मिर्जापुर में वकीलों का बवाल! SDM पर फूटा गुस्सा, कचहरी में तोड़फोड़

मिर्जापुर में सपा नेता व अधिवक्ता सतीश मिश्रा से कथित दुर्व्यवहार के बाद मामला गरमा गया है। बार एसोसिएशन के विरोध के बीच कचहरी में हंगामा और तोड़फोड़ हुई। जानें पूरा विवाद, प्रशासन पर उठे सवाल और आगे क्या हो सकता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिर्जापुर में एक वीडियो ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एक तरफ सत्ता और सिस्टम है, दूसरी तरफ वकीलों का गुस्सा, और बीच में खड़ा है एक ऐसा सवाल, जो सीधे न्याय व्यवस्था की साख से जुड़ता है। सपा नेता और अधिवक्ता सतीश मिश्रा के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला अब सिर्फ एक घटना नहीं रहा, बल्कि बड़े विरोध का रूप ले चुका है।

जानकारी के मुताबिक, अहरौरा और अष्टभुजा विंध्याचल क्षेत्र में टोल प्लाजा हटाने की मांग को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता पिछले 10 दिनों से धरने पर बैठे थे। गुरुवार रात पुलिस प्रशासन ने जबरन धरना खत्म कराया। इसी दौरान समर्थन में पहुंचे सपा नेता और अधिवक्ता सतीश मिश्रा के साथ सीओ सिटी विवेक जावला और एसडीएम सदर गुलाब चंद द्वारा कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। बताया जा रहा है कि सतीश मिश्रा को जबरन गाड़ी में बैठाया गया और अपशब्द भी कहे गए। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामला तूल पकड़ गया।

बार एसोसिएशन का विरोध, कामकाज ठप

घटना के विरोध में बार एसोसिएशन ने शनिवार को आपात बैठक बुलाई। बैठक में अधिवक्ताओं ने एक सुर में सीओ सिटी विवेक जावला और एसडीएम सदर गुलाब चंद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। गुस्साए अधिवक्ताओं ने कचहरी परिसर में नारेबाजी की और कामकाज ठप कर दिया। उनका कहना है कि जब तक दोनों अधिकारियों को निलंबित नहीं किया जाएगा, तब तक विरोध जारी रहेगा।

कचहरी में तोड़फोड़, हालात तनावपूर्ण

विरोध उस समय और उग्र हो गया जब अधिवक्ताओं का समूह एसडीएम सदर के न्यायालय तक पहुंच गया। यहां कुर्सियां तोड़ी गईं, फाइलें फेंकी गईं और कंप्यूटर-लैपटॉप को भी नुकसान पहुंचाया गया। पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। आसपास के कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची, वहीं खुफिया एजेंसियां भी अलर्ट मोड में रहीं।

आम लोगों पर पड़ा असर

इस हंगामे का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ा जो दूर-दराज से अपने केस के सिलसिले में कचहरी पहुंचे थे। कामकाज ठप होने की वजह से कई लोगों को बिना सुनवाई के ही वापस लौटना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवहार और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिवक्ताओं का आरोप है कि अधिकारी “तानाशाही” रवैया अपना रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। अब देखना होगा कि इस मामले में प्रशासन क्या कदम उठाता है और क्या वकीलों का गुस्सा शांत हो पाता है या यह विवाद और गहराता है।

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रिपोर्ट – संतोष देव गिरी

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