महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के गिरते ही एनडीए व मोदी सरकार पर चौतरफा प्रहार
विपक्ष बोला- पीएम मोदी का पतन जल्द ही होने वाला है

राहुल गांधी ने देश के लोकतंत्र को बचाया
कांग्रेस, सपा, शिवसेना यूबीटी ने भाजपा पर साधा निशाना
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। देश की संसद में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक दो तिहाई बहुमत न होने की वजह से पास नहीं हो पाया। इस बीच राहुल गांधी को लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। विपक्ष ने एडीए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस, शिवसेना यूबिटी से लेकर सपा तक ने मोदी सरकार पर चौतरफार वार शुरू कर दिया है।
राहुल गांधी के इस बयान पर शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने कल देश के लोकतंत्र बचाने के आंदोलन का नेतृत्व किया है। राहुल गांधी देश के बहुत प्रभावशाली नेता हैं। राहुल गांधी के नेतृत्व में हम लोगों ने कल एक बहुत बड़ी जंग को जीत में बदल दिया है।

यह एक राजनीतिक साजिश थी : संजय राउत
सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा कि महिला आरक्षण विधेयक एक राजनीतिक साजिश थी, और यह विफल हो गई। यह मोदी और उनके गुट के पतन की शुरुआत है। वे महिला आरक्षण की आड़ में मनमाने ढंग से मतदाताओं के गठबंधन में हेरफेर करके सभी चुनाव जीतना चाहते थे। संसद में उनकी ये योजनाएं धराशायी हो गईं, वे लोकसभा सीटों की संख्या मनमाने ढंग से नहीं बढ़ा सके, लेकिन उन्हें संविधान की शक्ति और अपनी वास्तविक ताकत का एहसास हो गया है। उन्होंने आगे लिखा कि प्रधानमंत्री का पद केवल 16 सांसदों के बहुमत पर टिका है, अगर ये 16 भी कम हो गए, तो उन्हें अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर बाहर जाना पड़ेगा। आज के घटनाक्रम का यही अर्थ है। मोदी का पतन जल्द ही होने वाला है, मेरी बात याद रखना राहुल गांधी ने उन 16 सांसदों के गले में फंदा डाल दिया है। संजय राउत ने बिल पेश होने से पहले कहा था कि महिला आरक्षण के आड़ में जो परिसीमन का खेल चल रहा है, वह बहुत गंभीर है, बीजेपी अपने अनुसार पॉलिटिकल मैप बनाने की कोशिश कर रही है।
उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच बीजेपी ने मतभेद पैदा कर दिया है। दक्षिण के राज्यों को कमजोर बना दिया है। दो-चार राज्यों की ताकत इतनी बढ़ा दी है कि वही देश की राजनीति तय करेंगे।
परिसीमन की वजह से किया संविधान (131वां संशोधन) विधेयक का विरोध : खरगे
राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को इस बात पर जोर देते हुए कहा कि इंडिया ब्लॉक के सांसद महिला विरोधी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ एनडीए सरकार सत्ता हासिल करना चाहती है ताकि सदन में साधारण बहुमत से किसी भी परिसीमन कानून को पारित या संशोधित किया जा सके। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक और परिसीमन विधेयक का विरोध इसलिए कर रहे हैं क्योंकि इसमें परिसीमन का प्रावधान है। संसद परिसर से एएनआई को संबोधित करते हुए खरगे ने कहा कि हम महिला विरोधी नहीं हैं और हम लंबे समय से एक तिहाई महिला आरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। हमने सर्वसम्मति से 023 के संशोधन का समर्थन किया और उसे पारित कराया। हालांकि, इसकी आड़ में उन्होंने एक और संशोधन पेश किया, जिसमें परिसीमन का प्रावधान जोडक़र महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयकों को समेकित कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि भाजपा संविधान की संरचना को बदलना चाहती है और कार्यपालिका शक्ति को अपने हाथों में लेना चाहती है। उन्होंने कहा कि इन तीनों विधेयकों को एक साथ लाकर वे सत्ता हासिल करना चाहते हैं ताकि किसी भी परिसीमन कानून को साधारण बहुमत से सदन में पारित और संशोधित किया जा सके… आपको यह 543 सदस्यों के भीतर करना चाहिए। अगली जनगणना या जाति जनगणना पूरी होने के बाद, आप इसे अगले चुनाव में पूरा कर सकते हैं… आपका इरादा संविधान की संरचना को बदलना और कार्यपालिका शक्ति को अपने हाथों में लेना है।
लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की साजिश रच रही थी सरकार : प्रियंका गांधी
लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित न होने के बाद कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ, वह लोकतंत्र और संविधान की बड़ी जीत है। प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार संघीय ढांचे को कमजोर करने और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की साजिश रच रही थी, जिसे विपक्ष ने मिलकर विफल कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि सरकार किसी भी तरह सत्ता में बने रहने की रणनीति बना रही है और इसके लिए महिलाओं के मुद्दे का इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, सरकार की सोच थी कि अगर बिल पास हो जाता तो उसे राजनीतिक फायदा मिलता, और अगर नहीं होता तो वह अन्य दलों को महिला विरोधी बताकर खुद को महिलाओं का मसीहा दिखाने की कोशिश करती। प्रियंका गांधी ने कहा कि महिलाओं का मसीहा बनना आसान नहीं है और सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने इसे एक राजनीतिक रणनीति करार दिया। केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार के हालिया फैसलों में अंतरराष्ट्रीय दबाव साफ दिखता है। अमेरिका के साथ हुए समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी शर्तें सामान्य परिस्थितियों में कोई भी भारतीय प्रधानमंत्री स्वीकार नहीं करता।