BJP जिला कार्यसमिति में ‘दागी’ नेताओं की एंट्री? मिर्जापुर में उठा विवाद!
मिर्जापुर में बीजेपी की नई जिला कार्यसमिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री और एक सदस्य पर अलग-अलग आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस मुद्दे पर जिला अध्यक्ष लाल बहादुर सरोज ने कहा कि उन्हें ऐसे मामलों की जानकारी नहीं है।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में भारतीय जनता पार्टी की नई जिला कार्यसमिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि संगठन में जिन लोगों को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं, उनमें से कुछ पर पहले से आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस मुद्दे को लेकर स्थानीय राजनीति में चर्चा तेज हो गई है और विपक्ष भी सवाल उठाने लगा है।
जिला कार्यसमिति में ‘दागी’ नेताओं का आरोप
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मिर्जापुर में हाल ही में बनी जिला कार्यसमिति में जिला उपाध्यक्ष, जिला महामंत्री और एक सदस्य पर अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई है।
बताया जा रहा है कि जिला उपाध्यक्ष बनाए गए नेता पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज है, जबकि जिला महामंत्री और एक सदस्य पर भी अलग-अलग थानों में मुकदमे दर्ज होने का दावा किया जा रहा है।
जिला उपाध्यक्ष पर गंभीर धाराओं में मुकदमा
जानकारी के मुताबिक, जिला उपाध्यक्ष बनाए गए गौरव उमर के खिलाफ शहर कोतवाली में कई धाराओं में मुकदमा दर्ज होने की बात कही जा रही है।
इन धाराओं में 307 (हत्या की कोशिश), 352, 427, 506, 504, 323, 148 और 147 जैसी धाराएं शामिल बताई जा रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह मामला काफी चर्चा में है।
जिला महामंत्री पर भी केस दर्ज होने का दावा
इसी तरह जिला महामंत्री बनाए गए Dr. C L Bind पर भी एक मामले में केस दर्ज होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि देहात कोतवाली में उनके खिलाफ धारा 304A के तहत मुकदमा दर्ज है। यह धारा लापरवाही से मौत होने से जुड़े मामलों में लगाई जाती है।
सदस्य पर कई जिलों में मुकदमे
वहीं कार्यसमिति के सदस्य चंद्रभूषण उपाध्याय के खिलाफ मिर्जापुर, भदोही और वाराणसी के अलग-अलग थानों में कुल 10 मुकदमे दर्ज होने का दावा किया जा रहा है।
इन मामलों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा बढ़ गई है कि संगठन में ऐसे लोगों को जिम्मेदारी क्यों दी गई।
बीजेपी जिला अध्यक्ष का क्या कहना है
इस पूरे मामले पर जब जिला अध्यक्ष लाल बहादुर सरोज से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि जिन लोगों को जिम्मेदारी दी गई है, वे लंबे समय से पार्टी के सक्रिय सदस्य हैं और संगठन के लिए काम करते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास इस तरह के मामलों की कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
राजनीति में फिर उठा ‘दागी नेताओं’ का मुद्दा
मिर्जापुर की इस घटना के बाद एक बार फिर राजनीति में आपराधिक मामलों वाले नेताओं को लेकर बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब जरूरी होता है, ताकि संगठन की छवि पर सवाल न उठे।
रिपोर्ट- संतोष देव गिरी
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