चुनाव से पहले BJP को बड़ा झटका, पूर्व विधायक केसरी कांग्रेस में शामिल
चुनाव से ठीक पहले भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है... BJP से सस्पेंड किए गए पूर्व विधायक केसरी ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है.. खेड़ा जिले की मातर विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक केसरी सिंह सोलंकी, भाजपा से सस्पेंड होने के बाद कांग्रेस पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल हो गए हैं.. उन्होंने गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में शपथ ली और पार्टी की सदस्यता ग्रहण की.. शामिल होने के बाद केसरी सिंह ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए.. और उन्होंने कहा कि वे निष्ठा और ईमानदारी से कांग्रेस के लिए काम करेंगे.. केसरी सिंह ने दावा किया कि कांग्रेस उनके क्षेत्र में होने वाले सभी चुनावों में जीत हासिल करेगी..
वहीं यह घटना गुजरात में भाजपा के लिए एक और झटका मानी जा रही है.. क्योंकि केसरी सिंह दो बार विधायक रह चुके हैं.. और स्थानीय स्तर पर काफी प्रभाव रखते हैं.. केसरी सिंह सोलंकी ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद स्पष्ट कहा कि वे कुछ समय से क्षेत्र की राजनीतिक स्थिति से असंतुष्ट थे.. और उन्होंने कहा कि जो कुछ गलत हो रहा था, उसे मैं बर्दाश्त नहीं कर सका.. उन्होंने 6 महीने पहले डेयरी चुनावों के दौरान भी इन मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाया था.. अपने दो कार्यकाल के अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावों के दौरान कांग्रेस उम्मीदवारों पर डरा-धमकाकर दबाव डाला जा रहा था..
अब वे कांग्रेस के साथ मिलकर पारदर्शी और जनहितैषी राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.. केसरी सिंह ने कहा कि कांग्रेस कमेटी द्वारा दी गई हर जिम्मेदारी को वे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे.. केसरी सिंह सोलंकी की राजनीतिक यात्रा काफी उतार-चढ़ाव भरी रही है.. वे साल 2014 में मातर विधानसभा से उपचुनाव में पहली बार विधायक बने थे.. उसके बाद 2017 में लगातार दूसरी बार उन्होंने इस सीट से चुनाव जीता.. इस तरह वे दो बार मातर विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं..
2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने उनका टिकट काट दिया था.. कारण यह था कि 2021 के राज्यसभा चुनावों में पार्टी को डर था कि केसरी सिंह कांग्रेस उम्मीदवार के समर्थन में क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं.. तब से वे विवादों में रहे.. विवाद की जड़ें 2025 में खेड़ा जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ (अमूल) के चुनाव में देखी गईं.. इस डेयरी चुनाव के दौरान केसरी सिंह सोलंकी पर पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ गतिविधियां चलाने का आरोप लगा.. भाजपा हाईकमान ने पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करने के लिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.. जुलाई 2025 में भाजपा की खेड़ा इकाई ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड किया.. उस समय वे भाजपा के एक सक्रिय और प्रभावशाली नेता के रूप में जाने जाते थे..
लेकिन पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के कारण भाजपा ने उन्हें अलग कर दिया.. इसके बाद वे कुछ समय तक राजनीति से दूर रहे.. लेकिन अब कांग्रेस में शामिल होकर उन्होंने सक्रिय राजनीति में वापसी कर ली है.. केसरी सिंह सोलंकी ने कांग्रेस में शामिल होने के बाद कहा कि वे क्षेत्र की समस्याओं को समझते हैं.. और कांग्रेस के साथ मिलकर उनका समाधान करेंगे.. और उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा में कुछ गलत चीजें चल रही थीं.. जिन्हें वे सहन नहीं कर सके.. डेयरी चुनावों में उन्होंने सार्वजनिक रूप से इन मुद्दों को उठाया था.. अब कांग्रेस में आकर वे पारदर्शी राजनीति करने का वादा कर रहे हैं..
कांग्रेस नेताओं ने उनका स्वागत किया और उम्मीद जताई कि केसरी सिंह के अनुभव से पार्टी को स्थानीय स्तर पर मजबूती मिलेगी.. मातर विधानसभा क्षेत्र खेड़ा जिले में आता है.. यह क्षेत्र कृषि प्रधान है.. और यहां दुग्ध उत्पादन (अमूल डेयरी) बहुत महत्वपूर्ण है.. केसरी सिंह स्थानीय स्तर पर किसानों, डेयरी सहकारी समितियों.. और आम लोगों के बीच अच्छी पहुंच रखते हैं.. उनके दो कार्यकाल में उन्होंने क्षेत्र के विकास के लिए काम किया..
लेकिन 2022 में टिकट न मिलने और बाद में सस्पेंशन से उनकी नाराजगी बढ़ गई.. अब कांग्रेस में शामिल होकर वे फिर से चुनावी मैदान में सक्रिय होने की तैयारी कर रहे हैं.. यह घटना गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों से पहले भाजपा के लिए चिंता का विषय बन गई है.. गुजरात में 26 अप्रैल 2026 को स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं.. इनमें नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और तालुका पंचायत की सीटें शामिल हैं..
केसरी सिंह जैसे प्रभावशाली नेता का कांग्रेस में जाना भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित कर सकता है.. खेड़ा जिले में ठाकोर और पटेल समुदाय की अच्छी आबादी है.. और केसरी सिंह इन वर्गों में लोकप्रिय रहे हैं.. केसरी सिंह की राजनीतिक पृष्ठभूमि को समझना जरूरी है.. वे 2014 के उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर जीते थे.. 2017 में भी उन्होंने मजबूत जीत दर्ज की.. लेकिन 2021 के राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के संदेह ने उनकी स्थिति कमजोर कर दी..
2022 में टिकट कटने के बाद वे कुछ समय आम आदमी पार्टी में भी गए थे.. लेकिन जल्दी ही भाजपा में वापस लौट आए.. अब 2025 में सस्पेंशन के बाद वे कांग्रेस में पहुंचे हैं.. यह उनकी राजनीतिक यात्रा में तीसरा बड़ा बदलाव है.. कांग्रेस ने केसरी सिंह के शामिल होने को बड़ा गेन बताया है.. गुजरात कांग्रेस के नेता कह रहे हैं कि केसरी सिंह का अनुभव.. और जमीनी संपर्क पार्टी को खेड़ा और आसपास के क्षेत्रों में मजबूती देगा..
केसरी सिंह ने वादा किया है कि वे कांग्रेस की हर जिम्मेदारी निभाएंगे.. और क्षेत्र में पार्टी की जीत सुनिश्चित करेंगे.. और उन्होंने कहा कि अब समय है पारदर्शी राजनीति का पुरानी गलत चीजों को छोड़कर जनहित के काम करने का.. भाजपा की ओर से इस घटना पर अभी कोई बड़ा आधिकारिक बयान नहीं आया है.. लेकिन पार्टी सूत्रों का कहना है कि केसरी सिंह पर पहले भी पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लगे थे..
2025 में अमूल डेयरी चुनाव में उन्होंने पार्टी लाइन के खिलाफ काम किया.. जिसके चलते सस्पेंशन हुआ.. भाजपा का दावा है कि पार्टी मजबूत है.. और ऐसे आने-जाने से उसकी जमीनी ताकत पर असर नहीं पड़ता.. वहीं यह घटना गुजरात की राजनीति में नेताओं के आने-जाने के सिलसिले को दिखाती है.. गुजरात में भाजपा लंबे समय से सत्ता में है.. लेकिन स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है.. कई जगहों पर टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी देखी जा रही है..



