DPDP कानून के खिलाफ याचिका पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है.
याचिका में कानून को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता गतिविधियों पर प्रतिबंधात्मक बताया गया है. जस्टिस सूर्यकांत ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ पर चिंता व्यक्त की है.
डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) कानून के प्रावधानों को चुनौती देने वाली एक और याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने ये नोटिस भेजा है. याचिका में कानून के प्रावधानों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारिता गतिविधियों पर प्रतिबंधात्मक बताते हुए दी चुनौती गई है
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को 13 मई को इसी तरह के लंबित मामलों के साथ सूचीबद्ध किया है. डिजिटल अरेस्ट पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि यह बेहद चौंकाने वाली बात है कि अधिकांश पढ़े-लिखे लोग डिजिटल अरेस्ट का शिकार हो रहे हैं.
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या कहा
आज सोमवार (20 अप्रैल) को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए बिचौलियों को एक “किल स्विच” की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि पीड़ित, डिजिटल अरेस्ट के बारे में जानने के बावजूद भी एक दम सुन्न पड़ जाते हैं. अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमानी ने कहा कि अंतर-विभागीय आंतरिक बैठक हो चुकी है. एमिकस मेल में प्राप्त सभी शिकायतों को संकलित किया जा रहा है.
पहले भी केंद्र को दिया था नोटिस
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल 2026 को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम, 2023 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक और याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था.जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने ने विशेष रूप से धारा 44(3) पर जवाब मांगा था जो RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) को संशोधित कर व्यक्तिगत डेटा के खुलासे पर रोक लगाती है.
वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान की दलीलों को सुनने के बाद, बेंच ने केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय (DoPT) और कानून एवं न्याय मंत्रालय से जवाब मांगा था. इसके अलावा, अदालत ने इस कानूनी प्रक्रिया में राजस्थान सरकार को भी एक पक्ष के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया था. मजदूर किसान शक्ति संगठन के अलावा सामाजिक कार्यकर्ताओं अरुणा रॉय, निखिल डे और शंकर सिंह रावत ने यह जनहित याचिका दायर की है.



