हमीरपुर: कलेक्ट्रेट में सेट था ‘रेट’? फौजी की एक शिकायत ने खोल दी पूरी पोल

हमीरपुर कलेक्ट्रेट में भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा। चकबंदी विभाग का पेशकार रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार। रिटायर्ड फौजी की शिकायत पर एंटी करप्शन टीम की कार्रवाई, अब बड़े नेटवर्क पर भी जांच की आंच तेज।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः  हमीरपुर से आई यह खबर सिर्फ एक गिरफ्तारी की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम पर सवाल है जिस पर आम आदमी भरोसा करता है। जिस कलेक्ट्रेट को प्रशासनिक न्याय का केंद्र माना जाता है, वहीं अगर “रेट तय” होने लगें, तो यह मामला महज भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि व्यवस्था पर गहरा धब्बा बन जाता है।

मामला क्या है: फौजी से मांगी गई रिश्वत, फिर बिछा जाल

जानकारी के मुताबिक, कलेक्ट्रेट परिसर स्थित चकबंदी विभाग में तैनात पेशकार अल्ताफ़ पर एक रिटायर्ड आर्मी हवलदार धर्मवीर सिंह से रिश्वत मांगने का आरोप लगा। आरोप है कि नक्शा सुधार के नाम पर पहले 1.5 लाख रुपये की मांग की गई, जिसे बाद में 25 हजार रुपये पर “फाइनल” किया गया। धर्मवीर सिंह, जिन्होंने देश की सेवा की है, इस मांग के आगे झुके नहीं। उन्होंने सीधे एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई।

एंटी करप्शन की कार्रवाई: 20 सदस्यीय टीम ने रंगे हाथ पकड़ा

शिकायत मिलने के बाद बांदा से एंटी करप्शन की करीब 20 सदस्यीय टीम हमीरपुर पहुंची। पूरी योजना के तहत जाल बिछाया गया। जैसे ही आरोपी पेशकार ने रिश्वत की रकम ली, टीम ने मौके पर ही उसे गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर ही हुई, जिसने पूरे प्रशासनिक ढांचे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपी को तुरंत सदर कोतवाली ले जाया गया, जहां उससे पूछताछ जारी है।

बड़ा सवाल: क्या यह अकेला मामला है या पूरी चेन?

इस घटना के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है, क्या यह सिर्फ एक कर्मचारी का मामला है या इसके पीछे एक पूरी “चेन” काम कर रही है? स्थानीय सूत्रों का कहना है कि चकबंदी जैसे विभागों में लंबे समय से शिकायतें आती रही हैं, लेकिन इस तरह रंगे हाथ गिरफ्तारी ने पहली बार सिस्टम के अंदर की सच्चाई को उजागर किया है।

पीड़ित का बयान: “देश के लिए लड़ा हूं, रिश्वत नहीं दूंगा”

धर्मवीर सिंह ने साफ कहा,“मैंने देश के लिए लड़ाई लड़ी है, रिश्वत नहीं दूंगा। इसलिए शिकायत की और अब कार्रवाई हुई।” उनका यह बयान न सिर्फ साहस का प्रतीक है, बल्कि उन हजारों लोगों के लिए संदेश भी है जो भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से डरते हैं।

प्रशासन पर असर: जांच के दायरे में आ सकते हैं बड़े नाम

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई और नाम सामने आ सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

हमीरपुर में हुई यह कार्रवाई केवल एक भ्रष्ट कर्मचारी की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को आईना दिखाने वाली घटना है। जब कलेक्ट्रेट जैसे संस्थान के भीतर ही भ्रष्टाचार उजागर होता है, तो यह आम नागरिक के भरोसे को हिला देता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या यह कार्रवाई बड़े बदलाव की शुरुआत बनती है या फिर यह मामला भी बाकी मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।

रिपोर्ट – इक़बाल खान

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