राज्य के साथ हो रहा घोर अन्याय: मुफ्ती

- शोपियां मदरसा गैर-कानूनी घोषित करने पर उठाए सवाल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
श्रीनगर। महबूबा मुफ्ती ने शोपियां में दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत एक गैर-कानूनी संस्था घोषित किए जाने की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इस कदम को समाज के वंचित वर्गों के साथ घोर अन्याय बताया है। मुफ्ती ने इस फैसले के छात्रों और संस्था से जुडे हाशिए पर पडे समुदायों पर पडऩे वाले असर को लेकर चिंता जताई है। मुफ्ती ने तर्क दिया कि ऐसे कदमों का सबसे ज्यादा असर गरीबों और कमजोर लोगों पर पडता है, जिनमें से कई लोग शिक्षा और मदद के लिए इन्हीं मदरसों पर निर्भर रहते हैं।
उन्होंने अधिकारियों से इस कदम पर फिर से विचार करने का आग्रह किया और जोर देकर कहा कि वंचित वर्गों की सेवा करने वाली संस्थाओं के साथ व्यवहार करते समय निष्पक्षता और संवेदनशीलता बरतना जरूरी है। कई राजनीतिक आवाजें इसके व्यापक सामाजिक और शैक्षिक प्रभावों को लेकर चिंता जता रही हैं। वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद चौधरी मोहम्मद रमजान ने कहा कि यह पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ही थी, जिसने अपने कार्यकाल के दौरान जम्मू-कश्मीर में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम लागू किया था। सत्ताधारी पार्टी की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हुए चौधरी ने कहा कि उन्हें अभी तक इस संस्था को गैर-कानूनी घोषित किए जाने के पीछे के कारणों के बारे में पूरी जानकारी नहीं मिली है।
सज्जाद लोन ने भी जताई नाराजगी
पीपल्स कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद लोन ने भी एक्स पर शोपियां में दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को बंद किए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह कानूनों का इस्तेमाल सिर्फ बेसहारा लोगों के खिलाफ कर रही है। सज्जाद लोन ने बताया कि शोपियां में दारुल उलूम जामिया सिराज-उल-उलूम को एक गैर-कानूनी संस्था घोषित करने का कदम बेहद चिंताजनक है. अब यह एक चलन बन गया है और यह खतरनाक है. चुनिंदा लोगों को निशाना बनाने की रणनीति पहले भी काम नहीं आई है और अब भी काम नहीं आएगी. मुझे हैरानी होती है कि सारे कानून सिर्फ सबसे ज्यादा बेसहारा लोगों के लिए ही क्यों होते हैं?



