मिर्जापुर: गौ संरक्षण की खुली पोल, सड़क पर पड़ा रहा शव और सिस्टम रहा बेखबर
मिर्जापुर में सांड के हमले से गाय की मौत हो गई और महिला घायल हुई। सड़क पर शव पड़ा रहने से प्रशासन की लापरवाही सामने आई। गौ संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोग नगर पालिका की कार्यशैली पर नाराजगी जता रहे हैं।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: मिर्जापुर में गौ संरक्षण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर की सड़कों पर छुट्टा घूमते गौवंश न केवल आम लोगों के लिए खतरा बन रहे हैं, बल्कि खुद भी असमय मौत का शिकार हो रहे हैं। ताजा मामला महंत शिवाला क्षेत्र का है, जहां इंडियन बैंक के पास हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि व्यवस्था की जमीनी सच्चाई को उजागर करने वाली तस्वीर बन गई है।
सांड के हमले में महिला घायल, गाय की मौके पर मौत
स्थानीय जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब पांच बजे महंत शिवाला इलाके में एक उग्र सांड ने अचानक उत्पात मचा दिया। देखते ही देखते क्षेत्र में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। इसी दौरान सांड के हमले में एक महिला घायल हो गई। स्थानीय लोगों ने किसी तरह उसे बचाया और प्राथमिक सहायता दिलाई। लेकिन स्थिति और बिगड़ गई जब उसी सांड ने एक गाय पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
सड़क किनारे पड़ा रहा गाय का शव, प्रशासन पर उठे सवाल
सबसे गंभीर बात यह रही कि घटना के अगले दिन मंगलवार तक मृत गाय का शव सड़क किनारे ही पड़ा रहा। स्थानीय लोगों के अनुसार, नगर पालिका प्रशासन या किसी जिम्मेदार विभाग ने शव को हटाने की कोई पहल नहीं की। इस लापरवाही से क्षेत्र में नाराजगी फैल गई और लोगों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि गौ संरक्षण की बात करने वाले सिस्टम में जमीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है।
छुट्टा गौवंश बन रहे हैं दुर्घटनाओं का कारण
मिर्जापुर ही नहीं, बल्कि कई शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा गौवंश एक बड़ी समस्या बन चुके हैं। सड़क पर घूमते ये पशु आए दिन दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं, और कई बार खुद भी गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या उनकी मौत हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक स्तर पर कई बार शिकायत के बावजूद स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है।
गौ संरक्षण अभियान पर उठते सवाल
सरकार द्वारा गौ संरक्षण को लेकर कई योजनाएं और अभियान चलाए जाने के बावजूद, जमीनी स्थिति में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में गौवंशों की स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि कागजों पर योजनाएं सफल दिखाई जाती हैं, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है।
जिम्मेदारी और व्यवस्था पर बहस
इस घटना के बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि आखिर गौ संरक्षण की जिम्मेदारी किस स्तर पर कमजोर हो रही है। क्या यह सिर्फ संसाधनों की कमी है या फिर निगरानी व्यवस्था की विफलता? स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकना मुश्किल है।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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