अमेरिका-ईरान की बातचीत फेल, वेंस बोले-हम खुले दिल से यहां आए थे
अमेरिका के उप विदेश मंत्री, वेंस, जिन्होंने इस वार्ता में हिस्सा लिया, ने कहा कि वे इस मुलाकात को सकारात्मक दृष्टिकोण से लेकर आए थे, लेकिन अब तक की बातचीत से कोई भी ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।

4pm न्यूज नेटवर्क: अमेरिका के उप विदेश मंत्री, वेंस, जिन्होंने इस वार्ता में हिस्सा लिया, ने कहा कि वे इस मुलाकात को सकारात्मक दृष्टिकोण से लेकर आए थे, लेकिन अब तक की बातचीत से कोई भी ठोस नतीजा सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वे ईरान के साथ संबंधों को सुधारने के लिए खुले दिल से पहुंचे थे, लेकिन अफसोस की बात है कि इन वार्ताओं का कोई निर्णायक परिणाम नहीं निकला।
इस वार्ता में अमेरिका की ओर से उप विदेश मंत्री वेंस और ईरान की ओर से विदेश मंत्री की टीम ने भाग लिया। बातचीत का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को कम करना और संभावित वार्ता की नीतियों पर सहमति बनाना था। दोनों पक्षों के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा, और पश्चिमी एशिया में ईरान की भूमिका पर चिंता जताई गई। अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाए कि वह विभिन्न आतंकवादी समूहों को समर्थन दे रहा है, जबकि ईरान ने अमेरिकी नीतियों को एकतरफा और नाजायज करार दिया।
वार्ता के अंत में उप विदेश मंत्री वेंस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम इस बैठक में खुले दिल से आए थे, यह दिखाने के लिए कि हम ईरान के साथ संवाद और संबंधों को सुधारने के लिए तैयार हैं। लेकिन अफसोस, हमें इस बातचीत में कोई ठोस समाधान नहीं मिल सका। हमारी ओर से हरसंभव प्रयास किया गया, लेकिन दुर्भाग्यवश यह बातचीत बेनतीजा रही।” उन्होंने आगे कहा, “हम जानते हैं कि इस समय दोनों देशों के बीच बहुत सी चुनौतियां हैं, लेकिन हम विश्वास रखते हैं कि अगर हम भविष्य में फिर से इस मुद्दे पर बैठते हैं, तो किसी सकारात्मक दिशा में काम कर सकते हैं।”
वहीं, ईरान के प्रतिनिधि भी वार्ता के परिणाम से संतुष्ट नहीं दिखे। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमने अमेरिका से अपेक्षा की थी कि वह अपनी पुरानी नीतियों में बदलाव करेगा, लेकिन अफसोस, उसने किसी ठोस कदम की घोषणा नहीं की। इस बैठक से यह साफ हो गया कि दोनों देशों के दृष्टिकोण में बहुत अंतर है।”
ईरान ने यह भी जोर दिया कि अमेरिका को ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की दिशा में गंभीर कदम उठाने चाहिए, जिससे बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, इस बैठक में कोई बड़ा परिवर्तन होने की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि दोनों देशों के बीच दशकों पुराना तनाव और आपसी अविश्वास है। अमेरिका ने ईरान पर परमाणु समझौते के उल्लंघन और क्षेत्रीय हस्तक्षेप के आरोप लगाए हैं, जबकि ईरान अपने खिलाफ लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर नाराज है।
भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ अन्य वैश्विक शक्तियां इस वार्ता के नतीजों पर नज़र बनाए हुए थीं, क्योंकि दोनों देशों के बीच तनाव का असर पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र पर पड़ता है। अंतर्राष्ट्रीय नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भले ही बेनतीजा रही, लेकिन यह बातचीत का सिलसिला बंद नहीं कर सकता। आने वाले महीनों में अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच नई वार्ताएं हो सकती हैं, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को अपने दृष्टिकोण में कुछ बदलाव लाना होगा।
अमेरिका ने यह संकेत भी दिया है कि वह भविष्य में ईरान के साथ बातचीत जारी रखने के लिए तैयार है, लेकिन इसकी शर्तें कुछ विशेष होंगी। ईरान की तरफ से भी यही संदेश दिया गया कि बातचीत की प्रक्रिया को पूरी तरह से समाप्त करने की बजाय, आगे बढ़ने के लिए और भी प्रयास किए जाएंगे। हालांकि, ईरान और अमेरिका दोनों के लिए यह एक कठिन रास्ता होगा, क्योंकि दोनों देशों के अंदरूनी राजनीति और राष्ट्रीय हित भी इस वार्ता की दिशा को प्रभावित करेंगे।
इस्लामबाद में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता की विफलता ने यह साबित कर दिया कि दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के लिए अभी बहुत काम करना बाकी है। हालांकि, इस वार्ता ने दोनों पक्षों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने का एक अवसर प्रदान किया है, लेकिन ठोस परिणाम के बिना इसका निष्कर्ष आया है। अब देखना यह होगा कि दोनों देशों के नेता इस बातचीत के नतीजों से क्या सीखते हैं और भविष्य में इस दिशा में क्या कदम उठाते हैं।



