बांदा में EWS प्रमाण पत्र बनवाने गए युवक की पिटाई का आरोप, लेखपाल और नायब तहसीलदार पर गंभीर सवाल
बांदा में EWS प्रमाण पत्र बनवाने गए युवक निपुण मिश्रा ने लेखपाल और नायब तहसीलदार पर मारपीट का आरोप लगाया है। युवक का दावा है कि 5 हजार रुपये की रिश्वत न देने पर उसे बंधक बनाकर पीटा गया। घटना के बाद इलाके में आक्रोश और जांच की मांग तेज हो गई है।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। आरोप है कि EWS प्रमाण पत्र बनवाने गए एक युवक को कथित तौर पर तहसील परिसर में बंधक बनाकर पीटा गया। इस मामले में लेखपाल और नायब तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। घटना के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और पीड़ित के समर्थन में कुछ सामाजिक संगठनों ने भी कार्रवाई की मांग की है।
EWS प्रमाण पत्र बनवाने गया था युवक
जानकारी के मुताबिक यह मामला बांदा जिले के देहात कोतवाली क्षेत्र के जमालपुर गांव का बताया जा रहा है। पीड़ित युवक निपुण मिश्रा का आरोप है कि वह EWS प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तहसील गया था। इसी दौरान कथित तौर पर लेखपाल और कुछ अन्य लोगों ने उसे रोक लिया और उसके साथ मारपीट की।
लेखपाल और नायब तहसीलदार पर आरोप
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि लेखपाल सुधीर यादव सहित आधा दर्जन लोगों ने उसे दौड़ाकर पीटा। वहीं नायब तहसीलदार धनंजय पटेल पर भी युवक को बंधक बनाकर मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित का दावा है कि कुछ बाहरी लड़कों को भी बुलाकर उसके साथ मारपीट कराई गई।
जातिसूचक गालियां देने का भी आरोप
घटना के चश्मदीदों के मुताबिक युवक को कथित तौर पर जातिसूचक शब्द कहे गए और उसे दौड़ाकर पीटा गया। अगर यह आरोप सही साबित होते हैं तो मामला और भी गंभीर हो सकता है, क्योंकि इसमें सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका है।
रिश्वत न देने का आरोप
पीड़ित युवक का कहना है कि उससे कथित तौर पर 5 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। आरोप है कि जब उसने पैसे देने से इनकार किया तो उसके साथ यह घटना हुई।
ब्राह्मण समाज में आक्रोश
इस घटना के बाद इलाके में ब्राह्मण समाज के लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। कुछ सामाजिक संगठनों और ब्राह्मण सभा के लोगों ने पीड़ित के समर्थन में आवाज उठाई है और प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
इस मामले में सदर एसडीएम नमन मेहता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बताया जा रहा है कि उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। इससे प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल पूरे मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि अगर आरोप सही हैं तो इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
रिपोर्ट- इकबाल खान
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