हिंसा की छाया, वोटों की बारिश, बंगाल में जिद बनाम जनादेश की जंग

  • मर जाएंगे हटेंगे नहीं ममता का आक्रामक संदेश
  • दूसरे और अंतिम चरण के लिए डाले जा रहे हैं वोट
  • शुरुआती घंटों में बंपर वोटिंग बूथों पर लंबी कतारें
  • दोपहर तक वोटिंग 61 प्रतिशत के ऊपर

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुबह के सात बजते ही पश्चिम बंगाल की सियासत ने एक बार फिर खुद को बैलेट बाक्स के हवाले कर दिया। पूरे पश्चिम बंगाल में बस एक ही चीज दिखाई और सुनाई दे रही है और वह है मतदान। एक तरफ बूथों पर उमड़ती भीड़ दूसरी तरफ तनाव और छिटपुट हिंसा की खबरें। एक तरफ लोकतंत्र का उत्सव तो दूसरी तरफ आरोपों का धुआं। तस्वीर दो है लेकिन सच एक ही निकलेगा और वह निकलेगा वोटिंग मशीन से। राज्य की 142 विधानसभा सीटों पर चल रहे अंतिम चरण के मतदान ने शुरुआत से ही संकेत दे दिया है कि आज का दिन साधारण नहीं है। सुबह के पहले दो घंटों में ही 18 प्रतिशत से ज्यादा मतदान यह आंकड़ा सिर्फ प्रतिशत का नहीं है बल्कि उस मनोदशा का संकेत है जिसमें मतदाता घर से निकल रहा है। हालांकि खबर लिखे जाने तक वोटिंग 61 प्रतिशत के ऊपर जा चुका था। लेकिन यहा कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। यह कहानी है उस टकराव की जो पिछले कई हफ्तों से सड़कों सभाओं और बयानबाज़ी में दिखाई दे रहा था। ममता बनर्जी का बयान कि हम मर जाएंगे लेकिन अपनी जगह नहीं छोड़ेंगे अब सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं रहा बल्कि चुनावी माहौल की धड़कन बन चुका है। ग्राउंड से आ रही रिपोट्र्स बता रही हैं कि कई जगहों पर मतदाता सुबह से ही लाइन में लग गए खासकर महिलाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने ध्यान खींचा। वहीं कुछ इलाकों में तनाव और झड़पों की खबरें भी सामने आई हैं जिन पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण के मतदान का ट्रेंड देखते हुए सवाल अब सीधा है कि क्या यह उत्साह बदलाव का संकेत है या स्थिरता की पुष्टि? क्योंकि बंगाल आज सिर्फ वोट नहीं डाल रहा—वह अपने अगले राजनीतिक अध्याय की दिशा तय कर रहा है।

ममता के गंभीर आरोप और मतदान में हिंसा

बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने भाजपा और चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि केंद्रीय बल मतदान के दौरान बाधा डाल रहे हैं और भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं जिससे भाजपा को जिताया जा सके। दूसरी तरफ विधानसभा चुनाव की वजह से जिलों के विभिन्न स्थानों पर हिंसा और प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच झड़पों की खबरें सामने आने लगी हैं। जिनमें दक्षिण 24 परगना अशांति का केंद्र बना हुआ है। पानीहाटी में भाजपा-टीएमसी समर्थकों के बीच हाथापाई की जानकारी है। हुगली-चुचुड़ा में सड़क किनारे लगे तृणमूल के कई चुनावी बैनरों को हटाने पर बवाल हुआ। वहीं बूथ नंबर 27, 28 और 29 पर वोटर लिस्ट फाडऩे को लेकर विवाद हो गया। कथित तौर पर केंद्रीय बलों के कुछ जवानों को तृणमूल के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने वहां से भगाने की कोशिश की। इसके अलावा पानीहाटी विधानसभा क्षेत्र के बूथ 145 पर भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ताओं के बीच झगड़ा हो गया। वोटिंग के दौरान यह झगड़ा काफी देर चला जिसके बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और स्थिति पर नियंत्रण पाने की कोशिश की। वहीं हावड़ा के बाली विधानसभा क्षेत्र में स्थित मशीन में खराबी के कारण मतदाता आक्रोशित हो गए। बूथ नंबर 152, 153 और 154 पर भारी हंगामा हुआ। हालांकि, केंद्रीय बलों ने लाठीचार्ज करके स्थिति को संभाला। इस घटना में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है। हावड़ा पुलिस कमिश्नर भी मौके पर मौजूद हैं।

सीसीटीवी की निगरानी में हो रहा मतदान

मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा है कि भारत निर्वाचन आयोग चाहता है कि जिस किसी का भी नाम मतदाता सूची में है वह मतदान करे। पहले चरण ने देश को यह दिखाया कि 93 प्रतिशत तक मतदान भी संभव है। उन्होंने बताया कि सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है। कोई बड़ी घटना नहीं हुई है। जो भी मुद्दे सामने आ रहे हैं हम उन्हें तत्काल हल कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोप पर मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि जो कोई भी गुंडागर्दी कर रहा है उसका नाम हमें दें भारत निर्वाचन आयोग किसी को भी नहीं बख्शेगा। जहां कहीं भी समस्याएं आ रही हैं हम सीसीटीवी कैमरों के जरिए उनकी पहचान कर पा रहे हैं और जैसे ही हमें जानकारी मिलती है हम उन्हें सुलझा रहे हैं।

ममता बनर्जी और सुवेंदु अधिकारी पोलिंग बूथ पर पहुंचे आपस में नहीं की बात

कोलकाता के भवानीपुर में एक दिलचस्प राजनीतिक पल देखने को मिला जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी एक ही समय पर चक्रबेरिया स्थित कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 73 के एक मतदान केंद्र पर पहुंचे। हालांकि दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत नहीं हुई लेकिन उनकी एक साथ मौजूदगी ने चुनावी माहौल को और गर्मा कर दिया। यह घटना उस समय देखने को मिली जब आज सुबह दक्षिण बंगाल की 142 सीटों पर मतदान जारी है। भवानीपुर इस चुनाव में सबसे चर्चित सीटों में से एक बनकर उभरा है जहां मुकाबला मुख्य रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा है। भवानीपुर सीट का राजनीतिक महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह ममता बनर्जी का पारंपरिक गढ़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए भाजपा ने यहां से सुवेंदु अधिकारी को मजबूत चुनौती के रूप में चुनावी मैदान में उतारा है। सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं जहां उन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को हराया था। नंदीग्राम में पहले चरण में मतदान हो चुका है।

भवानीपुर का यह मुकाबला नंदीग्राम की चुनावी टक्कर का रीमैच

भवानीपुर का यह मुकाबला नंदीग्राम की चुनावी टक्कर का रीमैच माना जा रहा है। गौरतलब है कि सुवेंदु अधिकारी पहले ममता बनर्जी के करीबी सहयोगी और शिष्य माने जाते थे लेकिन 2021 चुनाव से पहले उन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था। दोनों पार्टियों के लिए भवानीपुर सीट प्रतिष्ठा का सवाल बन गई है। टीएमसी के लिए यह मुख्यमंत्री के अपने क्षेत्र की साख से जुड़ा मामला है जबकि भाजपा और खासकर शुभेंदु अधिकारी के लिए यहां जीत हासिल करना एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने जैसा होगा। भवानीपुर सीट 2011 से तृणमूल कांग्रेस का गढ़ रही है। वरिष्ठ नेता सुभ्रत बक्शी ने यहां से जीत हासिल की थी और बाद में सीट छोड़ दी थी।

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