राघव चड्ढा सहित सात रास सांसदों पर चौतरफा वार

- सिर्फ मसालों से सब्जी नहीं बनती : भगवंत मान
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राघव चड्ढा सहित सात राज्यसभा सांसदों के आम आदमी पार्टी छोडक़र भाजपा में शामिल होने से पंजाब से लेकर महाराष्ट तक की राजनीति में हलचल मच गई है। जहां इस पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चड्ढा पर मसालों से सब्जी नहीं बनती कहकर तंज कसा, जो दलबदल करने वाले नेताओं के महत्व को कमतर आंकता है। वहीं राघव के मुंबई के आवास के बाहर आप के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया है।
मान ने चड्ढा का नाम लिए बिना, पंजाबी में एक पोस्ट में पाक कला से जुड़ा उदाहरण देते हुए कहा कि अदरक, लहसुन और मसाले जैसी सामग्रियां मिलकर किसी व्यंजन का स्वाद तो बढ़ा सकती हैं, लेकिन अकेले-अकेले वे व्यंजन नहीं बना सकतीं। यह स्पष्ट रूप से अलग हुए सांसदों के समूह पर कटाक्ष था। मान ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अदरक, लहसुन, जीरा, मेथी पाउडर, लाल मिर्च, काली मिर्च और धनिया-ये सातों चीजें मिलकर सब्जी को स्वादिष्ट बनाती हैं, लेकिन अकेले ये सब्जी नहीं बन सकतीं। यह घटनाक्रम चड्ढा द्वारा आम आदमी पार्टी से अलग होने की घोषणा और यह ऐलान करने के एक दिन बाद सामने आया है कि राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने वाले उसके 10 सांसदों में से सात भाजपा में विलय कर लेंगे।
आप में माहौल टॉक्सिक हो गया था : राघव चड्ढा
सांसद राघव चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं एक सीए था, मेरे सामने एक बेहतर करियर था, उसे छोडक़र मैं राजनीति में आया। अपना करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए। अपने खून-पसीने और बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा, लेकिन आज ये पार्टी पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है। इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन विकल्प थे, पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं। दूसरा विकल्प कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं, जो कि हुआ नहीं।तीसरा विकल्प कि मैं अपनी ऊर्जा और अनुभव लेकर किसी और पार्टी के साथ जुडक़र सकारात्मक राजनीति करूं। इसलिए अकेले मैंने ही नहीं, मेरे साथ छह और सांसदों ने यह फैसला लिया कि हम इस पार्टी से रिश्ता तोड़ देंगे। एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। वे अनगिनत शिक्षित लोग जो इस पार्टी के साथ जुड़े थे, क्या वे सारे लोग गलत थे?



