राम माधव के बयान पर मचा घमासान
मोदी सरकार पर कांग्रेस का तीखा हमला

- भारत की संप्रभुता का अमेरिका में पीएम ने किया आत्मसमर्पण
- प्रधानमंत्री वाशिंगटन के इशारों पर काम कर रहे हैं : वेणुगोपाल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ नेता राम माधव द्वारा अमेरिका में दिए गए एक विवादास्पद बयान ने भारत में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने भारत की संप्रभुता अमेरिका के हाथों गिरवी रख दी है। पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने पद पर बने रहने का अधिकार खो दिया है।
वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट को रिपोस्ट किया,जिसके मुताबिक, अमेरिका के हडसन इंस्टीट्यूट केएक कार्यक्रम में माधव ने कहा था, ‘‘भारत, ईरान से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया, अपने विपक्ष की आलोचना के बावजूद हम रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गए, भारत ने बिना अधिक कुछ कहे 5० फीसद टैरिफ पर भी सहमति दे दी, तो फिर भारत ने अमेरिका के साथ मिलकर काम करने के लिए कहां पर्याप्त कोशिश नहीं कर रहा है।’’ बाद में माधव ने माफी मांग ली और कहा कि उनकी तरफ से गलत तथ्य रखा गया था।
राष्ट्रीय सरेंडर संघ का फर्जी राष्ट्रवाद: राहुल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आरएसएस को राष्ट्रीय सरेंडर संघ कहा और संगठन को फर्जी करार दिया। राहुल गांधी ने एक पोस्ट में लिखा कि राष्ट्रीय आत्मसमर्पण संघ। नागपुर में फर्जी राष्ट्रवाद। अमेरिका में सरासर चाटुकारिता। राम माधव ने संघ का असली चेहरा उजागर कर दिया है। गांधी की ये टिप्पणी वाशिंगटन डीसी में हडसन इंस्टीट्यूट के न्यू इंडिया सम्मेलन में राजदूत कर्ट कैंपबेल और एलिजाबेथ थ्रेलकेल्ड के साथ राम माधव की पैनल चर्चा में भाग लेने के बाद आई है। इस चर्चा में उन्होंने अमेरिका-भारत संबंधों के लिए नए रास्ते विषय पर बात की। चर्चा के दौरान, राम माधव ने भारत की ऊर्जा और व्यापार नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि विपक्ष की इतनी आलोचना के बावजूद भारत ईरान और रूस से तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया। भारत ने बिना ज्यादा कुछ कहे 50त्न टैरिफ पर सहमति जताई। तो आखिर भारत अमेरिका के साथ सहयोग करने के लिए पर्याप्त प्रयास कहाँ नहीं कर रहा है?वेणुगोपाल ने दावा किया कि आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता की स्पष्ट स्वीकारोक्ति है कि प्रधानमंत्री मोदी वाशिंगटन के इशारों पर काम कर रहे हैं। एक समय था जब अमेरिका का सातवां बेड़ा बंगाल की खाड़ी में था और भारत ने हिम्मत नहीं हारी। आज का दिन है, जहां एक समझौतावादी प्रधानमंत्री ने भारत की संप्रभुता अमेरिका को सौंप दी।