महंगाई को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा। प्रियंका गांधी ने कहा कि गैस, फल-सब्जियों और रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा बोझ महिलाओं पर पड़ रहा है। उनके मुताबिक, सरकार इन मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक गतिविधियों और प्रचार का सहारा ले रही है।
अपने बयान में प्रियंका गांधी ने मौजूदा हालात को केंद्र सरकार के लिए काला दिन बताया और कहा कि यह पहला मौका है जब सरकार को ऐसा राजनीतिक झटका लगा है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि आज महिलाओं की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। संघर्ष भी बढ़ रहा है। महिलाएं मूर्ख नहीं हैं। वे सब कुछ देखती हैं। अब जनसंपर्क और मीडिया का शोर-शराबा काम नहीं करेगा। अगर आप कुछ ठोस करना चाहते हैं, तो 23 में सभी दलों के समर्थन से सर्वसम्मति से पारित विधेयक को वापस लाएं। अगर इसे अभी लागू करने के लिए इसमें कुछ छोटे-मोटे संशोधन करने की जरूरत है, तो करें और अभी लागू करें। महिलाओं को उनके अधिकार अभी दें। लेकिन इसे घुमा-फिराकर और दूसरी चीजों से जोडक़र उन्हें गुमराह करने की कोशिश न करें। इसे अभी करें। हम सब तैयार हैं।
पीएम मोदी के प्रयासों को झटका: ललन सिंह
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने शनिवार को लोकसभा में संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 26 के पारित न हो पाने के बाद विपक्ष की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल में बाधा डाली है और जोर देकर कहा कि महिला मतदाता इस घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रिया देंगी।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा विधेयक की हार को लोकतंत्र की जीत करार देने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सिंह ने कहा कि विपक्ष उस ऐतिहासिक पहल को झटका दे रहा है जिसे उन्होंने महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई पहल बताया। सिंह ने बताया कि विपक्ष का कहना है कि इस विधेयक का गिरना एक ऐतिहासिक कदम है। उनके अनुसार, यह ऐतिहासिक इसलिए है क्योंकि उन्होंने देश में महिला सशक्तिकरण के लिए प्रधानमंत्री के प्रयासों को विफल कर दिया है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करके देश की लगभग आधी आबादी वाली महिलाओं को न्याय दिलाना था। आधी आबादी महिलाएं हैं, और संसद में उन्हें 33 प्रतिशत आरक्षण देना उनके साथ न्याय करने की दिशा में उठाया गया कदम था। अब वे इसे गिराकर बड़ी संतुष्टि महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी को निशाना बनाते हुए केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि उसने ेतिहासिक रूप से प्रमुख सामाजिक सुधारों का विरोध किया है। सिंह ने कहा कि यह कांग्रेस का चरित्र है। उन्होंने हमेशा समाज में सामाजिक परिवर्तन या सामाजिक क्रांति के कदमों को रोकने की कोशिश की है।
शुरू से ही उनका यही इतिहास रहा है। उन्होंने आगे दावा किया कि देश भर की महिला मतदाता इस विधेयक पर विपक्ष के रुख का राजनीतिक जवाब देंगी। उन्होंने कहा कि इस देश की नारी शक्ति कांग्रेस पार्टी के खिलाफ अपना एक-एक वोट डालेगी।
नोएडा के बाद हापुड़ में भडक़े श्रमिक, वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर फूटा गुस्सा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पिलखुवा (हापुड़)। हापुड़ के कोतवाली क्षेत्र स्थित दो कंपनी में काम करने वाले कर्मचारियों का गुस्सा वेतन बढ़ोतरी को लेकर फूट पड़ा। कर्मचारियों ने एकजुट होकर अचानक विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और कामकाज प्रभावित हो गया। स्थिति तेजी से बिगडऩे पर पुलिस प्रशासन मौके पर पहुंचा और हालात को नियंत्रित किया।
कर्मचारियों ने बताया कि लंबे समय से वेतन बढ़ाने की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन प्रबंधन की ओर से इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी अनदेखी से नाराज होकर कर्मचारियों ने विरोध का रास्ता अपनाया और जमकर नारेबाजी की। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो रहा है और बार-बार मांग रखने के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही है। विरोध के दौरान कर्मचारियों का कहना हैं कि जब तक वेतन बढ़ोतरी को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
होर्मुज पर खत्म नहीं हो रही तनातनी!
