पथरी के मरीज करें ये तीन काम

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
किडनी में पथरी होना एक ऐसी गंभीर समस्या है जिसे अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो जानलेवा भी हो सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारे देश की एक बड़ी आबादी इस समस्या से परेशान है। किडनी में पथरी होने का बाद अपने आहार में कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी होती हैं। अधिकांश किडनी स्टोन्स कैल्शियम ऑक्सलेट से बने होते हैं। जब मूत्र में कैल्शियम और ऑक्सलेट की मात्रा बढ़ जाती है, तो वे आपस में जुडक़र सख्त पथरी का रूप ले लेते हैं। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टर ने तीन ऐसे नियम बताएं हैं जो न सिर्फ नई पथरी बनने से रोकते हैं, बल्कि पहले से मौजूद स्टोन को बढऩे से भी रोक सकते हैं। अगर इन तीन नियमों का सख्ती से पालन किया जाए तो किडनी स्टोन के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
नमक का कम सेवन
किडनी स्टोन से बचने का पहला नियम है नमक की मात्रा कम करना। 24 घंटे में नमक का सेवन 5 ग्राम से कम करने पर यूरिन में कैल्शियम का रिसाव काफी कम हो जाता है। चाहे वह साधारण रिफाइंड नमक हो या हिमालयन पिंक साल्ट, सभी में सोडियम की मात्रा लगभग समान होती है। जब शरीर में सोडियम अधिक होता है, तो किडनी यूरिन के जरिए अधिक कैल्शियम बाहर निकालती है, जो आगे चलकर पथरी का रूप ले लेता है। इसके अलावाब्लड प्रेशर के मरीजों को अपने खाने में नमक की मात्रा को कम रखनी चाहिए। अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं तो कोशिश करें कि नमक कम खाएं। नमक की मात्रा ज़्यादा लेते हैं, तो इससे पेशाब से ज़्याद कैल्शियम निकलता है। जिससे ओस्टियोपोरोसिस जैसी हड्डियों से जुड़ी समस्याएं हो सकती है। यानि नमक का ज्यादा सेवन हड्डियों को कमजोर बना सकता है। नमक की ज़्यादा मात्रा दिमाग के फंक्शन को भी प्रभावित करती है।
सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है
किडनी स्टोन की समस्या से बचने के लिए महंगे इलाज से बेहतर जीवनशैली में ये तीन छोटे बदलाव करना है। नमक कम करें, खट्टे फलों का सेवन बढ़ाएं और खुद को हमेशा हाइड्रेटेड रखें। अगर इन नियमों का नियमित पालन किया जाए, तो भविष्य में होने वाली दर्दनाक सर्जरी और दवाओं के भारी खर्च से बचा जा सकता है।
साइट्रस फलों का सेवन बढ़ाएं
किडनी में पथरी के जोखिम को कम करने के लिए डाइट में नींबू, संतरा, मौसमी और कीवी जैसे खट्टे फलों को शामिल करना जरूरी है। इनमें मौजूद साइट्रेट यूरिन में कैल्शियम को जमने से रोकता है। साथ ही इसके विपरीत ऑक्सिलेट रिच फूड्स जैसे पालक, शकरकंद और चुकंदर का सेवन सीमित करना जरूरी है। जब यूरिन में ऑक्सिलेट कम होगा, तो कैल्शियम को बाइंड होने के लिए तत्व नहीं मिलेंगे और पथरी बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाएगी। क्योंकि खट्टे फलों में विटामिन सी की मात्रा ज्यादा होती है। इसलिए इनका सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है और सर्दी, खांसी और वायरल इंफेक्शन से दूर रख सकता है। अगर आप बार-बार बीमार पड़ते हैं, तो आपके लिए खट्टे फलों का सेवन फायदेमंद हो सकता है।
हाइड्रेशन का नियम
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण बात है पर्याप्त जल सेवन। कई वैज्ञानिक शोधों से यह साबित हो चुका है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 2.5 लीटर पानी पीता है, उनमें किडनी स्टोन बनने की संभावना बहुत कम हो जाती है। पानी यूरिन को पतला रखता है, जिससे पथरी बनाने वाले खनिज आपस में जमा होकर पत्थर नहीं बन पाते। अगर आपको पहले से पथरी है, तो पानी उसे बाहर निकालने में मदद करता है। क्योंकि पानी सिर्फ प्यास बुझाने के लिए ही नहीं बल्कि शरीर में कई फंक्शनिंग को बेहतर बनाने का भी काम करता है। लो मेटाबॉलिज्म से लेकर, अनिद्रा और सिरदर्द, ब्लड प्रेशर लेवल में बदलाव और भावनात्मक मिजाज तक को पानी प्रभावित करता है।



