चुनाव हुआ या तमाशा? बंगाल नतीजों पर भड़के संजय सिंह, चुनाव आयोग को भी जमकर लगाई लताड़
संजय सिंह ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, ''पश्चिम बंगाल चुनाव में ढाई लाख सुरक्षा बल लगाए गए.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बंगाल विधानसभा चुनाव के चौंकाने वाले नतीजों को लेकर देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
एक तरफ जहां बीजेपी खेमे में ख़ुशी की लहर है तो वहीं दूसरी तरफ विपक्ष एकबार फिर इसे संदेह भरी निगाहों से देख रहा है। बंगाल में आलम ये है कि भाजपा की जीत होने के बाद से भाजपाइयों ने उतापात मचानी शुरू कर दी है।
इसी बीच चुनावी नतीजों को मद्देनजर रखते हुए आप नेता संजय सिंह ने भी भाजपा और चुनाव आयोग पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव में ममता बनर्जी से लड़ने के लिए मोदी सरकार ने ढाई लाख सैनिकों का इस्तेमाल किया.
संजय सिंह ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए कहा, ”पश्चिम बंगाल चुनाव में ढाई लाख सुरक्षा बल लगाए गए. कल्पना कीजिए. ईरान से लड़ने के लिए अमेरिका 50000 सैनिकों का इस्तेमाल करता है और भारत की मोदी जी की सरकार ममता बनर्जी से लड़ने के लिए ढाई लाख सैनिकों का इस्तेमाल करती है. इतनी बड़ी दुश्मनी है, ये निभाई जा रही है.”
पश्चिम बंगाल के 2026 विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग ने रिकॉर्ड 2.4 लाख सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स जवानों को तैनात किया। यह संख्या लगभग 2400 कंपनियों के बराबर है।
मोदी सरकार और भाजपा के समर्थक इसे “निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने” का कदम बताते हैं, जबकि विपक्ष इसे “ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ सैन्य घेराबंदी” कहता है। ट्रंप ने ईरान से टकराव के लिए 50 हजार सैनिक लगाए, तो मोदी-भाजपा ने एक राज्य की चुनावी लड़ाई के लिए ढाई लाख सैनिक। ऐसे में सवाल उठा कि क्या यह चुनाव था या लोकतंत्र का प्रदर्शन?
यह आलोचना भी गंभीर है। इतनी बड़ी फोर्स एक राज्य में लगाना सामान्य नहीं है। विपक्ष का आरोप है कि यह “भाजपा का चुनावी इंजन” था। केंद्रीय बलों की भारी मौजूदगी ने TMC के मजबूत इलाकों में उनके कार्यकर्ताओं को पीछे धकेल दिया। कुछ इलाकों में लोग कहते हैं कि फोर्स ने वोटरों को डराया।
साथ ही, चुनाव से पहले करोड़ों वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए – पश्चिम बंगाल में करीब 90 लाख नाम कटे। विपक्ष कहता है कि इसमें मुस्लिम वोटर ज्यादा प्रभावित हुए, जो TMC का वोट बैंक है। भाजपा इसे “बांग्लादेशी घुसपैठियों” की सफाई बताती है।
गौरतलब है कि चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लग रहा है। ममता बनर्जी ने इसे “BJP Commission” कहा। नतीजों में BJP भारी बहुमत की ओर बढ़ रही है, TMC पीछे। विपक्ष दावा कर रहा है कि 100 से ज्यादा सीटें “चोरी” हुईं। गिनती के दौरान कुछ सीटों के ट्रेंड गायब होने, स्ट्रॉन्ग रूम के पास बिजली गुल होने के आरोप फिर उठे।
लेकिन भाजपा की हाँ में हाँ मिलाने वाले चुनाव आयोग ने इन आरोपों को पहले की तरह खारिज किया और आयोग कहता है कि हमने निष्पक्षता से काम किया। लेकिन अब जब इतनी भारी सुरक्षा और वोटर लिस्ट में बदलाव एक साथ हो, तो संदेह स्वाभाविक है। चुनाव शांतिपूर्ण होना अच्छा है, लेकिन तरीका सवालों के घेरे में है। अगर सुरक्षा की जरूरत थी तो समझ में आता है, पर इतनी भारी तैनाती और अन्य कदम मिलकर “तमाशा” का एहसास देते हैं।
सच्चा लोकतंत्र तब होगा जब हर पार्टी को बराबर मौका मिले, फोर्स का डर न हो और आयोग पर सबका भरोसा हो। अभी पश्चिम बंगाल में जो हुआ, उससे लोकतंत्र मजबूत हुआ या कमजोर – समय और निष्पक्ष जांच बताएगी। लेकिन जिस हिसाब से विपक्ष भाजपा और चुनाव आयोग पर ऊँगली उठा रहा है इससे लगता है कि कहीं न कहीं दाल में कुछ काला ज़रूर है।