अमेरिकी नाकाबंदी की वजह से वापस लौटे 21 जहाज, ईरान ने दी चेतावनी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर की डेडलाइन जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनातनी फिर से बढऩे लगी है। फिलहाल होर्मुज खुलने की घोषणा के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉपर्स नेवी ने होर्मुज स्ट्रेट को पार करने की कोशिश कर रहे जहाजों के लिए कुछ शर्तें तय की हैं।
एक्स पर एक पोस्ट में कहा गया है कि सभी तरह के आवागमन के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी से अनुमति लेना जरूरी है। नागरिक जहाजों को केवल ईरान द्वारा तय किए गए रास्ते से गुजरने की अनुमति है, जबकि सैन्य जहाजों के वहां से गुजरने पर अभी भी रोक है। अगर इजाजत नहीं ली जाती है तो इसे फिर से बंद कर दिया जाएगा। आईआरजीसी नेवी ने इन शर्तों को एक नई व्यवस्था बताया और कहा कि यह सीजफायर समझौते की शर्तों अनरूप है। हालांकि, इस बयान में उन विवरणों का जिक्र है जिन्हें अराघची ने तब स्पष्ट नहीं किया था, जब उन्होंने यह घोषणा की थी कि संघर्ष-विराम के दौरान सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए मार्ग पूरी तरह से खुला है। उन्होंने कहा था, लेबनान में संघर्ष-विराम के अनुरूप होर्मुज स्ट्रेट से सभी वाणिज्यिक जहाजों के गुजरने का मार्ग, संघर्ष-विराम की शेष अवधि के लिए पूरी तरह से खुला घोषित किया जाता है।
यह उस समन्वित मार्ग पर होगा जिसकी घोषणा इस्लामिक गणराज्य ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन द्वारा पहले ही की जा चुकी है।इससे पहले, ईरान के कई सरकारी मीडिया संस्थानों ने अराघची की घोषणा का विरोध किया था।
तस्नीम ने उनकी पोस्ट की आलोचना करते हुए उसे त्रुटिपूर्ण और अधूरा बताया और चेतावनी दी कि इस पोस्ट ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के संबंध में अनावश्यक अस्पष्टता पैदा कर दी है।
ट्रंप ने भी की पुष्टि
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस बात की पुष्टि भी की कि होर्मुज स्ट्रेट तरह से खुला है। ट्रंप ने लिखा, ईरान ने अभी-अभी घोषणा की है कि ईरान का जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला है और पूरी तरह से आवाजाही के लिए तैयार है। धन्यवाद
तमिलनाडु में भीषण सडक़ हादसा, केरल के 9 शिक्षकों की मौत
१११ 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। तमिलनाडु के सेलम जिले में शनिवार को एक दर्दनाक सडक़ हादसे ने सबको झकझोर कर रख दिया। सेलम-कोयंबटूर नेशनल हाईवे पर एक सरकारी बस के अनियंत्रित होकर सडक़ से उतरने और कई वाहनों से टकराने के कारण कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई। मारे गए सभी लोग पेशे से शिक्षक थे और केरल के मलप्पुरम जिले के रहने वाले थे।
समाचार एजेंसी ्रहृढ्ढ की रिपोर्ट के अनुसार, इस हादसे में जिन लोगों की जान गई, वे सभी पेशे से शिक्षक थे। ज़िला कलेक्टर के दफ़्तर से जारी एक बयान के मुताबिक, बस कोयंबटूर से सेलम की ओर जा रही थी। 13वें हेयरपिन मोड़ पर ड्राइवर का बस से कंट्रोल हट गया, जिसके बाद बस अचानक सडक़ से उतर गई। बस एक दोपहिया वाहन और एक ऑटो-रिक्शा से टकरा गई, जिसमें करीब 10 यात्री सवार थे। इसके बाद बस 9वें हेयर मोड़ पर नीचे गिर गई। बस में केरल के पेरिनथलमान्ना से आए 13 टूरिस्ट सवार थे। इन 13 लोगों में से आठ लोगों (1 पुरुष और 7 महिलाएं) की मौके पर ही मौत हो गई। पांच घायल लोगों को, जिनमें ड्राइवर, 17 से 18 साल के दो लडक़े और दो महिलाएं शामिल थीं, तुरंत बचाकर पोल्लाची के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। घायलों में से एक ने बाद में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। तमिलनाडु के सरकारी अधिकारियों ने इस घटना पर तुरंत कार्रवाई की। हादसे की खबर मिलते ही, दो सीनियर पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और बचाव और राहत कार्यों की देखरेख की। घायलों को तुरंत निकालने के लिए फायर एंड रेस्क्यू सर्विस के कर्मचारियों को भी तैनात किया गया।
पीएम और केरल के सीएम ने मौतों पर दुख जताया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे में हुई मौतों पर गहरा दुख व्यक्त किया।प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक्स पर लिखा, तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुए हादसे के बारे में सुनकर बहुत दुख हुआ। मैं उन लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस हादसे में अपने प्रियजनों को खो दिया है। घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने भी केरल के नागरिकों की मौत पर अपनी संवेदना व्यक्त की। विजयन ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए कि सभी घायल लोगों को सबसे अच्छा इलाज मिले।



