तमिलनाडु में झुके नारियल को लेकर चढ़ा सियासी पारा

  • वीसीके व डीएमके में छिड़ी जुबानी जंग
  • टीवीके के सरकार में शामिल होने पर रार

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में डीएमके और उसके पूर्व सहयोगी वीसीके के बीच तब तीखा टकराव शुरू हो गया। अब वहा जुबानी जंग में नारियल की एंट्री हो गई है। दरअसल पूरी बयानबाजी तब शुरू हुई जब वीसीके, टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गई। डीएमके नेता ए राजा के झुके हुए नारियल के पेड़ वाले कटाक्ष पर वीसीके ने पलटवार करते हुए डीएमके को उसके पुराने गठबंधनों, विशेषकर भाजपा के साथ सहयोग, की याद दिलाई।
विदुथलाई चिरुथाइगल काची और आईयूएमएल के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने के बाद डीएमके और उसके पूर्व सहयोगी वीसीके के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस फैसले से वफादारी और गठबंधन की राजनीति को लेकर तीखी आलोचना और राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई। यह जुबानी जंग तब शुरू हुई जब वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), जो 26 के विधानसभा चुनाव तक डीएमके के सहयोगी थे, ने टीवीके सरकार को समर्थन दिया। विधानसभा में टीवीके को साधारण बहुमत के 118 अंक नहीं मिले।

राजा ने झुकते नारियल के पेड़ से की वीसीके की तुलना

एक्स पर एक पोस्ट में राजा ने इशारों-इशारों में कहा कि अगर मेरे बगीचे का नारियल का पेड़ झुककर पड़ोसी को कच्चा नारियल दे, तो साहित्य में उसे मुत्तथेंगु (आंगन का पेड़) कहा जाएगा। राजनीति में हम इसे क्या नाम दें? उन्होंने पोस्ट का अंत तमिल जिंदाबाद कहकर किया। वीसीके और आईयूएमएल ने पहले स्पष्ट किया था कि टीवीके सरकार को उनका समर्थन तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन को रोकने के उद्देश्य से था, और उन्होंने यह भी कहा था कि डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को उनके स्वतंत्र निर्णय की जानकारी दे दी गई थी। कांग्रेस और वामपंथी दलों ने भी टीवीके को सरकार बनाने में समर्थन दिया।

कांग्रेस को हराने के लिए संघ परिवार के साथ गठबंधन किया : वीसीके

राजा की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए वीसीके ने कहा कि वह अन्य पार्टियों की दया पर नहीं पनपी और जोर देकर कहा कि उसका राजनीतिक आधार शोषित समुदायों के पसीने और खून से बना है। वीसीके ने एक्स पर कहा कि दल-बदल के बारे में बात करने का अन्य दलों को क्या अधिकार है? किसका इतिहास है कि उन्होंने कांग्रेस को हराने के लिए संघ परिवार (भाजपा) के साथ गठबंधन किया? किसका स्वार्थ है कि वे वाजपेयी मंत्रिमंडल का हिस्सा थे और फिर उसी भाजपा का विरोध किया? तमिलनाडु ने ऐसे कई राजनीतिक नाटक देखे हैं।

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