विशेष फल की कामना करते हैं.



