प्रचार खत्म माहौल गर्म
धमकियों, आरोपों और सियासी तकरार के बीच उबलता बंगाल

- डराएगा तो ठोकाएगा दीदी जैसे शब्दों से गूंज रहे राजनीतिक मंच
- बंगाल चुनाव से चर्चा में आये आईपीएस यशपाल शर्मा पर बरसे अखिलेश यादव
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बंगाल की सियासत इस वक्त सिर्फ चुनावी जंग नहीं बल्कि शब्दों की गोलियों आरोपों की बौछार और माहौल की तपिश से भरा हुआ एक उबलता हुआ अखाड़ा बन चुकी है। प्रचार थम चुका है लेकिन राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है।
एक तरफ सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस है जो खुद को हमलों और साजिशों का शिकार बता रही है तो दूसरी तरफ भाजपा है जो इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार में जुटी है। इतिहास गवाह है कि चुनावी महौल में आरोप चाहे जितने गंभीर लगे हों लेकिन किसी निवर्तमान मुख्यमंत्री को जान से मारने की धमकी का आरोप नहीं लगा। तणृमूल कांग्रेस ने यह कह कर सनसनी फैला दी है कि सीएम ममता बनर्जी को खुले मंच से जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
राजनीति में तीखे बयान कोई नई बात नहीं
राजनीति में तीखे बयान कोई नई बात नहीं लेकिन जब शब्दों का स्तर इस हद तक गिर जाए कि उनमें हिंसा की बू आने लगे तो सवाल सिर्फ एक नेता या एक पार्टी का नहीं रह जाता। यह लोकतंत्र की भाषा और उसकी मर्यादा का सवाल बन जाता है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया गया वह न सिर्फ आपत्तिजनक है बल्कि खतरनाक भी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट को लेकर सियासी भूचाल आ गया है जिसमें कथित तौर पर डराएगा तो ठोकाएगा दीदी जैसे शब्दों का इस्तेमाल हुआ। यह वाक्य अब राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन चुका है। टीएमसी का कहना है कि यह सिर्फ एक बयान नहीं बल्कि एक मानसिकता का प्रतीक है। एक ऐसी मानसिकता जो डर और धमकी के जरिए सत्ता हासिल करना चाहती है। इसी बीच विपक्षी खेमे से भी प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने बंगाल चुनाव के दौरान चर्चा में आए आईपीएस अधिकारी यशपाल शर्मा पर निशाना साधते हुए प्रशासनिक निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि बंगाल की लड़ाई अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं रह गयी है। बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का अखाड़ा बन चुकी है।
चुनाव आयोग की भूमिका
चुनाव आयोग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। टीएमसी का आरोप है कि इतनी गंभीर घटनाओं के बावजूद आयोग चुप्पी साधे हुए है। क्या यह चुप्पी निष्पक्षता है या लापरवाही? यह सवाल अब जनता के मन में गूंज रहा है। 4 मई को होने वाले मतदान और उसके बाद आने वाले नतीजे सिर्फ सीटों का फैसला नहीं करेंगे बल्कि यह भी तय करेंगे कि क्या बंगाल की जनता इस तरह की भाषा और राजनीति को स्वीकार करती है या उसे खारिज कर देती है। जैसे-जैसे 4 मई की तारीख नजदीक आ रही है, बंगाल की जनता के बीच बेचैनी और उत्सुकता दोनों बढ़ती जा रही हैं। दूसरे चरण के मतदान के बाद अब सबकी निगाहें अंतिम परिणामों पर टिकी हैं। टीएमसी ने साफ कर दिया है कि वह इन कथित धमकियों का जवाब वोट के जरिए देगी। पार्टी का कहना है कि बंगाल की जनता अपमान और डर को कभी बर्दाश्त नहीं करती। यह वही राज्य है जिसने हर बार अपने तरीके से जवाब दिया है। कभी सत्ता बदलकर तो कभी सत्ता को और मजबूत करके।
टीएमसी ने भाजपा पर लगाया बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को जान से मारने की धमकी देने का आरोप
टीएमसी ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को खुलेआम जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। टीएमसी ने अपने आधिकारिक एक्स पोस्ट में कहा कि पहले दुष्कर्म की धमकियां और अपमानजनक कार्टून फैलाए गए और अब भाजपा इस स्तर तक गिर गई है कि खुलेआम जान से मारने की धमकी दे रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रवक्ता अजय आलोक ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा है कि डराएगा तो ठोकाएगा दीदी जिसका मतलब है कि अगर आप डराने की कोशिश करेंगी तो आपको गोली मार दी जाएगी। टीएमसी ने इसे तीन बार चुनी गई मुख्यमंत्री के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और खतरनाक बताया। साथ ही चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग इस पूरे मामले पर मूकदर्शक बना हुआ है। पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह उत्तर प्रदेश और बिहार की गोली मारो और ठोक दो वाली राजनीति को बंगाल में लाना चाहती है। टीएमसी ने यह भी कहा कि इस तरह की धमकी और डराने की संस्कृति को शीर्ष नेतृत्व का समर्थन मिला हुआ है। टीएमसी ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक महिला मुख्यमंत्री के बारे में इस तरह की भाषा इस्तेमाल की जा रही है तो आम महिलाओं और बेटियों के साथ क्या हो सकता है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। टीएमसी का कहना है कि बंगाल ऐसी बातों को न भूलता है और न माफ करता है। यह अपमान और धमकी का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि वोट के जरिए दिया जाएगा। पार्टी ने 4 मई को होने वाले मतदान का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन बंगाल अपनी आवाज जरूर बुलंद करेगा। संबंधित खबरें अंदर भी




