आखिरी 24 घंटे में कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी किए गायब, मोदी के घर में बड़ा खेल?

चुनावी माहौल के बीच कांग्रेस द्वारा अपने प्रत्याशियों को ‘गायब’ करने के आरोपों ने सियासत को गरमा दिया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में स्थानीय निकाय चुनाव 26 अप्रैल 2026 को होने वाले हैं.. लेकिन उससे पहले ही राजनीति काफी गरम हो गई है.. वहीं नामांकन वापसी के आखिरी दिन कांग्रेस ने अपने ज्यादातर उम्मीदवारों को अज्ञात सुरक्षित जगहों पर भेज दिया है.. आमतौर पर विधानसभा या संसदीय चुनावों में रिसॉर्ट पॉलिटिक्स देखने को मिलती है.. लेकिन इस बार स्थानीय निकाय चुनावों में भी कांग्रेस ने ऐसा कदम उठाया है.. पार्टी का कहना है कि भाजपा के इशारे पर प्रशासन.. और पुलिस उम्मीदवारों तथा उनके परिवारों पर दबाव बना रही है.. लालच देकर या धमकाकर नामांकन वापस करवाने की कोशिश हो रही है.. इसलिए कांग्रेस ने उम्मीदवारों को अलग-अलग सुरक्षित स्थानों पर रखा है.. ताकि नामांकन वापसी की आखिरी तारीख तक कोई उनसे संपर्क न कर सके..

आपको बता दें कि गुजरात कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित चावड़ा ने इस मामले में साफ आरोप लगाया है.. उन्होंने कहा कि भाजपा और सरकार के अधिकारी उम्मीदवारों को डरा-धमका रहे हैं.. कई जगहों पर 20-30 लाख रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं.. अमित चावड़ा ने कहा कि हमने उम्मीदवारों को रिसॉर्ट नहीं भेजा है.. वे अलग-अलग सुरक्षित जगहों पर हैं.. सभी एक साथ रह रहे हैं.. ताकि भाजपा या अधिकारी उन तक पहुंच न पाएं.. नामांकन वापसी का समय खत्म होने तक वे सुरक्षित रहेंगे.. कांग्रेस ने इस बारे में राज्य चुनाव आयोग को शिकायत भी की है.. पार्टी ने दस्तावेजी सबूत दिए हैं कि पुलिस और प्रशासन भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं..

कांग्रेस ने राजकोट, सूरत, मेहसाणा, वडोदरा, सुरेंद्रनगर और अन्य जिलों में अपने उम्मीदवारों को जिला स्तर पर एक-एक सुरक्षित जगह पर भेजा है.. सूत्रों के अनुसार 100 से 200 उम्मीदवारों को इस तरह मिशन अज्ञात.. या ऑपरेशन अज्ञात के तहत रखा गया है.. उम्मीदवारों को फोन बंद करने और परिवार से भी संपर्क न रखने के निर्देश दिए गए हैं.. कांग्रेस का दावा है कि कई उम्मीदवारों के परिवारों पर दबाव बनाया जा रहा है.. कुछ जगहों पर झूठे मुकदमों की धमकी दी जा रही है.. अमित चावड़ा ने राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की..

वहीं इस घटनाक्रम के बीच एक गंभीर आरोप भी सामने आया है.. कांग्रेस ने कहा कि वापी में एक चुनाव अधिकारी पर भाजपा का इतना दबाव था कि.. उन्होंने आत्महत्या कर ली.. पार्टी ने इसे भी राजनीतिक दबाव का नतीजा बताया.. हालांकि इस मामले की जांच अभी चल रही है.. कांग्रेस का कहना है कि नामांकन की जांच के दौरान भी कई फॉर्म रद्द किए गए.. जिससे भाजपा को फायदा हो रहा है..

नामांकन फॉर्म की जांच के अंतिम दिन कुल 9,819 फॉर्म रद्द किए गए.. इनमें नगर निगमों में 1,934 फॉर्म, नगर पालिकाओं में 1,164 फॉर्म और जिला व तालुका पंचायतों में 6,721 फॉर्म रद्द हुए.. सबसे ज्यादा रद्दीकरण जिला-तालुका पंचायत स्तर पर हुआ.. यहां 20,000 से ज्यादा नामांकन दाखिल हुए थे.. कई जगहों पर दस्तावेजी या तकनीकी खामियों के कारण फॉर्म रद्द हो गए.. कांग्रेस का आरोप है कि इन रद्दीकरण में भी पक्षपात हुआ..

इससे पहले कई नगर निगमों और नगर पालिकाओं में भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं.. क्योंकि विपक्षी उम्मीदवारों के फॉर्म रद्द हो गए या नामांकन वापस ले लिए गए.. कांग्रेस को डर है कि अगर और उम्मीदवार नामांकन वापस ले लेंगे.. तो पार्टी कई सीटों पर चुनाव ही नहीं लड़ पाएगी.. यही वजह है कि पार्टी ने उम्मीदवारों को सुरक्षित जगह भेजने का फैसला किया.. 15 अप्रैल को नामांकन वापसी की आखिरी तारीख है.. तब तक स्थिति साफ हो जाएगी कि कांग्रेस के कितने उम्मीदवार मैदान में बचे रहते हैं..

भाजपा ने कांग्रेस के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है.. भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस के पास पर्याप्त उम्मीदवार ही नहीं हैं.. इसलिए पार्टी प्रत्याशी छिपाओ अभियान चला रही है.. भाजपा की प्रवक्ता हेमाली बोगावाला ने कहा कि कांग्रेस पहले प्रत्याशी खोजो अभियान चला रही थी.. अब 60 प्रतिशत ही उम्मीदवार मिले हैं.. अब प्रत्याशी छिपाओ अभियान चल रहा है.. नतीजों के बाद कांग्रेस मुंह छिपाने लायक भी नहीं रहेगी.. भाजपा का दावा है कि कांग्रेस अपने उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं पर खुद विश्वास नहीं कर रही है.. इसलिए उन्हें छिपाना पड़ रहा है.. जनता कैसे कांग्रेस पर भरोसा करेगी..

भाजपा ने कहा कि कांग्रेस जनता के बीच नहीं जा रही है.. और विकास के कामों से दूर है.. गुजरात में भाजपा लंबे समय से सत्ता में है.. और स्थानीय स्तर पर मजबूत है.. कई जगहों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध जीत रहे हैं.. पार्टी का कहना है कि कांग्रेस की यह रणनीति हार स्वीकार करने जैसी है..

 

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